नवीनतम - गतिविधियाँ, विश्लेषण, प्रसार, चर्चा ....

  • बड़े सरमायदार और उनका राज्य लोगों की एकता और भाईचारे को बर्बाद कर रहे हैं

    26 वर्ष पहले, 6 दिसम्बर, 1992 को दिन-दहाड़े टीवी कैमरों के सामने बाबरी मस्जिद को गिराया गया था और उस नज़ारे को टीवी के ज़रिये पूरी दुनिया में प्रसारित किया गया था। भाजपा के सर्वोच्च नेताओं के उकसावे पर, एक हथियारबंद भीड़ ने उस घिनौनी कार्यवाही को अंजाम दिया था। केंद्र में नरसिंह राव की कांग्रेस पार्टी नीत सरकार और राज्य में भाजपा नीत सरकार की आंखों के सामने, पांच सदी से अधिक पुराने उस ऐतिहासिक स्मारक को गिराया गया था। केंद्र और राज्य के सुरक्षा बलों ने उस घिनौनी कार्यवाही को अंजाम देने वाली हथियारबंद भीड़ को सुरक्षा प्रदान की। वह राजकीय आतंक का कांड था।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का बयान, 19 नवंबर, 2018

    18 नवंबर को जब निरंकारी पंथ के सैकड़ों भक्त अमृतसर जिले के अदलीवाल गांव में प्रार्थना कर रहे थे, तब दो आतंकवादियों ने बलपूर्वक प्रार्थनगृह में प्रवेश करके उन पर बम फेंका। तीन लोग मारे गये और बीस से ज्यादा पुरुष, महिलायें व बच्चे घायल हुये।

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की निन्दा करती है। अपने धर्म के रिवाज़ों का पालन करने वाली शांतिपूर्ण धार्मिक सभा पर इस प्रकार का हमला किसी भी बहाने से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। कोई भी राजनीतिक ताक़त जो लोगों को दमन से मुक्ति दिलाने के लिये संघर्ष करने का दावा करती है, वह ऐसा अपराध नहीं कर सकती, न ही इसका समर्थन कर सकती है।

  • छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिज़ोरम, राजस्थान और तेलंगाना की राज्य विधान सभाओं के चुनाव 12 नवम्बर और 7 दिसंबर, 2018 के बीच होने जा रहे हैं।

    ये चुनाव ऐसे समय पर हो रहे हैं जब सत्ता पर बैठी ताक़तों के बड़े-बड़े वादों और जनसमुदाय के जीवन की असली हालातों के बीच की खाई दिन-ब-दिन और चैड़ी होती जा रही है।

    मज़दूर यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त विरोध प्रदर्शन और आन्दोलन ज़ोर पकड़ रहे हैं।

    मज़दूर निजीकरण और श्रम कानूनों में पूंजीवाद-परस्त सुधारों का विरोध कर रहे हैं और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। किसान सिंचाई के अभाव, लागत की बढ़ती महंगाई और उत्पादों को सस्ते-से-सस्ते दाम पर बेचने की मजबूरी तथा इन कारणों से असहनीय कर्ज़ों के बोझ के खि़लाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। आदिवासी-जन बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण के खि़लाफ़, बड़ी-बड़ी पूंजीवादी कंपनियों द्वारा अपनी प्राकृतिक सम्पदा की लूट तथा निजी मुनाफ़ाखोरों की सांठ-गांठ में सरकारी अफ़सरों द्वारा लूट के खि़लाफ़ संघर्ष कर रहे हैं।

  • 1984 के जनसंहार को हम नहीं भूलेंगे!

    गुनहगारों को सज़ा देने का संघर्ष जारी रहेगा!

    LRS protest -1501 नवम्बर को 1984 के जनसंहार की 34वीं बरसी के दिन, सिख फोरम ने कांस्टीट्यूशन क्लब में एक पैनल चर्चा का आयोजन किया, जिसमें बहुत से लोगों ने भाग लिया। पैनल में पंजाब विधानसभा के सदस्य, श्री एच.एस. फूल्का; पूर्व राजदूत, श्री के.सी. सिंह; मानव अधिकार कार्यकर्ता श्रीमती उमा चक्रवर्ती, जाॅन दयाल व उर्वशी बूतालिया तथा पत्रकार हरतोश सिंह बाल शामिल थे।

  • leninredsquareनवंबर 1917 की महान अक्तूबर क्रांति, मानवता के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण जीतों में से एक है। इसने सबसे बर्बर और पिछड़े शासन को उखाड़ फेंका और जो तब तक के सबसे उत्पीड़ित और शोषित वर्गों, मज़दूरों और किसानों को सत्ता में लाई। इसने इतिहास के सबसे ख़तरनाक युद्धों में से एक - पहले विश्व युद्ध को समाप्त किया और रूस की श्रमजीवी जनता को शांति प्रदान की।

