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  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 13 अगस्त, 2019

    इस वर्ष 15 अगस्त को उपनिवेशवादी शासन से हिन्दोस्तान की स्वतंत्रता के 72 वर्ष पूरे होंगे। यह जायजा लेने का वक्त है कि बीते सात दशकों में हमने क्या हासिल किया है और क्या नहीं किया है। यह जायजा लेना अत्यावश्यक है, ताकि हम एक ऐसे हिन्दोस्तान के लिए आगे का रास्ता तय कर सकें, जिसमें सबके लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    लगभग 200 साल की उपनिवेशवादी गुलामी से मुक्त होने के बाद, आज हमारा देश उस पड़ाव पर पहुंच गया है जब हिन्दोस्तान के अंतरीक्ष वैज्ञानिकों ने चाँद पर पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की उड़ान सफलतापूर्वक की है। देश में मेडिकल पर्यटन खूब पनप रहा है और हमारे प्रशिक्षित डाक्टरों से इलाज कराने के लिए विदेशों से मरीज यहां आते हैं। हिन्दोस्तानी डाक्टर, नर्स और शिक्षक अनेक देशों की स्वास्थ्य सेवा व शिक्षा क्षेत्रों में निर्याणक भूमिका अदा कर रहे हैं। हमारे इंजिनियर और मज़दूर अनेक देशों में रेलरोड और हाईवे बना रहे हैं। हमारे सॉफ्टवेर इंजिनियरों का, अमरीका में उच्चतम प्रौद्योगिकी विकसित करने में निर्णायक कार्यभाग है। हमारे किसान 130 करोड़ की आबादी के पेट भरने के लिए, ज़रूरत से ज्यादा खाद्य उत्पादन करते हैं। और सबसे अमीर हिन्दोस्तानी आज दुनिया के सबसे अमीर लोगों में गिने जाते हैं।

  • August 2nd Meeting2 अगस्त, 2019 को भारी वर्षा के बीच, भारतीय रेल के 100 दिन के एक्शन प्लान का विरोध करने के लिए विभिन्न एसोसिएशनों से जुड़े रेल मज़दूरों ने मध्य मुंबई के एक हॉल में सभा की।

    मीटिंग का आयोजन ऑल इंडिया गाड्र्स कौंसिल (ए.आई.जी.सी.), ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.), ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (ए.आई.एस.एम.ए.), ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू.), ऑल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एसोसिएशन (ए.आई.टी.सी.ए.), इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गेनाइजेशन (आई.आर.टी.सी.एस.ओ.), रेल मज़दूर यूनियन (आर.एम.यू.), कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) तथा लोक राज संगठन (एल.आर.एस.) के संयुक्त मंच ने किया था।

    मीटिंग का आयोजन ऑल इंडिया गाड्र्स कौंसिल (ए.आई.जी.सी.), ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.), ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (ए.आई.एस.एम.ए.), ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू.), ऑल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एसोसिएशन (ए.आई.टी.सी.ए.), इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गेनाइजेशन (आई.आर.टी.सी.एस.ओ.), रेल मज़दूर यूनियन (आर.एम.यू.), कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) तथा लोक राज संगठन (एल.आर.एस.) के संयुक्त मंच ने किया था।

  • केंद्रीय बजट से दो दिन पहले, 3 जुलाई को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। यह सर्वेक्षण हर साल केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किया जाता है। इस वर्ष का सर्वेक्षण दस्तावेज़ पिछले कई वर्षों के मुकाबले काफी महत्वाकांक्षी और आडंबरपूर्ण है। भाजपा सरकार के दोबारा बड़े बहुमत के साथ चुने जाने के ठीक बाद पेश किया गया यह आर्थिक सर्वेक्षण तथाकथित तौर पर एक “सुनहरे नए भारत” की रूपरेखा पेश करने का दावा करता है।

