नवीनतम - गतिविधियाँ, विश्लेषण, प्रसार, चर्चा ....

  • Health Worker Panchkula
  • हरियाणा के स्वास्थ्य कर्मियों का छंटनी के खि़लाफ़ संघर्ष
  • मेडिकल कालेजों में फीस वृद्धि का विरोध
  • एन.एफ.एल. के मज़दूरों का विरोध प्रदर्शन
  • पंजाब में किसानों ने खेती मोटरों के बिल वसूले जाने का विरोध किया
  • रेलवे गाड्र्स का विरोध प्रदर्शन
  • मज़दूर एकता लहर के 1 जून के अंक में प्रकाशित लेख “अमरीकी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप का पुरजोर विरोध करें” के बारे में कुछ लिखना चाहता हूँ। यह लेख बहुत ही उचित, सही और समयानुसार है। लेख बखूबी बताता है कि कैसे अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अपने तंग हितों के लिए दुनिया के कई देशों को बर्बाद किया है और इसको अंजाम देने के लिए तमाम तरह के प्रयोग करता आया है जैसे कि शासन  परिवर्तन, लोकतंत्र की स्थापना, लोगों की आज़ादी के झूठे दावे देना, इत्यादि।
  • अमरीका ने एक बार फिर अपनी प्रतिक्रियावादी जंगखोर प्रकृति को प्रकट किया है

    वेनेजुएला पर आक्रमण करने और मई की शुरुआत में, वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को या तो कैद करने या उनका क़त्ल करने में असफल अमरीकी साम्राज्यवादी साज़िश के बाद, 20 मई को वेनेजुएला की संप्रभुता पर इस जबरदस्त हमले पर चर्चा करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यू.एन.एस.सी.) की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला के स्थायी प्रतिनिधि ने विधानसभा के सामने स्पष्ट तथ्य और तर्क़ रखे और यह दिखाया कि अमरीका की यह नाकाम साज़िश, यू.एन.एस.सी. के कई प्रस्तावों का अपमान थी और इस तरह की कोशिशों की दुनिया के सभी लोगों को सख़्त निदा करनी चाहिए।

  • अमरीकी दखलंदाज़ी का डटकर विरोध करें!

    27 मई को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुलेआम ऐलान किया कि "हमने दोनों हिन्दोस्तान और चीन को बता दिया है कि उनके बीच में इस समय चल रहे सीमा विवाद को लेकर, अमरीका मध्यस्तता करने को तैयार, राज़ी और सक्षम है"।  

    अमरीकी राष्ट्रपति की इन बातों से यह साफ़ पता चलता है कि हिन्दोस्तान और चीन के बीच में चल रहे सीमा विवाद का इस्तेमाल करके अमरीका इस इलाके में अपने हितों को बढ़ावा देना चाहता है। यह दोनों, हिन्दोस्तान और चीन के लिए तथा एशिया में शांति के लिए बहुत ख़तरनाक है। हिन्दोस्तान, चीन और इस इलाके के सभी देशों के लोगों को इसका डटकर विरोध करना चाहिए।

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    25 मई, 2020 को एक एफ्रो अमरीकी की हत्या के चार दिन बाद तक मिनियापोलिस और अमरीका के अन्य शहर जैसे कि न्यू यॉर्क, अल्बुकरकी, डेन्वर, शिकागो, लुइविल, लॉस एंजेलेस और ओकलैंड में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस की हिरासत में एफ्रो-अमरीकी की क्रूर हत्या से पूरे अमरीका में लोग बहुत उत्तेजित हैं। लोग केवल मरनेवाले के लिए न्याय की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि उसके साथ पुलिस की बर्बरता, जिसके लिए वे पूरे अमरीका की पुलिस कुख्यात है, उसको पूरी तरह ख़त्म करने की भी मांग कर रहे हैं।

  • अमरीकी साम्राज्यवाद के दबाव और ब्लैकमेल के प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण

    24 मई को वेनेज़ुएला के नौसैनिक जहाज के संरक्षण में ईरान का एक तेल वाहक जहाज वेनेज़ुएला के तट पर पंहुचा। इस जहाज में वेनेज़ुएला की तेल रिफाइनरी के लिए 15 लाख बैरल कच्चा तेल लाया गया था। अगले कुछ ही दिनों में इस तरह के 4 और तेल वाहक जहाज ईरान से वेनेज़ुएला को आने वाले हैं।

  • मज़दूरों के विशाल विरोध प्रदर्शनों के चलते उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने औद्योगिक इकाइयों में दैनिक कार्य के समय को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे और कार्य के सप्ताह को 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे करने का अपना आदेश वापस ले लिया है। 
  • लाखों लोग सड़कों पर उतर पड़े थे, पैसों और काम के अभाव ने उन्हें पैदल चलने के लिए विवश कर दिया था। महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश की सीमाओं पर पचासों किलोमीटर लम्बा ट्रकों का जाम लगा जिसमे सिर्फ मज़दूर और उनके परिवार भरे थे। मज़दूर परिवारों की बड़ी तादाद अभी भी बाकी थी जिन्होंने सब्र का लिबास ओढ़ रखा था, उनकी आशाएं भारतीय रेल की ओर टिकी थीं। आखिरकार भारतीय रेल का मौन टूटा परन्तु मज़दूर परिवारों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
  • KEM-hospital_nurses_protest