  • एक फ्रांसीसी कंपनी से राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने के हिन्दोस्तानी राज्य के फैसले में उच्चतम स्तर पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाये जा रहे हैं, उनसे एक बार फिर वह गलाकाट स्पर्धा और बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी सामने आ रही है, जो वर्तमान वैश्विक हथियार बाज़ार की विशेषता बन गई है।

    वैश्विक हथियारों के व्यापार के हर क्षेत्र में विशाल इजारेदार निगमों का प्रभुत्व है। लड़ाकू विमानों के बाज़ार में हथियारों के 6 प्रमुख निर्माताओं का प्रभुत्व है, जिनके नाम हैं: बोइंग (अमरीका), लॉकहीड मार्टिन (अमरीका), डेसॉल्ट एविएशन (फ्रांस), यूरोफाइटर (जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और स्पेन), साब (स्वीडन) और यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (रूस)।

  • Hindi_demonetisation - 100दो साल पहले, 8 नवंबर, 2016 की रात को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश को संबोधित करते हुये यह घोषित किया था कि सभी 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट अवैध हो गये हैं। प्रधानमंत्री ने यह चेतावनी दी कि इस क़दम की वजह से लोगों को “थोड़े दिन के लिये” दर्द होगा। परन्तु उन्होंने वादा किया था कि लोगों को आगे, “लंबे समय तक” फ़ायदा होगा।

    प्रधानमंत्री ने यह दावा किया था कि नोटबंदी की वजह से छुपा हुआ कालाधन बाहर निकल आयेगा, भ्रष्टाचार और आतंकवाद ख़त्म हो जायेंगे और अमर-ग़रीब के बीच धन की असमानता बहुत कम हो जायेगी। दूसरे शब्दों में, उनका यह कहना था कि नोटबंदी से जनसमुदाय को बहुत लाभ होने वाला है।

  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बी.एस.ई.) का बेंचमार्क सूचकांक, जो सेन्सेक्स के नाम से जाना जाता है और जो फरवरी 2014 में 20,000 से अगस्त 2018 में 39,000 तक चढ़ गया था, वह 21 सितम्बर, 2018 के एक दिन के अंदर लगभग 1,500 प्वाइंट गिर गया। 4 अक्तूबर को उसमें 800 प्वाइंट की और गिरावट हुई। सेन्सेक्स उन सबसे बड़ी 30 पूंजीवादी कंपनियों के स्टाॅक के औसतन दाम का मापदंड है, जिनका बाज़ार में सबसे ज्यादा व्यापार होता है।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 20 अक्तूबर, 2018

    बीते चार हफ्तों से हम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का शिकार बनी बीसियों महिलाओं के दुःख-दर्दों के बारे में पढ़ रहे हैं व सुन रहे हैं। तमाम कार्यक्षेत्रों, मीडिया व पत्रकारिता, मनोरंजन उद्योग, कला व संस्कृति, शिक्षा, राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों, निजी कंपनियों, आदि से अनेक महिलायें इनमें शामिल हैं। वे बड़ी बहादुरी के साथ आगे आकर, अपनी-अपनी आपबीती के भयानक अनुभवों का विवरण दे रही हैं, कि किस तरह आधिकारिक पदों पर बैठे पुरुष महिला कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न करना अपना “हक़” मानते हैं।

  • कश्मीर में हिन्दोस्तानी राज्य के बर्बर आतंक का राज अनवरत जारी है।
    एक तरफ, पुलिस, सेना व अर्धसैनिक बल बेकसूर लोगों, महिलाओं व बच्चों पर गोली चलाते जा रहे हैं, बेधड़क बलात्कार और लूट-पाट करते जा रहे हैं। बेकसूर लोगों को “भयानक आतंकवादी” करार दिया जाता है, फ़र्ज़ी मुठभेड़ों में मार डाला जाता है, “तलाशी” लेने के बहाने घरों को लूटा और तहस-नहस कर दिया जाता है, नौजवान “लापता” होते रहते हैं या हिरासत में उनकी “मौत हो जाती है”। “पथराव करने वालों का मुकाबला करने” के नाम पर सैकड़ों लोगों को पेलेट बुलेट से अंधा बना देना, निहत्थे नौजवानों को सेना की गाड़ी पर बांध कर “मानव ढाल” की तरह इस्तेमाल करना - इन सारे क़दमों को सेनाध्यक्ष और केंद्र सरकार के प्रवक्ताओं ने जायज़ ठहराया है। सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (आफ्सपा) के चलते, कश्मीर में सेना को शक के आधार पर गोली चलाने, बलात्कार और अत्याचार करने की निरंकुश ताक़तें दी गयी हैं, और उसे किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही से बचाव मिलता है। जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 नामक काले कानून के तहत, नाबालिग बच्चों समेत सैकड़ों लोगों को किसी भी सबूत के बिना सालों-सालों तक जेल में बंद कर दिया जाता है और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।