  • यू.ए.पी.ए. संशोधन विधेयक को 24 जून को लोकसभा में पेश किया गया। अगर यह कानून बन जाता है तो सरकार को पूरा अधिकार होगा कि किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी करार दिया जाये। इसके लिये कोई औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं होगी और सरकार के दावे को जायज़ ठहराने के लिये कोई सबूत पेश करने की ज़रूरत नहीं होगी। आतंकवादी करार किये गये व्यक्ति के नाम को चैथी अनुसूची में डाल दिया जायेगा और उस अनुसूची को यू.ए.पी.ए. में जोड़ने का प्रस्ताव है। उस व्यक्ति के पास इससे निकलने के लिये एक ही कानूनी रास्ता होगा, कि वह केन्द्र सरकार को अर्जी दे कि उसके नाम को सूची से हटाया जाये। उसकी अर्जी पर एक जांच कमेटी विचार करेगी, जिसका गठन सरकार खुद ही करेगी!

  • 23 जुलाई को केन्द्रीय श्रममंत्री ने संसद में मज़दूर वर्ग से संबंधित दो विधेयकों को पेश किया। ये हैं वेतन संहिता विधेयक (कोड ऑन वेजेस बिल) 2019 और कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की हालतें संहिता विधेयक (ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड बिल) 2019। अगर ये दोनों विधेयक संसद में पास हो जाते हैं, तो वे वेतन और काम की हालतों से संबंधित मौजूदा 17 श्रम कानूनों की जगह पर लागू होंगे।

    इन विधेयकों के पेश किये जाने के खि़लाफ़, दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने 2 अगस्त, 2019 को सर्व हिन्द विरोध का आह्वान किया है।

  • 17 जुलाई, 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में ऐलान किया कि उनकी सरकार “देश की धरती के हर इंच पर बसे अवैध आप्रवासियों को ढूंढ़ निकालेगी और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार उन्हें देश से निकाल देगी”। भाजपा ने सभी राज्यों में “नेशनल रेजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स” (एन.आर.सी.) को पूरा करना अपने चुनाव कार्यक्रम का एक मुख्य मुद्दा बनाया है। इससे पूर्व, चुनाव अभियान के दौरान गृहमंत्री ने बार-बार बांग्लादेश से आये आप्रवासियों को “दीमक” जैसा बताया था।

  • anganwadi-workers 3 जुलाई को केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने वेतन संहिता विधेयक 2019 को मंजूरी देकर यह सुनिश्चित किया कि यह विधेयक अभी चल रहे संसद सत्र में पेश किया जायेगा। इस विधेयक का एक मुद्दा यह भी है कि केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन की घोषणा करेगी। सभी राज्यों को इस राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन से कम वेतन देने की इज़ाज़त नहीं होगी।

  • dutafile protest

    दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक, विश्वविद्यालय के तमाम कॉलेजों में सभी अस्थायी शिक्षकों की पुनः नियुक्ति को, 20 जुलाई, 2019 को नए शिक्षा सत्र के शुरू होने से पहले पूरा करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

    15 जुलाई को उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में और 16 जुलाई को यू.जी.सी. के मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। 

  • संसद में 2019-20 के पूर्ण और अंतिम बजट को पेश करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि उनकी सरकार एक “उज्ज्वल और स्थिर नया हिन्दोस्तान” बनाने पर वचनबद्ध है। परन्तु उनके बजट भाषण में जिन नीतिगत परिवर्तनों और कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया गया, उनका असली उद्देश्य है हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों के अधिकतम मुनाफ़ों को सुनिश्चित करना।

  • ICF Chennai Workers’ Unionकामगार एकता कमेटी, ऑल इंडिया गार्ड्स काउन्सिल, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसियेशन, ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया रेलवे सिग्नल्स और टेलीकम्युनिकेशन स्टाफ एसोसियेशन, ऑल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एसोसियेशन, ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स यूनियन, इंडियन रेलवे टिकिट चेकिंग स्टाफ ऑरगेनाईजेशन, एयर इंडिया सर्विस इंजीनियर्स एसोसियेशन, ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉईज़ एसोसियेशन, बैंक इम्प्लॉईज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया, लोक राज संगठन और ट्रेड यूनियन्स जॉइंट एक्शन कमिटी - महाराष्ट्र का सामूहिक आह्वान - 7 जुलाई, 2019

