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  • केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फोर्स (सी.आर.पी.एफ.) के लगभग 50 सैनिक 14 फरवरी, 2019 को कश्मीर में एक आत्मघाती कार बम विस्फोट में मारे गये। यह हमला उस अति-सुरक्षित महामार्ग पर हुआ, जो कश्मीर घाटी में तैनात सैनिकों के लिये सप्लाई का एक मुख्य रास्ता है। पलटन में लगभग 2,500 सैनिक जा रहे थे और जिस बस पर बम से हमला हुआ, उसमें 40 से ज्यादा सैनिक सवार थे।

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस कायराना आतंकवादी हमले की कड़ी निन्दा करती है। हम सभी मृत सी.आर.पी.एफ. सैनिकों के परिवारों को शोक और सहानुभूति प्रकट करते हैं।

  • “सब का विकास”, जिस नारे के साथ 2014 में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की सरकार बनी थी, वह एक खोखला वादा रह गया है। वह शहरों और गांवों के करोड़ों-करोड़ों मेहनतकशों के लिए एक क्रूर मज़ाक बन कर रह गया है। वह उतना ही खोखला साबित हुआ है जितना कि कांग्रेस पार्टी का “ग़रीबी हटाओ” का नारा था। जबकि मेहनतकश लोग देश की सारी दौलत को पैदा करते हैं, तो हमारी अर्थव्यवस्था मेहनतकशों की ज़रूरतों को पूरा नहीं करती है। आर्थिक संवर्धन से टाटा, बिरला, अम्बानी आदि की अगुवाई में मुट्ठीभर इजारेदार पूंजीवादी घरानों की लालच ही पूरी हो रही है।
  • Thumbहमारे पाठक जानते हैं कि महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एम.एस..डी.सी.एल.) के मज़दूर कलवा, मुंब्रा और दिवा (ठाणे के उपनगरों) में बिजली वितरण के निजीकरण के ख़िलाफ़ एक बहादुर संघर्ष कर रहे हैं। जैसा कि अन्य क्षेत्रों के मज़दूरों के मामले में होता है, सरकार और इजारेदारों द्वारा नियंत्रित मीडिया ने उपयोगकर्ताओं को मज़दूरों के ख़िलाफ़ भड़काने की कोशिश की। हालांकि इस बार वे ऐसा करने में असफल रहे। ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि कई नागरिक संगठनों को इस तथ्य के बारे में पता था कि निजीकरण केवल मज़दूरों पर ही नहीं बल्कि उपयोगकर्ताओं पर भी हमला है; यह एक समाज-विरोधी हमला है। इन संगठनों ने नागरिकों को इसके प्रति जागरुक करने के लिए एक अभियान चलाया।

  • Thumbनागरिकता संशोधन विधेयक (2019) को 8 जनवरी, 2019 को लोक सभा में पास किया गया। इससे पहले और बाद में, असम तथा सभी पूर्वाेत्तर राज्यों में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हुये। राज्य सभा में इस विधेयक का पास होना नामुमकिन लगता है, क्योंकि भाजपा के अलावा बाकी लगभग सारी राजनीतिक पार्टियां इसके प्रावधानों का विरोध कर रही हैं।

  • Thumb10 जनवरी को, असम पुलिस ने 80 वर्ष केएक सम्मानित कवि व लेखक हिरेन गोहैन, आर.टी.आई. किसान कार्यकर्ता अखिल गोगोई और एक वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंता पर राजद्रोह का इलज़ाम लगाया है। ये तीनों नागरिक समाजनामक संस्था के सदस्य हैं और इस संस्था के एक कार्यक्रम में उन्होंने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के ख़िलाफ़ अपने विचार रखे थे, जिसके लिए उन पर यह मामला दर्ज किया गया।

