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हिन्दोस्तान की आज़ादी की 71वीं सालगिरह के अवसर पर :

हिन्दोस्तान सच्चे मायने में आज़ाद तब होगा जब उसकी शासन-सत्ता लोगों के हाथ में होगी

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 1 अगस्त, 2018

हर साल, स्वतंत्रता दिवस पर सुनाये गए झूठे वादों से हमारे लोग तंग आ चुके हैं। जवाहरलाल नेहरू के “समाजवादी नमूने का समाज” से लेकर इंदिरा गाँधी का “ग़रीबी हटाओ”, मनमोहन सिंह के “मानवीय चेहरे वाला पूंजीवाद” से लेकर नरेन्द्र मोदी का “सब का विकास”, एक के बाद दूसरे प्रधानमंत्री हर 15 अगस्त को खोखले सपने बेचते रहे हैं। लोग जो सुनना चाहते हैं वही कहना पर करना वही जो टाटा, बिरला, अम्बानी और दूसरे इजारेदार पूंजीवादी घराने चाहते हैं, यही इन नेताओं का प्रशिक्षण है।

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अमृतसर में आतंकवादी हमले की निन्दा करें

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का बयान, 19 नवंबर, 2018

18 नवंबर को जब निरंकारी पंथ के सैकड़ों भक्त अमृतसर जिले के अदलीवाल गांव में प्रार्थना कर रहे थे, तब दो आतंकवादियों ने बलपूर्वक प्रार्थनगृह में प्रवेश करके उन पर बम फेंका। तीन लोग मारे गये और बीस से ज्यादा पुरुष, महिलायें व बच्चे घायल हुये।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की निन्दा करती है। अपने धर्म के रिवाज़ों का पालन करने वाली शांतिपूर्ण धार्मिक सभा पर इस प्रकार का हमला किसी भी बहाने से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। कोई भी राजनीतिक ताक़त जो लोगों को दमन से मुक्ति दिलाने के लिये संघर्ष करने का दावा करती है, वह ऐसा अपराध नहीं कर सकती, न ही इसका समर्थन कर सकती है।

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यौन अत्याचार के पीड़ितों का समर्थन करें

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 20 अक्तूबर, 2018

बीते चार हफ्तों से हम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का शिकार बनी बीसियों महिलाओं के दुःख-दर्दों के बारे में पढ़ रहे हैं व सुन रहे हैं। तमाम कार्यक्षेत्रों, मीडिया व पत्रकारिता, मनोरंजन उद्योग, कला व संस्कृति, शिक्षा, राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों, निजी कंपनियों, आदि से अनेक महिलायें इनमें शामिल हैं। वे बड़ी बहादुरी के साथ आगे आकर, अपनी-अपनी आपबीती के भयानक अनुभवों का विवरण दे रही हैं, कि किस तरह आधिकारिक पदों पर बैठे पुरुष महिला कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न करना अपना “हक़” मानते हैं।

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न की निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 29 अगस्त, 2018

28 अगस्त को एक सुनियोजित कार्यवाही के जरिये, पुणे की पुलिस ने मुंबई, दिल्ली, रांची, गोवा और हैदराबाद में एक ही समय पर, कई ऐसे व्यक्तियों के घरों पर छापा मारा, जो गरीबों और दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए काम करते आये हैं। इनमें ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता, वकील, लेखक, कवी और पादरी शामिल हैं। पांच जाने-माने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं - सुधा भारद्वाज, वरनन गोंसाल्वेस, वरावर राव, गौतम नवलखा और अरुण फरेरा - को गिरफ्तार किया गया है, इस फर्जी आरोप पर कि 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव में हुयी दलित रैली में “हिंसा भड़काने” में इनका हाथ था। इन्हें यू.ए.पी.ए. नामक काले कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। इजारेदार पूंजीपतियों के द्वारा नियंत्रित कुछ मीडिया चैनलों के जरिये, सरकार यह झूठा प्रचार कर रही है कि कुछ उच्च सरकारी नेताओं की हत्या करने की तथाकथित साज़िश के साथ इन कार्यकर्ताओं का कुछ सम्बन्ध है।