  • लोक राज संगठन द्वारा आयोजित राजनीतिक मंच
    MTG on Anarchy30 सितम्बर, 2018 को लोक राज संगठन ने “बढ़ती अराजकता और नफ़रत भरे अपराधों का स्रोत” इस विषय पर दिल्ली में एक राजनीतिक मंच का आयोजन किया। इस राजनीतिक मंच में कई राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार पेश किये। इनमें गांधीयन इनिशिएटिव फॉर सोशल ट्रांसफॉर्मेशन के राजराजन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक के जी. देवराजन, यू.टी.यू.सी. के आर.एस. डागर, एटक से धीरेन्द्र शर्मा, एस.डी.पी.आई. के राष्ट्रीय सचिव अब्दुल वारिस, एस.डी.पी.आई. के राज्य संयोजक निजामुद्दीन खान, आई.एफ.टी.यू. सर्वहारा के कृष्ण कान्त, प्रवासी सेना के अध्यक्ष मनोज राय, कॉन्कोर कंटेनर एम्प्लाईज़ यूनियन के अध्यक्ष विनय चौधरी, लोक राज संगठन की दिल्ली परिषद के सचिव बिरजू नायक तथा कई नौजवान और मज़दूर वक्ता शामिल थे।
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितम्बर को झारखण्ड से आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना का उद्घाटन किया। सरकारी प्रचार माध्यम के अनुसार, आयुष्मान भारत दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का पहला सत्र 2018-2020 में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत मुख्य पहलकदमियां हैं देश के कोने-कोने में हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर की स्थापना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का नाम दिया गया है। सम्पूर्ण आयुष्मान भारत योजना को लागू करने वाली सरकारी निकाय नेशनल हेल्थ एजेंसी (एन.एच.ए.) होगी।

  • सितम्बर 2018 में अमरीकी सरकार ने अपने देश में आयात की जाने वाली कई वस्तुओं पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया। जिसका निशाना ख़ास तौर पर चीन से 200 अरब अमरीकी डॉलर के मूल्य की आयात की जाने वाली वस्तुओं को बनाया जा रहा है, जिनमें बड़े पैमाने पर उपभोग की वस्तुएं शामिल हैं। अमरीका की ओर से यह सबसे नया और सबसे बड़ा ऐसा क़दम है जो कि भू-राजनीतिक जंग में उठाया जा रहा है और व्यापार नीति का इस्तेमाल एक और हथियार बतौर किया जा रहा है। अमरीका द्वारा शुल्कों को बढ़ाने के पलटवार में चीन ने अपने देश में बिकने वाली 60 अरब अमरीकी डॉलर की अमरीकी वस्तुओं और सेवाओं पर 24 सितम्बर, 2018 से नये शुल्कों की घोषणा की है।

  • Police attack on Farmerभारतीय किसान यूनियन (बी.के.यू.) के झंडे तले संगठित होकर, 2 अक्तूबर को हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पहुंचे। 23 सितंबर को हरिद्वार से इन किसानों ने किसान क्रांति यात्रा शुरू की थी जिसका समापन उन्होंने दिल्ली में किया। आंदोलन करने वाले किसानों ने किसान घाट तक प्रदर्शन करने और अपनी मांगों को उजागर करने के लिए किसान घाट में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित करने की अपनी योजना की घोषणा की थी। उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ बातचीत करने का प्रयास भी किया, ताकि वे अपनी दीर्घकालिक मांगों को पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव डाल सकें और अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन दे सकें।

  • All India worker convention28 सितम्बर, 2018 को ट्रेड यूनियनों, अन्य मज़दूर संगठनों और फेडरेशनों की अगुवाई में, नई दिल्ली के मावलंकर हाल में मज़दूरों का सर्व हिन्द सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों - रक्षा, बैंक, बीमा, रेलवे, सड़क परिवहन, जल परिवहन, पोर्ट एंड डॉक, तेल, ऊर्जा, टेलीकाम, खनन, स्टील, कोयला, जल परिवहन, बंदरगाह, भारी इंजीनियरिंग आदि - से जुड़ी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने उत्साह से हिस्सा लिया। इसके अलावा सम्मेलन में आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स तथा घरेलू कामगारों की यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

  • देश के मज़दूर बार-बार यह मांग करते आ रहे हैं कि हिन्दोस्तानी राज्य को सभी मज़दूरों के लिए जीने लायक वेतन सुनिश्चित करना चाहिए। मज़दूर एक ऐसे वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं जिससे वे अपने परिवार सहित सम्मान का जीवन जी सकें। मज़दूर सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा व पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ताकि नौकरी छूट जाने पर, बीमार पड़ने पर, विकलांग होने पर या वृद्धावस्था में उन्हें कुछ सुरक्षा मिले।

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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