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  • thumbnailभारत में एक के बाद एक सभी सरकारों ने बड़े ही शातिर और छुप्पे तरीकेसे भारतीय रेल के निजीकरण को आगे बढ़ाया है। हमारे देश की रेल सेवा के निजीकरण को जायज़ ठहराते हुए हमेशा ब्रिटिश रेल का उदहारण सामने रखा जाता है। बिबेक देब्राय समिति ने सिफारिश की कि भारतीय रेलवे को ब्रिटेन के निजीकरण मॉडल का पालन करना चाहिए। यह कहा गया कि, " ब्रिटेन से हमें जो सबक मिलते है वो यह हैं की बुनियादी ढांचा और रेल ट्रैक पर सार्वजनिक एकाधिकार होना चाहिए, जबकि यात्रियों के लिए चलने वाले रोलिंग स्टॉक ऑपरेशन और माल गाड़ियों जैसे क्षेत्रों को निजीकरण के लिए खोलना चाहिए।" इस समिति ने बड़ी आसानी से यह सत्य छुपाए रखा कि ब्रिटिश रेल के निजीकरण ने अपने यात्रियों को किए वादे पुरे नहीं किए हैं। और अब यात्रियों तथा मज़दूरों के दबाव के कारण उन्हें कई मार्गों का पुनः राष्ट्रीयकरण करने पर मजबूर होना पड़ा है।

  • thumbnailअखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक यूनियन (ए.आई.जी.डी.एस.यू.) के बैनर तले 22 मई, 2018 से शुरू हुई अनिश्चितकालीन सर्व हिन्द हड़ताल के 15वें दिन सरकार ने 6 जून को वेतन बढ़ाने की इनकी मांग को मान लिया है। विदित रहे कि ग्रामीण डाक सेवक अपनी मांगों को लेकर पिछले कई वर्षाें से संघर्ष करते आ रहे हैं। सरकार लगातार इनकी मांगों को नज़रंदाज़ करती आ रही है। जबकि भारतीय डाक के लिये ये ग्रामीण डाक सेवक बहुत की महत्वपूर्ण हिस्सा हैं ये छोटे गांवों, दूर-दराज के इलाकों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पैदल चलकर हमारी डाक को पहुंचाते हैं। सरकार अपनी निजीकरण के योजना के चलते इन ग्रामीण डाक सेवकों को नज़र अंदाज़ कर रही है।

  • thumbnail2 जून, 2018 की शाम को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित, एटक भवन में दिल्ली राज्य की ट्रेड यूनियनों का संयुक्त अधिवेशन हुआ। अधिवेशन में ट्रेड यूनियनों के 140 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, दिल्ली नगर निगम आदि से जुड़ी यूनियनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अधिवेषन का माहौल उत्साहजनक था। अधिवेशन की अध्यक्षता अनुराग सक्सेना, राजा राम, संतोष राय, ऋषिपाल, राकेश कुमार, मोहन कुमार और का. बिरजू नायक ने की।

  • thumbnail30 मई, 2018 को हजारों की संख्या में बैंक कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर संसद मार्ग स्थित भारतीय स्टेट बैंक मुख्यालय के बाहर एक जोरदार प्रदर्शन करके धरना दिया। इस तरह का नज़ारा, पूरे देश के बैंक मुख्यालयों और ब्रांचों के सामने देखने को मिला है।
    गौरतलब रहे कि, देशभर के 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी, अपने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर, 30-31 को दो दिन की हड़ताल पर हैं।

  • 1 से 10 जून, 2018 को पूरे देश के किसान लंबे समय से उठाई गई अपनी मांगों के लिये विरोध प्रदर्शन करेंगे। इन मांगों में शामिल हैं - सभी कृषि उत्पादों की लाभकारी कीमतों पर सार्वजनिक खरीद तथा बिना किसी शर्त कृषि के लिये कर्ज़ों की माफ़ी। साथ ही, अलग-अलग राज्यों के किसान - बिजली के बिलों की माफ़ी, फसल बीमा से संबधित समस्याओं, जनजातियों व वनवासियों के भूमि अधिकारों, किसानों के लिये पेंशन सहित अपनी-अपनी खास मांगों को उठायेंगे।

  • thumbnailहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 22 मई, 2018 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन शहर में पुलिस द्वारा लोगों पर किये गए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करती है। इस हमले में कम से कम 13 बेगुनाह लोगों की मौत हुई है। गोलियों से गंभीर रूप से घायल 65 से अधिक लोगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ख़बरों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल होने वाली स्नाइपर बंदूकों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा करते हुए, न तो किसी नियम का पालन किया गया और न ही किसी कानून का। अधिकतर लोगों को कमर से ऊपर के हिस्से में गोली मारी गयी है। इससे यह साफ है कि गोली चलाने का मकसद जान लेना या गंभीर रूप से घायल करना था।

  • 14 मई को अमरीकी और इज़राइली सरकार के प्रतिनिधि जब येरुशलम में नए अमरीकी दूतावास का उद्घाटन कर रहे थे, उस वक्त वहां से केवल 100 किलोमीटर दूर गाज़ा में इज़राइली सेना इज़राइल-गाज़ा सीमा पर इकट्ठा हजारों फिलिस्तीनी लागों पर गोलियों से बर्बर हमला कर रही थी, ये लोग येरुशलम में नए अमरीकी दूतावास का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इज़राइली सेना ने प्रदर्शनकारियों पर सुनियोजित तरीके से जान लेने के इरादे से गोलियां चलायीं, ताकि फिलिस्तीनी लोगों का अधिक से अधिक नुकसान हो। इस हमले में 60 से अधिक लोगों की जानें गयी हैं और 3000 से अधिक लोग जख़्मी हुए हैं। रबड़ की गोलियों से बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे घायल हुए हैं और आंसू गैस से दम घुटने की वजह से कई बच्चों की जानें गयी हैं। इज़राइली सेना ने जख़्मी लोगों का उपचार कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को खास तौर से निशाना बनाया। ख़बरों के मुताबिक, इन हमलों में मारे गए लोगों के जनाज़ों में सैकड़ों लोगों के हिस्सा लिया।

  • 8 मई को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ किये गये परमाणु समझौते से अलग होने की एकपक्षीय घोषणा की। आधिकारिक तौर पर इस परमाणु समझौते को जॉइंट काम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (जे.सी.पी.ओ.ए.) कहा जाता है। जुलाई 2015 में अमरीका ने ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, यूरोपीय संघ, रूस और जर्मनी के साथ मिलकर जे.सी.पी.ओ.ए. का समझौता ईरान के साथ किया था। समझौते के मुताबिक, ईरान को अपने परमाणु हथियारों के विकास के कार्यक्रम को सीमित करना होगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को आई.ए.ई.ए. द्वारा गहन निगरानी के लिए तैयार रखना होगा। समझौते की वचनबद्धताओं का पालन करने के बदले में, ईरान को अमरीका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिलेगी।

  • सभी यह देख सकते हैं कि कर्नाटक के चुनाव में लोगों की भूमिका मतदान के दिन 12 मई को शुरू होकर उसी दिन ख़त्म भी हो गई। एक बार मतगणना हो गयी और किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, इसके बाद, सब कुछ राज्यपाल के निर्णय पर निर्भर था। कर्नाटक का भविष्य इस पर निर्भर था कि राज्यपाल क्या करता है - बहुमत साबित करने के लिये वह किस पार्टी को मौका देता है और इसके लिये कितना समय तय करता है।