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मज़दूरों-किसानों को हिन्दोस्तान का हुक्मरान बनने के लिए संगठित होना होगा!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 12 अगस्त, 2018

हिन्दोस्तान के शहर और गांव मज़दूरों और किसानों के बढ़ते विरोध संघर्षों से गूंज रहे हैं। देश के मज़दूर-किसान संघर्ष कर रहे हैं ताकि भूमंडलीकरण, उदारीकरण और निजीकरण के समाज-विरोधी कार्यक्रम को रोका और वापस लिया जाये। वे मांग कर रहे हैं कि सभी लोगों की सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत क़दम उठाये जाएं। मज़दूरों और किसानों के खून पसीने से पैदा की गयी दौलत को हिन्दोस्तान के 150 इजारेदार पूंजीपति घराने हड़प रहे हैं। ये इजारेदार पूंजीपति घराने अधिकतम मुनाफ़ों की अपनी लालच को पूरा करने के लिए, हिन्दोस्तानी राज्य पर अपने नियंत्रण और दबदबे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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1975-1977 के राष्ट्रीय आपातकाल के सबक

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 11 जुलाई, 2018

25 जून “राष्ट्रीय आपातकाल” (एमरजेंसी) की घोषणा की 43वीं वर्षगांठ थी। तत्कालीन राष्ट्रपति फख़रुद्दीन अली अहमद ने अंदरूनी उपद्रवों से खतरे का बहाना देकर, संविधान की धारा 352 के तहत एमरजेंसी की घोषणा की थी। एमरजेंसी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हुक्मनामा जारी करके शासन करने का अधिकार दे दिया था। बोलने और एकत्रित होने की आज़ादी समेत सारी नागरिक आज़ादियां निलंबित की गयीं। मज़दूरों की हड़तालों पर रोक लगाई गयी और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया। अख़बारों पर सेंसरशिप लगाई गयी। शहरों को साफ करने के नाम पर, बड़े शहरों में झुग्गी-बस्तियों को तोड़कर हटाया गया। जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर, लाखों-लाखों मज़दूरों, किसानों और नौजवानों की बलपूर्वक नसबंदी करायी गयी। विपक्ष के राजनीतिक नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया। संसद की अवधि को बढ़ाने और चुनावों को टालने के लिए संविधान में संशोधन किया गया। एमरजेंसी 21 मार्च, 1977 तक लागू रही।

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तूतीकोरिन गोली कांड : लोगों के संघर्षों को कुचलने के लिए बल प्रयोग की कड़ी निंदा करें!

thumbnailहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 22 मई, 2018 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन शहर में पुलिस द्वारा लोगों पर किये गए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करती है। इस हमले में कम से कम 13 बेगुनाह लोगों की मौत हुई है। गोलियों से गंभीर रूप से घायल 65 से अधिक लोगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ख़बरों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल होने वाली स्नाइपर बंदूकों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा करते हुए, न तो किसी नियम का पालन किया गया और न ही किसी कानून का। अधिकतर लोगों को कमर से ऊपर के हिस्से में गोली मारी गयी है। इससे यह साफ है कि गोली चलाने का मकसद जान लेना या गंभीर रूप से घायल करना था।

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तूतीकोरिन गोली कांड: लोगों के जायज़ संघर्षों को कुचलने के लिए बर्बर बल प्रयोग की कड़ी निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 28 मई, 2018

thumbnailहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 22 मई, 2018 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन शहर में पुलिस द्वारा लोगों पर किये गए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करती है। इस हमले में कम से कम 13 बेगुनाह लोगों की मौत हुई है। गोलियों से गंभीर रूप से घायल 65 से अधिक लोगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। खबरों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल होने वाली स्नाइपर बंदूकों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा करते हुए, न तो किसी नियम का पालन किया गया और न ही किसी कानून का। अधिकतर लोगों को कमर के ऊपरी हिस्से में गोली मारी गयी है।  इससे यह साफ है कि गोली चलाने का मकसद जान लेना या गंभीर रूप से घायल करना था।

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पूंजीपतियों की लालच और सांप्रदायिक राजनीति के चलते कर्नाटक तबाह हो रहा है!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 9 मई, 2018

