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  • Defence Employees Against Corporatisation

    इस समय सरकार कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन के बहाने देश के श्रम कानूनों में पूंजीवादी संशोधन करके और मज़दूर वर्ग के अधिकारों को कुचलकर एक जबरदस्त बदलाव लागू करने की कोशिश कर रही है। इन हमलों के खि़लाफ़ अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने धरना प्रदर्शन और अन्य विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं।

  • 22 मई को देशभर में कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य मज़दूरों ने केंद्र और कुछ राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा जारी परिवर्तित क्वारंटाइन दिशा-निर्देशों के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। हमें याद होगा की स्वस्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले स्वास्थ्य मज़दूरों के लिए क्वारंटाइन नियमों में बदलाव घोषित किये थे। बदले हुए नियमों के अनुसार कर्मचारियों को केवल तब क्वारंटाइन किया जाएगा जब वे किसी ”अति ख़तरे वाले रोगी के संपर्क“ में आएंगे या अगर उन कर्मचारियों में कोविड-19 के लक्षण पाए जाएंगे।  जबकि पहले के नियमों के अनुसार, सभी कर्मचारियों को 14 दिनों की कोविड ड्यूटी के बाद 14 दिन के लिए क्वारंटाइन करने की सलाह थी।
  • Sanitation workers in Amaravati

    22 मई को आंध्र प्रदेश राजधानी राजधानी क्षेत्र अमरावती में ए.पी.सी.आर.डी.ए. (एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा अनुबंध पर रखे गए 550 स्वास्थ्य एवं सफाई मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने अपने पिछले 4 के महीने के बकाया वेतन की मांग उठाई।

  • मजदूर एकता कमेटी का आह्वान, 18 मई, 2020

    मज़दूर साथियों,

    कोरोना वैश्विक महामारी के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित आपातकालीन स्थिति का फायदा उठाकर, पूंजीपति वर्ग हमारे अधिकारों पर अप्रत्याशित हमले कर रहा है।

    आज देश में विशाल पैमाने का संकट है। देश व्यापी लॉक डाउन, जिसके दो महीने पूरे होने जा रहे हैं, की वजह से करोड़ों-करोड़ों मज़दूरों ने अपनी नौकरियां और रोजी-रोटी के स्रोत खो बैठे हैं। करोड़ों भूखे और बेरोज़गार मज़दूर, जिनके सर के ऊपर छत भी नहीं है, अब हज़ारों मीलों दूर अपने गाँवों को पहुँचने के लिए, खेतों, जंगलों, रेल की पटरियों और महामार्गों पर चल पड़े हैं। सैकड़ों पुरुष, स्त्री और बच्चे चलते-चलते, भूख, थकान या दुर्घटनाओं के कारण दम तोड़ चुके हैं।

  • 22 मई, 2020 को देशव्यापी विरोध

    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त बयान, 15 मई 2020 

    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 14 मई, 2020 को अपनी मीटिंग में देशभर में लॉक डाउन के चलते मेहनतकशों के लिए पैदा हुई विकट स्थिति का जायज़ा लिया और यह फ़ैसला किया कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट कार्यवाहियों को मजबूत किया जायेगा।

  • देशभर के मज़दूर अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर हमलों का विरोध कर रहे हैं

    12 मई को उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने, कोरोना महामारी के दौरान “खर्चे कम करने के उपायों” के तहत कर्मचारियों के सभी भत्तों को ख़त्म करने के अपने फै़सले का ऐलान किया। इस सरकारी आदेश से लगभग 16 लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे और कम से कम छः भत्तों, जिसमें शहर मुआवज़ा भत्ता, सचिवालय कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को दिए जाने वाले विशेष भत्ते, सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और जूनियर इंजिनीयर के लिए भत्ते और सार्वजनिक कार्यों के कर्मचारियों के लिए भत्ते शामिल हैं, ये सभी अगले महीने से नहीं दिए जायेंगे। खर्चे कम करने के अभियान के तहत, उप्र सरकार ने पिछले महीने ही कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी को अगले डेढ़ साल तक निलंबित करने का फ़ैसला किया था।

  • लगभग 75 साल बीत चुके हैं देश को आज़ाद हुए। जमींदारी, साहूकारी का दौर ख़0त्म हुआ और बैंकों की संख्या और धंधे में बहुत इजाफा हुआ, परन्तु उनका एकमात्र मकसद ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा बनाना था। आज़ादी के बाद भी ग़रीब मजलूमों का शोषण करने की सोच वैसी ही रही बल्कि और तेज़ हुईं; हाँ तौर तरीके ज़रूर बदल गए।
  • US_Uber_drivers_protest

    दुनियाभर में फैली महामारी ने मेहनतकश लोगों के लिए और मुश्किल हालात पैदा कर दिए हैं। पूंजीपति यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि स्वास्थ्य संकट का बोझ मज़दूरों द्वारा झेला जाये और इस तरह  उनका अपना मुनाफ़ा बरकरार रह सकता है। मज़दूर अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, एक सम्मानजनक जीवन जीने के अपने अधिकार के लिए, अपनी आजीविका के अधिकार के लिए, वर्तमान स्वास्थ्य आपातकाल की हालतों के दौरान अपने काम के स्थानों पर सुरक्षित काम करने के हालातों को सुनिश्चित करने अपने अधिकार के लिए। हम आपके लिए हाल ही के सप्ताहों में मज़दूरों के कुछ बहादुर संघर्षों की रिपोर्ट पेश कर रहे है।