  • Thumb23 जनवरी, 2019 को वेनेजुएला के विपक्ष के नेता ने अपने समर्थकों की एक रैली के सामने, वहां के निर्वाचित राष्ट्रपति मादुरो को नकारते हुये, खुद को देश का अंतरिम राष्ट्रपतिघोषित कर दिया। इस घोषणा के चंद मिनटों के बाद ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस व्यक्ति को वेनेजुएला का वैधराष्ट्रपति को स्वीकृति दे दी। अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ऐलान किया कि वेनेजुएला में शासन परिवर्तन करने के लिए अमरीका अपनी तमाम आर्थिक और कूटनीतिक शक्तियों का इस्तेमाल करेगा।

  • Thumbबांग्लादेश में करीब 50,000 वस्त्र मज़दूर लगातार दो सप्ताह हड़ताल पर थे। अपना विरोध व्यक्त करने के लिये, अपना काम बंद करके वे फैक्टरी से बाहर निकल गये थे। उन्हें पुलिस का सामना करना पड़ा परन्तु उन्होंने अपनी हड़ताल वापस नहीं ली। पुलिस ने बड़ी संख्या में इकट्ठे हुये लोगों को, जिन्होंने राजधानी ढाका के करीब एक वस्त्र उत्पादन केन्द्र के पास महामार्ग का चक्का जाम कर दिया था, उन्हें तितर-बितर करने के लिये पुलिस ने वाॅटर केनन और अश्रु गैस का सहारा लिया। हड़ताल के कारण हजारों फैक्टरियों को बंद करना पड़ा।

  • Thumb22 जनवरी, 2019 से तमिलनाडु की ज्वाइंट एक्शन कमेटी आॅफ टीचर्स आर्गनाइजेशन - गवरमेंट एम्प्लाइज़ आर्गनाइजेशन (जे..सी.टी..-जी...) के सदस्य अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य सरकार द्वारा दी गई तमाम तरह की धमकियों कि काम नहीं, तो वेतन नहींकी घोषणा के बावजूद तमिलनाडु के शिक्षक और सरकारी कर्मचारी अपनी हड़ताल को जारी रखे हुए हैं। इस हड़ताल से पूरे राज्य के सरकारी स्कूल प्रभावित हुए हैं।

  • Thumb23 से 25 जनवरी के बीच देशभर के 4 लाख डिफेंस सिविल कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल की। इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान देशभर की 41 आयुध निर्माण फैक्ट्रियों, 52 डी.आर.डी.. प्रयोगशालाओं, एम..एस, सी..डी., आर्मी बेस वर्कशॉप, थल सेना, नौसेना, वायु सेना के विभिन्न विभागों में काम ठप्प रहा। इस दौरान देश के तमाम सुरक्षा उत्पादन संस्थान पूरी तरह से बंद रहे। कर्मचारी यूनियनों के श्रमिक नेताओं ने आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया।

  • Thumbइस वर्ष एक बार फिर, यूपी के गन्ना किसानों को बकाया के भुगतान के लिए आंदोलन कर रहे हैं। यह पहला साल नहीं है जब ऐसा हुआ है। इस साल 16 जनवरी को शामली में अपर दोआब चीनी मिल के सामने लगभग 50 गन्ना किसानों ने धरना दिया। अपर दोआब चीनी मिल ने पिछले साल मार्च से गन्ने की बकाया राशि नहीं दी है। अब, वह 2017-18 की फसल के लिए 80 करोड़ रुपये और 2018-19 की फसल के लिए 120 करोड़ रुपये की देनदार है।

  • Thumb21 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में स्थित बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन (बी.टी.पी.एस.) के 300 से ज्यादा ठेका मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर निजामुद्दीन के पास, हुमायूं के मकबरे से लेकर एन.टी.पी.सी. मुख्यालय तक रैली निकाली। यह रैली लोधी रोड और सीजीओ कांप्लेक्स से गुजरते हुये स्कोप बिल्डिंग स्थित एन.टी.पी.सी. मुख्यालय पर पहुंची, जहां रैली प्रदर्शन में बदल गयी। यह कार्यक्रम बदरपुर एन.टी.पी.सी. के कांट्रेक्ट कामगारके बैनर तले किया गया था।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 10 जनवरी, 2019