  • पूंजीपति वर्ग और उसके प्रवक्ताओं ने “इज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” (व्यापार को सुगम बनाने) के मकसद से श्रम की हालतों से संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव करने का कार्यक्रम लागू करने का फैसला लिया है। जो भी सरकार केंद्र या राज्य स्तर पर सत्ता में आती है उसके काम का इस आधार पर मूल्यांकन किया जा रहा है कि वह किस हद तक हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीवादी कंपनियों के लिए अधिकतम मुनाफे़ बनाने के लिए माहौल तैयार करती है। श्रम कानूनों में पूंजीपति-परस्त और मज़दूर-विरोधी प्रत्येक बदलाव के साथ विश्व बैंक द्वारा बनाये गए “इज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” सूचकांक में बढ़ोतरी होती है।

  • thumbnailदिल्ली में 13 मई, 2018 को भारतीय रेल के निजीकरण के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के सदस्यों और समर्थकों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, “भारतीय रेल के निजीकरण को हराने के लिए एकजुट हों”, इस विषय पर एक लेख प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के बाद चर्चा हुई जिसमें सदस्यों और समर्थकों ने भाग लिया। उस चर्चा में पेश की गई प्रस्तुति पर सभी ने अपने विचार व्यक्त किए और रेलवे से संबंधित अपने अनुभव भी सामने रखे। चर्चाओं का सारांश यहां प्रस्तुत किया गया है।

  • देश के सबसे बड़े बैंकों की गैर- निष्पादित संपत्ति (एन.पी.ए.) यानी न चुकाये गये कर्ज़ों का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये के आगे बढ़ जाने के संदर्भ में पूंजीपति वर्ग के तमाम प्रवक्ताओं ने ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया है कि बैंकों के इस संकट का एकमात्र उपाय निजीकरण ही है। लेकिन पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने इस धोखे का पर्दाफाश कर दिया है।

    एक्सिस बैंक जिसने जनवरी-मार्च 2017 की तिमाही में 1225 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा दिखाया था, उसने 2018 की इसी तिमाही में 2188 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। इससे उस झूठ का पर्दाफाश हो गया है कि निजी बैंक हमेशा मुनाफ़े ही बनाते हैं।

  • thumbnail12 मई, 2018 को दसों-हजारों मज़दूरों ने सेंट्रल लंदन में एक जुलूस निकला तथा मज़दूरों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए एक नयी और बेहतर व्यवस्था की मांग की। यह जुलूस ट्रेड यूनियन कांग्रेस के झंडे तले आयोजित किया गया, जो कि इंग्लैंड और वेल्स की ट्रेड यूनियनों का फेडरेशन है और इसमें सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

  • संपादक महोदय, पिछले अंक में मई दिवस की रिपोर्ट को पढ़कर मैं भी टोरोंटो में आयोजित मई दिवस के कार्यक्रम की एक छोटी से रिपोर्ट देना चाहता हूं।

    ग़दर हेरिटेज ऑर्गेनाईजेशन और हेल्पिंग हैंड्स, टोरंटो ने मई दिवस मनाया और एक बहुत ही क्रांतिकारी माहौल में बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में 60 से भी अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। 

    हरदीप ने सभी का स्वागत करते हुए, महिलाओं और नौजवानों को आह्वान दिया कि वे आगे बढ़कर सामाजिक कार्यों में हिस्सा लें।

  • thumbnailएयर इंडिया के निजीकरण के विरोध में, 12 मई को एयर इंडिया की यूनियनों के संयुक्त मंच ने सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण के लिये किये जा रहे प्रयासों के ख़िलाफ़ चेन्नई में एक सम्मेलन आयोजित किया। एयर इंडिया के मज़दूरों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट समेत विभिन्न यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

  • thumbnail10 मई, 2018 को राजस्थान, जिला हनुमानगढ़ के नोहर में, पंचायत समिति कार्यालय के सामने चल रहे मनरेगा संविदा कर्मियों के आंदोलन के समर्थन में, विभिन्न संगठनों ने धरना स्थल से लेकर उपखंड कार्यालय तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ के बुलावे के पर किया गया। इस तरह के धरने पूरे प्रदेश में पंचायत समिति कार्यालयों पर किये गये।

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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