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  • कश्मीर में हिन्दोस्तानी राज्य के बर्बर आतंक का राज अनवरत जारी है।
    एक तरफ, पुलिस, सेना व अर्धसैनिक बल बेकसूर लोगों, महिलाओं व बच्चों पर गोली चलाते जा रहे हैं, बेधड़क बलात्कार और लूट-पाट करते जा रहे हैं। बेकसूर लोगों को “भयानक आतंकवादी” करार दिया जाता है, फ़र्ज़ी मुठभेड़ों में मार डाला जाता है, “तलाशी” लेने के बहाने घरों को लूटा और तहस-नहस कर दिया जाता है, नौजवान “लापता” होते रहते हैं या हिरासत में उनकी “मौत हो जाती है”। “पथराव करने वालों का मुकाबला करने” के नाम पर सैकड़ों लोगों को पेलेट बुलेट से अंधा बना देना, निहत्थे नौजवानों को सेना की गाड़ी पर बांध कर “मानव ढाल” की तरह इस्तेमाल करना - इन सारे क़दमों को सेनाध्यक्ष और केंद्र सरकार के प्रवक्ताओं ने जायज़ ठहराया है। सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (आफ्सपा) के चलते, कश्मीर में सेना को शक के आधार पर गोली चलाने, बलात्कार और अत्याचार करने की निरंकुश ताक़तें दी गयी हैं, और उसे किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही से बचाव मिलता है। जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 नामक काले कानून के तहत, नाबालिग बच्चों समेत सैकड़ों लोगों को किसी भी सबूत के बिना सालों-सालों तक जेल में बंद कर दिया जाता है और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।

  • लोक राज संगठन द्वारा आयोजित राजनीतिक मंच
    MTG on Anarchy30 सितम्बर, 2018 को लोक राज संगठन ने “बढ़ती अराजकता और नफ़रत भरे अपराधों का स्रोत” इस विषय पर दिल्ली में एक राजनीतिक मंच का आयोजन किया। इस राजनीतिक मंच में कई राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार पेश किये। इनमें गांधीयन इनिशिएटिव फॉर सोशल ट्रांसफॉर्मेशन के राजराजन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक के जी. देवराजन, यू.टी.यू.सी. के आर.एस. डागर, एटक से धीरेन्द्र शर्मा, एस.डी.पी.आई. के राष्ट्रीय सचिव अब्दुल वारिस, एस.डी.पी.आई. के राज्य संयोजक निजामुद्दीन खान, आई.एफ.टी.यू. सर्वहारा के कृष्ण कान्त, प्रवासी सेना के अध्यक्ष मनोज राय, कॉन्कोर कंटेनर एम्प्लाईज़ यूनियन के अध्यक्ष विनय चौधरी, लोक राज संगठन की दिल्ली परिषद के सचिव बिरजू नायक तथा कई नौजवान और मज़दूर वक्ता शामिल थे।
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितम्बर को झारखण्ड से आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना का उद्घाटन किया। सरकारी प्रचार माध्यम के अनुसार, आयुष्मान भारत दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का पहला सत्र 2018-2020 में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत मुख्य पहलकदमियां हैं देश के कोने-कोने में हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर की स्थापना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का नाम दिया गया है। सम्पूर्ण आयुष्मान भारत योजना को लागू करने वाली सरकारी निकाय नेशनल हेल्थ एजेंसी (एन.एच.ए.) होगी।

  • सितम्बर 2018 में अमरीकी सरकार ने अपने देश में आयात की जाने वाली कई वस्तुओं पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया। जिसका निशाना ख़ास तौर पर चीन से 200 अरब अमरीकी डॉलर के मूल्य की आयात की जाने वाली वस्तुओं को बनाया जा रहा है, जिनमें बड़े पैमाने पर उपभोग की वस्तुएं शामिल हैं। अमरीका की ओर से यह सबसे नया और सबसे बड़ा ऐसा क़दम है जो कि भू-राजनीतिक जंग में उठाया जा रहा है और व्यापार नीति का इस्तेमाल एक और हथियार बतौर किया जा रहा है। अमरीका द्वारा शुल्कों को बढ़ाने के पलटवार में चीन ने अपने देश में बिकने वाली 60 अरब अमरीकी डॉलर की अमरीकी वस्तुओं और सेवाओं पर 24 सितम्बर, 2018 से नये शुल्कों की घोषणा की है।

  • Police attack on Farmerभारतीय किसान यूनियन (बी.के.यू.) के झंडे तले संगठित होकर, 2 अक्तूबर को हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पहुंचे। 23 सितंबर को हरिद्वार से इन किसानों ने किसान क्रांति यात्रा शुरू की थी जिसका समापन उन्होंने दिल्ली में किया। आंदोलन करने वाले किसानों ने किसान घाट तक प्रदर्शन करने और अपनी मांगों को उजागर करने के लिए किसान घाट में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित करने की अपनी योजना की घोषणा की थी। उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ बातचीत करने का प्रयास भी किया, ताकि वे अपनी दीर्घकालिक मांगों को पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव डाल सकें और अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन दे सकें।