    इस 26 जनवरी को हिन्दोस्तानी गणराज्य 69 वर्ष का हो जायेगा। आज हम सभी को बड़ी गंभीरता के साथ यह सोचना होगा कि यह गणराज्य जो-जो दावे करता है और वास्तव में जो है, इन दोनों के बीच में इतना ज्यादा अंतर क्यों है। आज हमें यह चर्चा करनी होगी कि इस देश को मालिक बनने की हमारे लोगों की आकांक्षा पूरी करने के लिये क्या करना होगा।

    अंग्रेजी भाषा के आक्सफोर्ड शब्दकोश में गणराज्य की यह परिभाषा दी गई है :

  • Thumbnail8-9 जनवरी को मज़दूर वर्ग ने अपनी लंबे समय से उठाई जा रही मांगों को लेकर दो दिवसीय सफल हड़ताल की। इस हड़ताल का आह्वान 28 सितम्बर, 2018 को नई दिल्ली में आयोजित ट्रेड यूनियनों के संयुक्त अधिवेशन ने किया था। इस अधिवेशन में देशभर की विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मज़दूर संगठनों व फेडरेशनों के हजार से अधिक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    इस हड़ताल को एटक, सी.आई.टी.यू., हिन्द मज़दूर सभा, ए.आई.यू.टी.यू.सी., यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., इंटक, सेवा, एल.पी.एफ. और मज़दूर एकता कमेटी सहित देशभर की तमाम यूनियनों और फेडरेशनों ने अगुवाई दी।

  • हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने पिछले पांच वर्षों से चली आ रही भाजपा की एक के बाद दूसरी जीत का सिलसिला रोक दिया है।

    मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पडा, जहां पर वह पिछले 15 वर्षों से सत्ता में थी। पांच साल बाद उसको राजस्थान में भी हार का सामना करना पड़ा। इन तीनों राज्यों में भाजपा की जगह कांग्रेस पार्टी सत्ता में आ गयी है। मिज़ोरम में कांग्रेस की जगह मिज़ो नेशनल फ्रंट सत्ता में आयी है। केवल तेलंगाना राज्य में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति खुद को सत्ता में बरकरार रख पाई है।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 38वीं सालगिरह के अवसर पर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का भाषण

    साथियों, हम अपनी पार्टी की 38वीं सालगिरह ऐसे समय पर मना रहे हैं जब सभी देशों के लोग बहुत ही गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। रोज़गार की असुरक्षा असहनीय होती जा रही है। सारी दुनिया में अराजकता और हिंसा बढ़ती जा रही है। नस्लवाद, साम्प्रदायिकता, खास जातियों और समुदायों, राष्ट्रों और राष्ट्रीयताओं का दमन - ये सब दिन-ब-दिन, बद से बदतर होते जा रहे हैं। सभी पूंजीवादी देशों में, और हमारे देश में भी, हुक्मरान तरह-तरह के झूठे प्रचार फैला कर यह छिपाने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों की समस्याओं का उनके पास कोई समाधान नहीं है। वे इस बात पर आपस में कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ रहे हैं कि कौन लोगों को सबसे ज्यादा लूटेगा। अलग-अलग साम्राज्यवादी ताक़तें आपस में स्पर्धा कर रही हैं, एक दूसरे के खि़लाफ़ खुले और गुप्त, आर्थिक और सैनिक जंग लड़ रही हैं।

  • क्रांतिकारी विकल्प के इर्द-गिर्द एकजुट होने का आह्वान

    38th Party Ann

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 38वीं सालगिरह, जो 25 दिसम्बर को थी, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और देश की कई अन्य जगहों पर तथा विदेश में टोरंटो और अन्य शहरों में मनाई गयी। “ग़दरियों की पुकार: इन्कलाब” पर आधारित एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति पेश की गयी, जिसके बाद पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का भाषण उनकी ओर से पढ़ा गया।

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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