पूर्वोत्तर के लोगों की असुरक्षा के लिये केन्द्रीय सत्ताधारी जिम्मेदार

“मनुष्यों की जिन्दगी और अधिकारों की रक्षा करने की जगह आज केन्द्रीय सत्ताधारी पूर्वोत्तर के विभिन्न लोगों के बीच तंग व साम्प्रदायिक आधार पर एक आतंक और असुरक्षा का वातावरण बना रहे हैं, ” हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता कामरेड प्रकाश राव ने 27 अगस्त के दिन दिल्ली में लोक राज संगठन द्वारा पूर्वोत्तर के लोगों की असुरक्षा के लिये कौन जिम्मेदार? प्रश्न पर आयोजित जनसभा में कहा।

कामरेड प्रकाश राव ने असम के बंगाली मुसलमानों, बोडो तथा मणिपुर, नगालैंड व पूर्वोत्तर के अन्य लोगों की बुरी परिस्थिति पर ध्यान दिलाया, जिन सबकी एक ही वजह है - नयी दिल्ली का साम्राज्यवादी राज और उपनिवेशवादी नीति। समाज-विरोधी साम्राज्यवादी रास्ते के विरोध में मेहनतकश लोग हर जगह उठ रहे हैं, और इस परिस्थिति का सामना करने के लिये बड़े पूंजीपति शासक सांप्रदायिक हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद लोगों के बीच फूट डाल कर उन्हें गुमराह करना और आने वाले विधानसभाओं व लोकसभा के चुनावों के पहले, प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक पार्टियों के वोट बैंकों को बढ़ाना है।

लोक राज संगठन की तरफ से सभी सहभागियों का स्वागत करते हुये श्री बिरजू नायक ने सभी के दिमाग के प्रश्न को सामने रखा कि आज पूर्वोत्तर के लोगों पर हमले क्यों हो रहे हैं और इनसे किस को फायदा हो रहा है। उन्होंने श्रीमति सुचरिता को आमंत्रित किया कि वे लोक राज संगठन की दिल्ली इलाका परिषद की ओर से विचार-विमर्श की शुरुआत करें। सभा का आयोजन अल्प सूचना से होने के और बार-बार बारिश होने के बावजूद, हिन्दी भवन का सभागृह भरा हुआ था। सहभागियों में जमात-ए-इस्लामी हिन्द, मणिपुर स्टूडेंट एसोसियेशन ऑफ दिल्ली और पीपुल्स फ्रंट के प्रतिनिधि मौजूद थे।

श्रीमति सुचरिता ने सवाल उठाया कि इतने दिनों तक केन्द्र सरकार ने एस.एम.एस. के ज़रिये पूर्वोत्तर के लोगों को भेजी जा रही नस्ली धमकियों के स्रोत को क्यों नहीं पहचाना और अंत में घोषणा कर दी कि ये पाकिस्तान से आये हैं! अधिकारियों ने लोगों के बीच डर और चिंता के निवारण के लिये कोई कदम नहीं लिये, परन्तु खौफ भड़काने के लिये, उन्हें घर भेजने के लिये विशेष रेलगाडि़यां जरूर चलाईं। हमारे शासक “राष्ट्रीय सुरक्षा“ की बात करने से थकते नहीं हैं जबकि वे करोड़ों लोगों को न्यूनतम सुरक्षा भी नहीं देते हैं। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता जो संसद में “पूर्वोत्तर के अपने बहनों और भाईयों“ के लिये मगरमच्छ के आंसू बहाते हैं, वहीं साथ मिल कर सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (ए.एफ.एस.पी.ए.) को जारी रखने की मांग करते हैं, जिसके तहत यहां के लोगों पर दैनिक तौर पर अवर्णननीय जुल्म और अत्याचार होता है, जबकि पूर्वोत्तर के सभी लोग इस काले कानून को रद्द करने और सेना को वापस भेजने के लिये एक होकर मांग करते आये हैं। मानवता और न्यायप्रिय सभी लोगों को उन्होंने आह्वान दिया कि समाज में धर्म, जात, नस्ल, राष्ट्रीय मूल या किसी और आधार पर भेदभाव के बिना, सभी सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा के लिये अपनी आवाज़ बुलंद करें।

जमात-ए-इस्लामी हिन्द के श्री इंतजार नईम ने असम में लाखों लोगों को शरणार्थी शिवरों में अमानुषिक परिस्थिति में रहने के लिये बाध्य किये जाने पर ध्यान खींचा, जहां पर सरकार की सहायता न के बराबर है। उन्होंने मुसलमान गुटों और पाकिस्तान को पूर्वोत्तर के लोगों के बीच आतंक फैलाने के लिये जिम्मेदार ठहराने के झूठे आरोपों की निंदा की। उन्होंने घोषणा की कि यह राज्य की जिम्मेदारी है कि लोगों की, देश के हर हिस्से में रक्षा करे और लोगों के कहीं भी रहने और काम करने के अधिकार की रक्षा करे।