  • All India worker convention28 सितम्बर, 2018 को ट्रेड यूनियनों, अन्य मज़दूर संगठनों और फेडरेशनों की अगुवाई में, नई दिल्ली के मावलंकर हाल में मज़दूरों का सर्व हिन्द सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों - रक्षा, बैंक, बीमा, रेलवे, सड़क परिवहन, जल परिवहन, पोर्ट एंड डॉक, तेल, ऊर्जा, टेलीकाम, खनन, स्टील, कोयला, जल परिवहन, बंदरगाह, भारी इंजीनियरिंग आदि - से जुड़ी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने उत्साह से हिस्सा लिया। इसके अलावा सम्मेलन में आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स तथा घरेलू कामगारों की यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

  • देश के मज़दूर बार-बार यह मांग करते आ रहे हैं कि हिन्दोस्तानी राज्य को सभी मज़दूरों के लिए जीने लायक वेतन सुनिश्चित करना चाहिए। मज़दूर एक ऐसे वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं जिससे वे अपने परिवार सहित सम्मान का जीवन जी सकें। मज़दूर सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा व पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ताकि नौकरी छूट जाने पर, बीमार पड़ने पर, विकलांग होने पर या वृद्धावस्था में उन्हें कुछ सुरक्षा मिले।

  • protest at Hariyana Bhawanहरियाणा के रेवाड़ी में 19 वर्षीय लड़की के सामूहिक बलात्कार के विरोध में 17 सितंबर को अनेक हिला संगठनों ने दिल्ली में हरियाणा भवन के सामने मिलकर घेराव किया। एडवा, एपवा, एन.एफ.आई.डब्ल्यू., पुरोगामी महिला संगठन, स्वास्तिक महिला समिति, सी.एस.डब्ल्यू., ए.आई.एम.एस.एस., डी.वाई.एफ.आई., एस.एफ.आई., के.वाई.एस. और कई अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

  • Kisan sansadपिछले कुछ वर्षों में देशभर के किसान अपने लिए आजीविका की सुरक्षा की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरते आ रहे हैं। एक मांग यह है कि सरकार उनकी फसलों के लिए लागत की क़ीमत के 1.5 गुना दाम की गारंटी दे और इसे सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी तंत्र स्थापित करे। किसानों की इस मांग को पूरा करने की बजाय सरकार ऐसी योजनाओं की घोषणा कर रही है जो कृषि व्यापार पर नियंत्रण करने वाले पूंजीपतियों के हित में हैं और किसानों के ख़िलाफ़ हैं। 12 सितम्बर, 2018 को सरकार ने एक नयी योजना प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पी.एम.-आशा) की घोषणा की। सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत किसानों के लिए फसलों को लाभकारी क़ीमत पर ख़रीदे जाने की गारंटी होगी। 

  • Sewres workerदेश के अलग-अलग भागों में सीवर में मल साफ करने वालों की मौतों का विरोध करने के लिये नई दिल्ली में 25 सितंबर, 2018 को संसद पर एक रैली आयोजित की गई। अनेक राजनीतिक पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में छात्र और नौजवान रैली में उपस्थित थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर थे जिन पर नारे लिखे हुये थे जैसे कि - “हमें मारना बंद करो!”, “सीवर में मरते महीने में पचास, किसका साथ, किसका विकास?”, “सरकार भेजे मंगलयान हम गंवायें सीवर में जान!”, “लोग गंवाते सीवर में जान, कैसा ये स्वच्छ भारत अभियान?”, आदि।

  • 24-25 सितम्बर, 2018 को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) का 22वां द्विवार्षिक अधिवेशन राजस्थान के जोधुपर में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सभा के पहले ए.आई.एल.आर.एस.ए. के अध्यक्ष एल. मोनी ने लाल झंडा फहराया। क्रांतिकारी नारे बुलंद किये गये। भारतीय रेल के सभी मंडलों से, महिला रेल चालकों समेत 2000 से ज्यादा रेल चालक और उनके परिवार इस अधिवेशन में शामिल हुये।AILRSA BGM Jothpurसभा के पंडाल को चारों तरफ से ए.आई.एल.आर.एस.ए. के लाल पताकाओं से सजाया गया था। रेल चालकों ने पंडाल के हर तरफ अपने-अपने मंडलों के बैनर लगा रखे थे। अध्यक्ष मंडल में उपस्थित थे केन्द्रीय अध्यक्ष का. एल. मोनी, का. एन.बी. दत्ता, का. टी. हनुमैया, का. के.ए.एस. मनी और उपाध्यक्ष एम.पी. देव व का. आर.आर. भगत। का. तपन सेन, सीटू के महासचिव, ने सभा का उद्घाटन किया। उन्होंने रेल चालकों से आह्वान किया कि रेल चालक न सिर्फ अपनी मांगों के लिये बल्कि पूरे मज़दूर वर्ग की मांगों के लिये संघर्ष करें।

