कैप्टन लक्ष्मी सहगल के निधन पर शोक

मजदूर एकता लहर  22 जुलाई, 2012 को कैप्टन लक्ष्मी सहगल के निधन पर गहरा शोक प्रकट करती है। वे 97 वर्ष की उम्र की थीं।

कैप्टन लक्ष्मी सहगल का जीवन और काम उन सभी के लिए प्रोत्साहन का स्रोत है, जो उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और सभी प्रकार के शोषण और दमन से मुक्ति और आज़ादी हासिल करने के झंडे तले संघर्ष करते आये हैं।

लक्ष्मी सहगल का जन्म चेन्नई में एक जाने-माने परिवार में हुआ। चिकित्सा विज्ञान में अपनी डिग्री प्राप्त करने के बाद वे दूसरे विश्व युध्द के दौरान उच्च शिक्षा के लिए सिंगापुर गईं। वहां उपनिवेशवाद विरोधी और देशभक्ति की भावनाओं से प्रेरित होकर वे सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल हुईं और उन्होंने एक महिला बटालियन को अगुवाई दी।

बाद में, उन्होंने कानपुर को अपना निवास स्थान बनाया और मजदूर वर्ग के हित तथा महिलाओं की मुक्ति के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कानपुर के मजदूर उनका बहुत आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने न सिर्फ उनके संघर्षों का समर्थन किया बल्कि अपनी क्लिनिक में उन्हें स्वास्थ्य सेवा भी दी।

मजदूर एकता लहर उनके परिजनों को अपना हार्दिक शोक प्रकट करती है।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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