  • 23 जून, 2019 को दिल्ली में कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने एक सभा का आयोजन किया। इस सभा में देश में मौजूदा हालात और लोक सभा चुनाव अभियान के दौरान सभी साथियों के अनुभवों पर चर्चा की गयी। दिल्ली क्षेत्र में काम कर रहे साथियों ने इस सभा में हिस्सा लिया। इनमें अधिकांश नौजवान थे जिन्होंने चुनाव अभियान के दौरान काम किया था। पार्टी ने हिन्दोस्तान के नवनिर्माण के वैकल्पिक क्रांतिकारी कार्यक्रम को लोगों में ले जाने के लिये अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह ने चर्चा की शुरुआत की। सभी साथियों ने जोश के साथ हिस्सा लिया और अपने सवाल पेश किये। उन्होंने चुनाव के दौरान प्राप्त अनुभव के आधार पर सवाल और अपने विचार भी पेश किये।

  • अमरीकी विदेश सचिव माइक पोम्पेओ ने 25-27 जून को हिन्दोस्तान की यात्रा की। हाल के चुनावों में भाजपा के भारी बहुमत के साथ फिर से सत्ता में वापस आने के बाद, यह अमरीकी प्रशासन के एक सर्वोच्च नेता द्वारा हिन्दोस्तान की पहली यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान, पोम्पेओ ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित दोवल के साथ बातचीत की। सार्वजनिक तौर पर यह कहा गया कि यात्रा का उद्देश्य था हिन्दोस्तान-अमरीका संबंधों में आयी कुछ समस्याओं को हल करना और हमारे दोनों देशों के बीच रणनैतिक गठबंधन को और मजबूत करना।

  • ईरान पर अमरीका का सैनिक और आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ईरान के राज्य और लोग अपने देश के हितों की हिफाजत में, बहादुरी से इन दबावों का विरोध कर रहे हैं। अमरीका का रवैया दिन-ब-दिन और घमंडी व जंगफरोश होता जा रहा है।

    अमरीकी साम्राज्यवादी लगातार कान फोड़ने वाला प्रचार करते रहते हैं कि ईरान दक्षिण एशिया में शांति के लिए मुख्य ख़तरा है और “दुनिया में आतंकवाद का मुख्य प्रश्रयकर्ता” है। इस झूठे प्रचार के जरिये, अमरीकी साम्राज्यवादी उस इलाके में अपनी विशाल सैनिक उपस्थिति, ईरान के खिलाफ़ उनकी धमकियों और प्रतिबंधों तथा ईरान में शासन परिवर्तन करने की उनकी कोशिशों को जायज ठहराते हैं।

  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की बैठक 1-2 जून, 2019 को हुयी। परिपूर्ण सभा में 17वीं लोक सभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण किया गया और चुनावों में हमारी भागीदारी समेत, हाल के महीनों में पार्टी के काम की समीक्षा की गयी।

  • Protest in Iranईरान अमरीका की आर्थिक नाकेबंदी और सैनिक घेराबंदी का डटकर मुकाबला कर रहा है। जब अमरीका ने एकमत से ईरान के साथ परमाणु समझौते को रद्द कर दिया और फिर से ईरान पर प्रतिबन्ध लगा दिए, तो ईरान लगातार उसे दुनिया के दूसरे देशों से अलग करने की अमरीकी साम्राज्यवादियों की कोशिशों को हराने के लिए संघर्ष कर रहा है।

  • 1 मई के दिन सुबह, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ओखला फेज 2 में स्थित झुग्गी-बस्ती, संजय कालोनी की गलियों में पदयात्रा आयोजित की।

    संजय कालोनी में स्थापित कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यालय को लाल झंडों से सजाया गया था। झंडों पर “मई दिवस ज़िंदाबाद!”, “कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी जिं़दाबाद!”, जैसे नारे लिखे हुए थे। दीवारों और दरवाजे़ को लाल झंडों और फूलों से सजाया गया था। क्रांतिकारी गीतों से वातावरण में जोश भर गया - “आओ उठें मेरे देशवासियों .... जुल्म और सितम को मिल कर हम चूर कर दें ....नूतन प्रभात को मिलकर हम ले आयें ...”

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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