  • Thumbnailशीत युद्ध के अंत के समय से, अमरीकी साम्राज्यवाद की अगुवाई में विश्व साम्राज्यवाद ने मज़दूर वर्ग और लोगों के खि़लाफ़, राष्ट्रों की आज़ादी के खि़लाफ़ और क्रांति व सामाजिक प्रगति की मांग कर रहे लोगों के खि़लाफ़ भयानक हमला छेड़ दिया है। अमरीका और दूसरे पूंजीवादी देशों में शासक वर्ग ने नस्लवाद छेड़ दिया है। वहां मज़दूर वर्ग व लोगों के एकजुट संघर्षों को चूर-चूर करने के लिए नस्ल, धर्म और राष्ट्रीय मूल के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। साम्राज्यवाद बीसवीं सदी में मानव जाति की सारी उपलब्धियों पर हमला कर रहा है और दुनिया को मध्यकालीन युग में पीछे खींचने की कोशिश कर रहा है। पूरी दुनिया में, मज़दूर वर्ग और लोग उन पर थोपी जा रही बेहद असहनीय जीवन के हालातों के खि़लाफ़, ज़ोरदार संघर्ष कर रहे हैं। लोग पूंजीवादी और साम्राज्यवादी शोषण और लूट के खि़लाफ़, राष्ट्रीय संप्रभुता की हिफाज़त में और साम्राज्यवादी व प्रतिक्रियावादी जंग के खि़लाफ़ संघर्ष कर रहे हैं। साम्राज्यवाद और मज़दूर वर्ग व लोगों के बीच इस जीवन और मौत के संघर्ष में अमरीकी साम्राज्यवाद साम्राज्यवादी छावनी का नेता है।

  •  Mazdoor Kisar Rally5 सितम्बर, 2018 को देश के लाखों मज़दूरों और किसानों ने देश की राजधानी में आकर हुक्मरान पूंजीपति वर्ग और उसकी सरकार के प्रति अपने गुस्से का इजहार किया। उन्होंने सरकार की राष्ट्र-विरोधी, जन-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों का जमकर विरोध किया। विभिन्न राज्यों में आयी बाढ़ और दिल्ली की मूसलाधार बारिश रैली में आने से मज़दूरों और किसानों के क़दमों को रोक न सकी। रैली में मज़दूरों और किसानों की ताक़त देखने को मिली।

  • Victory MTG in Rajasthanफसल बीमा के मुआवज़े के लिये किसानों द्वारा चलाये जा रहे लंबे संघर्ष में 1 सितंबर, 2018 को शानदार जीत मिली। इस पर किसान नेताओं और उपखंड जिला अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा बैंक अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। जिसमें यह समझौता हुआ कि 10 दिन के भीतर, रामगढ़, गोरखाना और भुकरका के किसानों का फसल बीमा मुआवज़ा और बैंक खातों से काटा गया अतिरिक्त ब्याज उनके खातों में जमा कर दिया जायेगा।

  • AILRSA 4 सितंबर, 2018 को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) का मण्डलीय अधिवेशन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। यह अधिवेशन दिल्ली के तुगलकाबाद रेलवे कालोनी स्थित बारात घर में हुआ। अधिवेशन में दिल्ली मंडल की समिति का गठन किया गया। इसके साथ ही तुगलकाबाद शाखा का भी गठन किया गया। अधिवेशन में ए.आई.एल.आर.एस.ए. के लगभग 200 सदस्यों ने हिस्सा लिया। संगठन के उत्तरी रेलवे उपाध्यक्ष कॉमरेड रामशरण ने इसकी अध्यक्षता की। अधिवेशन में तुगलकाबाद सहित अनेक शाखाओं के सदस्यों ने अधिवेशन में शिरकत की।

  • देश में सार्वजनिक बैंकों में गैर-निष्पादित संपत्ति (एन.पी.ए.) या डूबे हुए कर्ज़ की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसी ख़बर है कि सबसे अधिक एन.पी.ए. के मामले में हिन्दोस्तान के बैंक दुनिया में अब पांचवें नंबर पर हैं। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों ने चिंता जताई है कि जिस रफ़्तार से एन.पी.ए. बढ़ते जा रहे हैं, उससे हिन्दोस्तान की आर्थिक विकास दर पर विपरीत असर हो सकता है।

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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