12 मई को कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव होंगे। इन चुनावों में सैकड़ों उम्मीदवार खड़े हो रहे हैं, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टियों के उम्मीदवार तथा जन अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों के उम्मीदवार भी शामिल हैं। परन्तु बड़े पूंजीपतियों के नियंत्रण में मीडिया इन चुनावों को सिर्फ कांग्रेस पार्टी, भाजपा और जनता दल (सेक्यूलर) के बीच मुकाबले के रूप में पेश कर रही है, जैसे कि सिर्फ इन तीनों पार्टियों पर ही कर्नाटक का भविष्य निर्भर है; किसी और की कोई अहमियत नहीं है।

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निजीकरण और उदारीकरण के जरिए भूमंडलीकरण के कार्यक्रम के खिलाफ़ संघर्ष को तेज़ करें! एक ऐसा नया हिन्दोस्तान बनाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों, जिसमें सभी की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित हो!

Hammer and sickleहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 1 मई, 2018

मई दिवस 2018 के अवसर पर, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सभी देशों के मज़दूर वर्ग और लोगों को सलाम करती है, जो अपनी रोजी-रोटी और अधिकारों पर पूंजीपति वर्ग और उसकी सरकारों के हमलों के खिलाफ़ दिलेर संघर्ष कर रहे हैं। हम उन सभी राष्ट्रों और लोगों को सलाम करते हैं जो साम्राज्यवादियों और इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों द्वारा छेड़े जा रहे अपराधी जंग, आर्थिक घेराबंदी और गुलामकारी संधियों का विरोध कर रहे हैं।

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सीरिया पर मिसाइल द्वारा बर्बर हमलों की निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 14 अप्रैल, 2018 14 अप्रैल को सुबह-सुबह अमरीका, इंग्लैंड और फ्रांस ने सीरिया पर मिसाइल हमला छेड़ दिया। यह हमला सीरिया की संप्रभुता पर शर्मनाक हमला है और सीरिया की सरकार और लोगों के खिलाफ़ एक भड़काऊ कार्यवाही है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, साम्राज्यवादियों द्वारा सीरिया और उसके लोगों पर किये गए इस आपराधिक हमले की कड़ी निंदा करती है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हमारे देश के मज़दूर वर्ग और तमाम मेहनतकश लोगों तथा सभी इंसाफ पसंद और अमन पसंद लोगों को बुलावा देती है कि वे सीरिया पर चलाये जा रहे साम्राज्यवादी युद्ध के खिलाफ़ एकजुट होकर उसका विरोध करें।

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राज्य और समाजिक व्यवस्था को बदलने में महिलाओं को अगुवाई देनी होगी! पूंजीवाद से समाजवाद का परिवर्तन ही महिला मुक्ति का मार्ग है!

Women in RJ Farmer Protestsहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 1 मार्च, 2018
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2018 के अवसर पर कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सभी देशों की संघर्षरत महिलाओं का अभिवादन करती है! यह महिलाओं और मज़दूर वर्ग की संयुक्त ताक़त को दर्शाने का अवसर है। महिला मुक्ति के लिये संघर्ष की समीक्षा करने और इस संघर्ष को आगे बढ़ाने की योजना बनाने का यह एक अवसर है।
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यह गणराज्य हमारे अधिकारों की रक्षा नहीं, बल्कि हनन करता है! यह गणराज्य सांप्रदायिक और जातिवादी बंटवारे तथा पूंजीपतियों की हुक्मशाही को बनाये रखने का साधन है!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 10 जनवरी, 2018

इस वर्ष की 26 जनवरी को हिन्दोस्तान का गणराज्य 68 वर्ष का हो जायेगा। बीते लगभग सात दशकों का अनुभव साफ दिखाता है कि यह गणराज्य समाज के सभी सदस्यों की रोज़-रोटी के अधिकार, ज़मीर के अधिकार, जीने के अधिकार और दूसरे मानवीय व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा नहीं करता है। हिन्दोस्तानी राजधर्म के अनुसार, अगर राजा अपनी प्रजा की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामयाब हो जाता है तो उसे राज करने का अधिकार खोना पड़ता है। इस असूल के आधार पर देखा जाये तो हिन्दोस्तानी गणराज्य की कोई वैधता नहीं है।