  • असम, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और पंजाब सहित देश के कई राज्यों में किसानों ने हजारों लीटर दूध और हजारों किलो की तादाद में सड़ती हुई सब्जियां और फल सड़क पर फेंक दिए। यह किसानों की सदियों पुरानी मान्यता के खि़लाफ़ है जहां ऐसा माना जाता है कि “किसान अपने लिए पैदा नहीं करता और अपना पैदा किया कभी नाश नहीं करता”। लेकिन उनकी यह कार्यवाही यह दिखाती है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोविड-19 के चलते लागू लॉक डाउन के दौरान समय पर इन चीजों की खरीद आयोजित न किये जाने से किसानों का आक्रोश किस कदर बढ़ गया है।
  • अमानवीय प्रणाली और असंवेदनशील राज्य

    16 मई की सुबह, लखनऊ से 200 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में ट्रकों के टकरा जाने की वजह से उनमें यात्रा कर रहे 24 मज़दूरों की मौत हो गई तथा कई गंभीर रूप से जख़्मी हो गये। यह इन दिनों में होनेवाली दुर्घटनाओं का सबसे हाल का मामला है जिनमें घर पहुंचने की कड़ी कोशिश करने वाले मज़दूरों की जाने गयी हैं।

  • हिन्दोस्तान का मालिक बनने के संघर्ष में लोग आगे बढ़ें!

    हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

    यह नारा अपने दिलो-दिमाग में बसाये बर्तानवी बस्तीवादी सेना के मेरठ में तैनात बाग़ी हिन्दोस्तानी सिपाही 10 मई को दिल्ली पहुंचे। यह हिन्दोस्तानी उपमहाद्वीप पर अंग्रेजों की हुकूमत के ख़िलाफ़ बग़ावात का इशारा था।

  • इस समय जब दुनिया के सभी देश कोविड-19 महामारी के संकट की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, अमरीकी साम्राज्यवाद लोगों के खि़लाफ़ अपने आक्रमण को बढ़ाने और अपने प्रभुत्व को जमाने के हर मौके का फ़ायदा उठा रहा है।
  • इतिहास के सबक नहीं भुलाए जाने चाहियें

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    9 मई, 1945 को नाज़ी जर्मनी की पराजय के साथ, यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध का अंत हुआ था। उससे पहले, यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध की आखिरी व्यापक सैनिक कार्यवाही हुयी थी, जो बर्लिन युद्ध के नाम से जानी जाती है। उस सैनिक कार्यवाही के दौरान, सोवियत लाल सेना के 15 लाख से अधिक सैनिकों ने हिटलर की बची-खुची फ़ौज को पराजित किया, जर्मनी की राजधानी बर्लिन में प्रवेश किया और 2 मई को वहां के संसद राइचस्टैग पर लाल झंडा फहराया था। उसी वर्ष में, कुछ महीने बाद, 15 अगस्त को जापान के हथियार डाल देने के साथ, दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ।  

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    आन्ध्र प्रदेश के विशापट्टनम में स्थित एक रसायन कारखाने में जबरदस्त गैस रिसाव हुआ। शहर के वेंकटापुरम इलाके में स्थित एल.जी. पॉलिमर्स इंडिया के कारखाने से 7 मई, 2020 की रात 3 बजे स्टायरीन गैस का तेज़ी से रिसाव हुआ जब लोग नींद में थे। गैस लगने से प्रत्यक्ष रूप से 12 लोगों की मौत हो गयी। अनुमान लगाया गया है कि लगभग 5000 लोग गैस के प्रभाव से बीमार हुए। 500 से 800 लोगों को हस्पतालों में दाखिल करना पड़ा।

  • लॉक डाउन ने हम जैसे मज़दूरों को तुरंत बेरोज़गार कर दिया जो महाराष्ट्र के मुंबई से सटे नयी मुंबई, पनवेल और बदलापुर स्थित निर्माण कार्यों में काम करते हैं। इमारतों की खिड़कियों पर अलुमुनियम की कारीगिरी करने वाले बहुत सारे कारीगर बदलापुर और पनवेल में रहते हैं। लॉक डाउन-2 के अंतिम चरण में जब हमें एहसास हुआ कि लॉक डाउन की अवधि और बढ़ाई जाएगी तब हमें मजबूरन अपने गांव जाने का निर्णय लेना पड़ा। चूँकि यह फसलों की कटाई का वक़्त था हम मज़दूर पहले ही गांव पैसे भेज कर अपनी जेबें खली कर चुके थे। लॉक डाउन-1 फिर 2 ने हमारी कमर तोड़ दी थी, फिर भी अपने मित्रों व रिश्तेदारों से कर्जा लेकर, मोटर साइकिल लेकर हमने इतने बड़े सफर की चुनौती परिस्थितिवश स्वीकार की।
  • पूंजीवाद की जगह पर समाजवाद स्थापित करना आज वक्त की मांग है

    Karl_Marx

    “हुक्मरान वर्गों को कम्युनिस्ट क्रांति के डर से कांपने दो। श्रमजीवियों के पास अपनी जंजीरों के सिवाय और कुछ खोने का नहीं है। उनके पास जीतने के लिए सारी दुनिया है। सभी देशों के मज़दूरों, एक हो!” कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र की यह जानी-मानी ललकार 5 मई, कार्ल मार्क्स के जन्म दिवस पर पूरी दुनिया में गूंज उठी। वह उन करोड़ों-करोड़ों श्रमजीवियों के दिलों में गूंज उठी, जिनमें हुक्मरान सरमायदार वर्ग के खि़लाफ़ गुस्सा इस समय चरम सीमा पर पहुंच गया है।

पार्टी के दस्तावेज