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  • लोकतंत्र के दिखावे के पीछे सबसे बड़े इज़ारेदार पूंजीपतियों की बर्बर तानाशाही है!

  • अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे किसानों पर,मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे बर्बर आतंक की हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी भारी गुस्से से घोर निंदा करती है। मंदसौर में 6 जून को पुलिस और अर्ध-सैनिक बलों द्वारा आंदोलनकारी किसानों पर किये गए गोलीकांड में कम से कम 6 किसानों की मौत हो गयी और घायल हुए दर्ज़नों किसान मौत से लड़ रहे हैं।

  • 1857 के ग़दर ने बर्तानवी उपनिवेशवादी साम्राज्य को जड़ से हिला दिया। ग़दर के लिये बारीकी से बनाई गई योजना, उपनिवेशवादी प्रशासन के खिलाफ़ लोगों की प्रचंड एकता और इसकी व्यापक भौगोलिक पहुंच ने उपनिवेशवादियों को चैंका दिया। उन्होंने यह पूर्वानुमान नहीं किया था कि उनकी प्रजा इस प्रकार शक्तिशाली तरीके से अपने शासन के खिलाफ़ विद्रोह करने की हिम्मत करेगी। 1857 के ग़दर की क्षमता बर्तानवियों से उनके बेशकीमती उपनिवेश को न केवल छीनने की थी, बल्कि उनके साम्राज्य के अन्य उपनिवेशों में ऐसे विद्रोहों को प्रेरित करने की क्षमता भी थी।

  • 1857 का विशाल ग़दर पूर्व में दमदम से लेकर पश्चिम में रायगढ़, उत्तर में पेशावर और दक्षिण में तंजावुर तक हजारों वर्ग किलोमीटर में फैला था। 

  • 1857 के ग़दर ने, लोगों को धर्म, भाषा और क्षेत्र में बांटने वाले उपनिवेशवादी शासकों को उखाड़ फेंकने के लिए एक मुट्ठी के रूप में एकजुट किया। हिन्दुओं, मुसलमानों और सिखों के धार्मिक संगठनों और व्यक्तियों ने विद्रोह के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • 1857 के ग़दर को बर्तानवी बस्तीवादी आसानी से नहीं कुचल पाए थे। उत्तरी हिन्दोस्तान पर वापस अपना कब्ज़ा करने के लिए, सेना को भेजने के साथ-साथ बर्तानवी बस्तीवादियों ने विद्रोह को कुचलने के लिए, कई कानून भी पास किये। 1857 के मई और जून के महीनों में उन्होंने कई कानून पास किये और पूरे उत्तरी हिन्दोस्तान को मार्शल लॉ के दायरे में ले आये। सेना के अधिकारियों को ही नहीं, यहां तक कि बर्तानवी नागरिकों को भी, ऐसा अधिकार दिया गया था कि वे केवल इस शक के आधार पर किसी भी हिन्दोस्तानी पर मुकदमा चला सकते थे और सज़ा दे सकते थे कि वह बग़ावत में शामिल था, इसके लिए केवल एक ही सज़ा थी - मौत!

  • 5 जून, 2017 को सात कम्युनिस्ट व वामंपथी पार्टियों की राज्य स्तरीय कमेटियों ने सहारनपुर में राज्य द्वारा आयोजित जातीय हिंसा को खत्म करने और गुनहगारों को सज़ा दिलाने की मांग को लेकर, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया।

    इस धरने में बड़ी संख्या में पार्टियों के कार्यकर्ता और छात्र शामिल हुए।

  • संपादक महोदय,

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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