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पुणे में दलितों पर हिंसा : जाति के आधार पर अत्याचार और जातीय दंगे आयोजित करने के लिए हिन्दोस्तानी राज्य ही ज़िम्मेदार है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 10 जनवरी, 2018

3 जनवरी को महराष्ट्र में, विभिन्न दलित संगठनों द्वारा आयोजित राज्य-व्यापी बंद में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया।

1 जनवरी, 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगांव में, एक शहीद स्तम्भ पर एकत्रित दलितों पर क्रूर हमलों के विरोध में यह बंद आयोजित किया गया था। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, दलितों पर किये गए क्रूर हमलों की कड़ी निंदा करती है। इज़ारेदार पूंजीपतियों की मीडिया द्वारा सरासर झूठा प्रचार किया जा रहा है - हिंसा के शिकार लोगों को ही हिंसा के लिए ज़िम्मेदार कहा जा रहा है। दलितों के खिलाफ़ हो रहे जातीय अत्याचारों के विरोध में जो लोग अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, उनको राष्ट्रीय एकता का दुश्मन बताकर, उनके खिलाफ़ झूठा प्रचार किया जा रहा है। और जिन्होंने दलितों के ऊपर हमला किया उनको देशप्रेमी जैसे पेश किया जा रहा है। विडम्बना तो यह है कि राज्य ने देश में दलितों पर हो रहे अत्याचारों और हिंसा के खिलाफ़ नौजवान छात्रों द्वारा आयोजित मीटिंगों और रैलियों पर प्रतिबन्ध लगाये हैं। उन पर इलजाम लगाया जा रहा है कि वे जातीय दंगों को बढ़ावा दे रहे हैं।

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बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 25वीं बरसी के अवसर पर :

इस साल 6 दिसम्बर को अयोध्या में स्थित 16वीं सदी की मस्जिद के विध्वंस की 25वीं बरसी है, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है। बाबरी मस्जिद का विध्वंस सोचा-समझा और पहले से सुनियोजित काम था। देशभर से लाखों कर-सेवकों को अयोध्या में इकट्ठा किया गया था। सुरक्षा बलों को आदेश दिया गया था कि वे उस स्थान से दूर रहें। कई प्रमुख सांसदों ने वहां जाकर पूरी प्रक्रिया का पर्यवेक्षण किया और बाबरी मस्जिद को बीते दिनों में मुसलमान शासकों के हाथों हिन्दुओं की गुलामी की निशानी बताया था।
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देशभर के किसान अपनी मांगों के संघर्ष में एकजुट हुए

Kisan rallyदेशभर के किसानों का आक्रोश और गुस्सा जो कि पिछले कई महीनों से अलग-अलग संघर्षों के रूप में फूट रहा था, 20-21 नवंबर, 2017 को एक विशाल एकजुट संघर्ष के रूप में दिल्ली की सड़कों पर उतर आया।

20-21 नवंबर को देशभर के 184 किसान संगठनों ने एक साथ मिलकर दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संसद का आयोजन किया। इस किसान संसद में कम्युनिस्ट पार्टियों और अन्य पार्टियों की अगुवाई में गठित किसान संगठनों ने भी हिस्सा लिया। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल से आये किसान संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया। इस संसद में किसानों, कृषि मज़दूरों, मछुआरों, बागान मज़दूरों, इत्यादि मेहनतकश लोगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बड़े फक्र के साथ अपने हाथों में अपने संगठन के बैनर और झंडे उठाये, अपने इलाके के पारंपरिक परिधानों में सजे हजारों किसान और मेहनतकश लोग रामलीला मैदान और अंबेडकर स्टेडियम से दो कतारों में पूरे अनुशासन के साथ वे जंतर-मंतर पहुंचे। वे अपने-अपने इलाकों की भाषाओं में अपनी मांगों को बुलंद कर रहे थे।

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कर्ज़ माफ़ी और सार्वजनिक खरीदी की मांग पूरी तरह से जायज़ है! किसानों की सुरक्षा और खुशहाली सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है! यह कोई एहसान नहीं, जो करे हम पर कोई सरकार! सुरक्षित आजीविका है, हमारा बुनियादी अधिकार!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आह्वान, 20 नवंबर 2017