मणिपुर स्टूडेंट एसोसियेशन दिल्ली के जॉनसन ने लोक राज संगठन के प्रति मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थिति में एक बहुत ही समयोचित सभा आयोजित करने के लिये आभार प्रकट किया। उन्होंने सभी सहभागियों को एक साथ आकर पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति समर्थन देने के लिये धन्यवाद दिया। उन्होंने केन्द्रीय सत्ता द्वारा मणिपुरी व दूसरे पूर्वोत्तर के लोगों को हिन्दोस्तान की एकता और अखण्डता के लिये खतरनाक अन्य-देशियों के जैसे दर्शाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि विवाद पूर्वोत्तर के लोगों के बीच नहीं है बल्कि एक तरफ राज्य और दूसरी तरफ सभी लोगों के बीच है।

पीपुल्स फ्रंट के कामरेड नरेंदर ने कहा कि इस युग में, पूंजीवाद और साम्राज्यवाद ने सभी राष्ट्रीय सीमायें तोड़ दी हैं। वे चाहते हैं कि सभी लोगों व इलाकों के श्रम व संसाधनों का शोषण करने की उन्हें छूट हो। इस लूटपाट के उनके रास्ते में जो भी आता है, उस पर, एक या दूसरे बहाने, वे हमला करते हैं।

लोक राज संगठन के अध्यक्ष श्री एस. राघवन ने ध्यान दिलाया कि जिन पत्रकारों ने बोडो प्रशासित इलाके में पास-पड़ोस के मुसलमान व बोडो गांवों का दौरा किया था, उन्हें दोनों समुदायों के गांव वालों ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन पर हमला करने वाले सशस्त्र गुट, सबके सब बाहर के थे। वे पड़ोस के इलाके के नहीं थे। उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा के 1984 और 2002 के अनुभव का हवाला देते हुये बताया कि किसी एक खास धर्म या सम्प्रदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिये वोटिंग लिस्टों का इस्तेमाल किया गया था। इस बार जो एस.एम.एस. भेजे गये थे वे सिर्फ निशाना बनाये गये पूर्वोत्तर के लोगों को भेजे गये थे। इससे पता चलता है कि इसका आयोजन करने वालों के पास यह सूचना उपलब्ध थी। भाजपा के नेता अरुण जेटली का दावा, कि असम में 60प्रतिशत लोग विदेशी हैं, का खंडन करते हुये उन्होंने कहा कि बंगाली मुसलमानों को बंग्लादेशी नहीं समझा जा सकता है। 80 के दशक में राजीव गांधी ने असम समझौते पर दस्तखत किये थे जिसके अनुसार जो भी 1970 के पहले आया था उसको हिन्दोस्तानी नागरिकता दी जाने वाली थी। इसको लागू न करना दिखाता है कि हमारे शासकों का समस्या का समाधान करने का लक्ष्य नहीं है बल्कि फूट डाल कर राज करने के लिये इसे बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपने हाथों में सत्ता नहीं लेते हैं, तब तक सांप्रदायिक हिंसा का खतरा बरकरार रहेगा।

दूसरे वक्ताओं ने पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय दमन और मानव अधिकारों के हनन के लम्बे इतिहास की बात की और ए.एफ.एस.पी.ए. को तुरंत रद्द करने की मांग दोहराई।

सभा का समापन निम्नलिखित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करने के साथ हुआ:

नयी दिल्ली में 27 अगस्त, 2012 को सम्पन्न हुयी लोक राज संगठन की सभा हिन्दोस्तानी राज्य और उसकी एजेंसियों की कड़ी निंदा करती है जो देश के विभिन्न इलाकों में पूर्वोत्तर के लोगों के बीच आतंक और असुरक्षा के लिये जिम्मेदार हैं। पूर्वोत्तर के लोगों के लिये आतंक और असुरक्षा का कारण हिन्दोस्तानी राज्य की उपनिवेशवादी नीति है जिसके अनुसार इस इलाके के लोगों को “देश की एकता और अखण्डता के लिये खतरा“ माना जाता है और उनके राष्ट्रीय, लोकतांत्रिक व मानव अधिकारों को निर्दयता से कुचला जाता है।

नयी दिल्ली में 27 अगस्त, 2012 को सम्पन्न हुयी लोक राज संगठन की सभा, सभी आज़ादी और न्याय पसंद लोगों को आह्वान देती है कि राजकीय आतंक से पीडि़त सभी लोगों की रक्षा के लिये, “एक पर हमला सब पर हमला“ के नारे तले एकजुट हों और लोगों के हाथों में राजनीतिक सत्ता देने के संघर्ष को आगे ले चलें, ताकि हम अधिकांश लोगों के हित में फैसले लेने में सक्षम हों, और सभी नागरिकों के राष्ट्रीय, लोकतांत्रिक व मानव अधिकारों की गारंटी के लिये जरूरी तंत्र बना सकें।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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