    के.ई.एम. अस्पताल के मज़दूरों ने 26 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया। इन मज़दूरों ने अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अपने एक साथी की मौत हो जाने खि़लाफ़ धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

  • Mughal Sarai

    26 मई को भारतीय रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (मुगल सराय) पर टिकट चेकिंग कर्मचारियों को रेल प्रशासन के खि़लाफ़ धरना देना पड़ा।

  • Belgian_nurses_turn_their_backs_on_PM

    17 मई को बेल्जियम के डॉक्टरों और नर्सों ने, स्वास्थ्य-सेवाओं में अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ को काम में लगाये जाने के, बेल्जियम सरकार के फरमान के खि़लाफ़ एक मूक लेकिन शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन किया।

    बेल्जियम की प्रधानमंत्री सुश्री सोफी विल्मेस की ब्रसेल्स में सेंट पीटर अस्पताल की यात्रा के दौरान, डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पताल के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दो पंक्तियों में खड़े होकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। और जैसे ही प्रधानमंत्री की कार अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास पहुंची, उनमें से प्रत्येक ने अपने स्थान में खड़े रहकर, उलट कर अपनी पीठ दिखाकर अपना विरोध प्रकट किया। इस मूक लेकिन बहुत ही जबरदस्त विरोध को व्यापक रूप से मीडिया में भी प्रसारित किया गया।

  • Defence Employees Against Corporatisation

    इस समय सरकार कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन के बहाने देश के श्रम कानूनों में पूंजीवादी संशोधन करके और मज़दूर वर्ग के अधिकारों को कुचलकर एक जबरदस्त बदलाव लागू करने की कोशिश कर रही है। इन हमलों के खि़लाफ़ अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने धरना प्रदर्शन और अन्य विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं।

  • 22 मई को देशभर में कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य मज़दूरों ने केंद्र और कुछ राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा जारी परिवर्तित क्वारंटाइन दिशा-निर्देशों के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। हमें याद होगा की स्वस्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को कोविड-19 के रोगियों का उपचार करने वाले स्वास्थ्य मज़दूरों के लिए क्वारंटाइन नियमों में बदलाव घोषित किये थे। बदले हुए नियमों के अनुसार कर्मचारियों को केवल तब क्वारंटाइन किया जाएगा जब वे किसी ”अति ख़तरे वाले रोगी के संपर्क“ में आएंगे या अगर उन कर्मचारियों में कोविड-19 के लक्षण पाए जाएंगे।  जबकि पहले के नियमों के अनुसार, सभी कर्मचारियों को 14 दिनों की कोविड ड्यूटी के बाद 14 दिन के लिए क्वारंटाइन करने की सलाह थी।
  • Sanitation workers in Amaravati

    22 मई को आंध्र प्रदेश राजधानी राजधानी क्षेत्र अमरावती में ए.पी.सी.आर.डी.ए. (एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा अनुबंध पर रखे गए 550 स्वास्थ्य एवं सफाई मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने अपने पिछले 4 के महीने के बकाया वेतन की मांग उठाई।

  • 15 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए सहायता के नाम पर “एक लाख पचास हजार करोड़ रुपये” के पैकेज के साथ तमाम कई नीतियों में बदलाव का ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। लेकिन इन घोषणाओं का नजदीकी से मूल्यांकन करने से यह नज़र आता है कि इससे किसानों को तुरंत राहत देने की ज़रूरत बिलकुल भी पूरी नहीं होती है। इसके ठीक विपरीत, वित्तीय पैकेज और नीतिगत बदलाव पूंजीवादी कंपनियों द्वारा किसानों की लूट के दायरे को और अधिक विस्तृत करने के मक़सद से किये जा रहे है।
  • मजदूर एकता कमेटी का आह्वान, 18 मई, 2020

    मज़दूर साथियों,

    कोरोना वैश्विक महामारी के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित आपातकालीन स्थिति का फायदा उठाकर, पूंजीपति वर्ग हमारे अधिकारों पर अप्रत्याशित हमले कर रहा है।

    आज देश में विशाल पैमाने का संकट है। देश व्यापी लॉक डाउन, जिसके दो महीने पूरे होने जा रहे हैं, की वजह से करोड़ों-करोड़ों मज़दूरों ने अपनी नौकरियां और रोजी-रोटी के स्रोत खो बैठे हैं। करोड़ों भूखे और बेरोज़गार मज़दूर, जिनके सर के ऊपर छत भी नहीं है, अब हज़ारों मीलों दूर अपने गाँवों को पहुँचने के लिए, खेतों, जंगलों, रेल की पटरियों और महामार्गों पर चल पड़े हैं। सैकड़ों पुरुष, स्त्री और बच्चे चलते-चलते, भूख, थकान या दुर्घटनाओं के कारण दम तोड़ चुके हैं।

पार्टी के दस्तावेज