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बुलावे पर आज देशभर के किसान दिल्ली में इकट्ठा हुए हैं। उनकी मांगों में शामिल हैं - बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज़ों की एक बार में पूरी माफ़ी और सार्वजनिक खरीदी व्यवस्था के माध्यम से सभी फसलों की लाभकारी मूल्यों पर खरीदी की गारंटी। उनकी ये मांगें पूरी तरह से जायज़ हैं। सभी किसानों के लिए सुरक्षित आजीविका सुनिश्चित करने और देश को कृषी संकट से उबारने के लिए इन मांगों को पूरा करना बेहद ज़रूरी है।

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नए हिन्दोस्तान के निर्माण के लिए ज़रूरी है कि हम इस पुराने शोषक और दमनकारी राज्य का ख़ात्मा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 23 अगस्त, 2017

बस्तीवादी राज से हिन्दोस्तान की आज़ादी की 70वीं सालगिरह के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को बुलावा दिया कि अगले पांच साल में एक “नए हिन्दोस्तान” का निर्माण करने में लोग उनका समर्थन करें, एक ऐसा हिन्दोस्तान जहां न गरीबी होगी, न भ्रष्टाचार होगा, न साम्प्रदायिक हिंसा होगी और न ही जाति के आधार पर भेदभाव होगा।

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कोरियाई लोगों के खिलाफ़ अमरीका द्वारा जंग-भड़काऊ प्रचार और धमकी की निंदा करें!

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 18 अगस्त, 2017

अमरीकी साम्राज्यवादी, परमाणु हथियारों और पारम्परिक हथियारों से कोरियाई लोगों और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तरी कोरिया) का विनाश करने की हर रोज धमकी दिए जा रहे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोरियाई लोगों को धमकी दी है कि “वे विपत्ति और प्रकोप का ऐसा नज़ारा देखेंगे, जैसा कि दुनिया ने आज तक कभी नहीं देखा है”। उसने ऐलान किया है कि अमरीकी सेना किसी भी वक्त, इस धमकी को अंजाम देने के लिए तैयार है।

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हिन्दोस्तान की आज़ादी के 70 वर्ष :

हिन्दोस्तान के लोग तभी आज़ाद होंगे जब हम 1947 में स्थापित किये गये बड़े पूंजीपतियों के राज की जगह पर अपना राज स्थापित करेंगे

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 29 जुलाई, 2017

15 अगस्त, 1947 को बर्तानवी उपनिवेशवादी राज से हिन्दोस्तानी आज़ादी की औपचारिक घोषणा की गई थी। बर्तानवी हिन्दोस्तान को धर्म के आधार पर दो भागों में बांट दिया गया और हिन्दोस्तान व पाकिस्तान के दो आज़ाद राज्य बनाये गये। पूर्वी पाकिस्तान, जो भूगोलिक तौर पर बाकी पाकिस्तान से अलग था, 1971 में अगल हो गया और बांग्लादेश का आज़ाद राज्य बन गया।

आज, 70 वर्ष बाद, हिन्दोस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकतम लोग जीवन के लगभग सभी पहलुओं में आज़ादी से वंचित हैं।
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हिन्दोस्तान के किसानों - अपने जायज संघर्ष में आगे बढ़ो! मज़दूर वर्ग आपके साथ है!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आह्वान, 12 जुलाई, 2017 किसान भाइयों, आप हिन्दोस्तान के कोने-कोने से दिल्ली आये हैं, पूरे देश को यह घोषणा करने के लिये कि आप अन्याय के खिलाफ़ और अपने अधिकारों के लिये लड़ेंगे। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी दृढ़ता से आपके संघर्ष का समर्थन करती है।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार की 33वीं बरसी पर : धार्मिक स्थान पर राज्य के हमले का कोई औचित्य नहीं हो सकता!

एक पर हमला, सब पर हमला!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के केंद्रीय समिति का बयान, 22 मई, 2017

6 जून, 1984 को हिन्दोस्तान की सेना ने भारी टैंकों और तोपों की गोलाबारी के साथ अमृतसर में स्वर्ण मंदिर पर हमला किया। सिख धर्म के इस सबसे पवित्र मंदिर पर हथियारबंद हमले को ऑपरेशन ब्लू स्टार नाम दिया गया। यह हमला ठीक उस दिन किया गया जिस दिन सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव का शहादत दिन था। गुरु अरजन देव ने सिख समुदाय के लोगों के सम्मान की रक्षा में सदियों पहले अपनी जान कुर्बान की थी। सेना ने स्वर्ण मंदि

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हिन्दोस्तानी सैनिकों के सिर काटने की घिनौनी हरकत की निंदा करें!

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाने की अमरीकी साम्राज्यवाद की साजिशों के बारे में चौकन्ने रहें! हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 9 मई, 2017
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मज़दूर वर्ग के एकजुट विरोध को मजबूत करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान, 29 अप्रैल, 2017

मज़दूर साथियों,

अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर पूंजीपति वर्ग के हमलों का बहादुरी से मुक़ाबला करने वाले, हिन्दोस्तान और सभी देशों के मज़दूरों का हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, मई दिवस 2017 के अवसर पर क्रांतिकारी अभिवादन करती है।

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अमरीका ने अफगानिस्तान पर महाबम गिराया :

अमरीका और सभी विदेशी ताक़तें अफगानिस्तान से बाहर निकलो!

अफगानिस्तान को बड़े युद्ध के लिये परीक्षण भूमि की तरह इस्तेमाल करना बंद करो!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 16 अप्रैल, 2017

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एक पर हमला, सब पर हमला! पूंजीवादी हमलों के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग के विरोध संघर्ष का निर्माण करो और मजबूत करो!

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान, 2 अप्रैल, 2017 मजदूर साथियों, इस वर्ष मई दिवस ऐसे समय में आ रहा है जब मारुती-सुज़ुकी कंपनी के 13 मज़दूरों को आजीवन कारावास की भयंकर और नाजायज़ सज़ा सुनाई गयी है जिसके विरोध में जन-विरोध बढ़ता जा रहा है। उनका अपराध केवल इनता है कि वे अपने अधिकारों की हिफाज़त में खड़े हुए और उन्होंने एक लड़ाकू यूनियन बनाने की जुर्रत की।
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बड़े सरमायदारों के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए “जनादेश” पाने में चुनावों का इस्तेमाल

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 13 मार्च, 2017

पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा में विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किये जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा को बड़े पैमाने पर सीटें मिली हैं और मणिपुर व गोवा में वह बहुमत के लिए जुगाड़ करने में लगी हुई है। पंजाब में कांग्रेस को बहुमत मिला है। मोटे तौर पर इस चुनाव से भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। इससे राज्य सभा में उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़ाने में मदद मिलेगी और देशभर में ज्यादा राज्य सरकारें भी उसकी अगुवाई में होंगी।

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हिन्दोस्तानी गणतंत्र के 67 वर्ष के अवसर पर

नयी नींवों पर गणतंत्र का नव-निर्माण करना होगा

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 24 जनवरी, 2017

हिन्दोस्तानी गणतंत्र जो कुछ भी होने का दावा करता है, वास्तव में वह हर मामले में उसका ठीक उल्टा है।

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हिन्दोस्तानी राज्य ही सांप्रदायिक है, न कि सिर्फ़ कुछ राजनेता

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 8 जनवरी, 2017

2 जनवरी को हिन्दोस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसला सुनाया कि, कोई भी राजनेता जाति, संप्रदाय या धर्म के नाम पर वोट नहीं मांग सकता है” तथा ऐसी कार्यवाहियां संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वभाव के ख़िलाफ़ होंगी तथा भ्रष्ट चुनावी अभ्यास माने जायेंगे।”

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70वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर :

हिन्दोस्तान के लिए कौन सा रास्ता?

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 15 अगस्त, 2016

हिन्दोस्तान की सरकार ने 70वें स्वतंत्रता दिवस को बड़ी धूम-धाम से मनाने के लिए तैयारी की है। परंतु हमारी अधिकांश जनता इस बात से बहुत चिंतित है कि बर्तानवी उपनिवेशवादी शासन के खत्म होने के 69 वर्ष बाद, आज हिन्दोस्तानी समाज किस दिशा में जा रहा है।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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