दक्षिण अफ्रीका के प्लैटिनम खदान मज़दूरों की हत्या की कड़ी निंदा करें!

16 अगस्त, 2012 को, दक्षिण अफ्रीकी पुलिस बल द्वारा 34 खदान मज़दूरों की हत्या, तथा 78 मज़दूरों को घायल करने की, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी घोर निंदा करती है। इस नरसंहार के लिए जो जि़म्मेदार हैं, उन्हें सजा देने के लिए तथा अपनी उचित मांगों की पूर्ति के लिए संघर्ष में, हिन्दोस्तान के मज़दूर, दक्षिण अफ्रीका के मज़दूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

लंदन स्थित खनन इज़ारेदार कंपनी लानमिन के लिए काम करने वाले, मारिकाना नगर स्थित हज़ारों मज़दूर 10 अगस्त, 2012 से हड़ताल पर हैं।

हड़ताल की शुरुआत से ही इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने मज़दूरों के खि़लाफ़ दक्षिण अफ्रीका की पुलिस का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने रुस्तेनबर्ग के नज़दीक न्कान्गेंग के लानमिन प्लैटिनम खदान के चार मज़दूरों पर गोलियां चला कर घायल कर दिया था। 13 अगस्त को पुलिस ने तीन खदान मज़दूरों की हत्या कर दी।

16 अगस्त को खदान मज़दूरों की अपेक्षा थी कि कंपनी के प्रतिनिधियों से बातचीत होगी। ऐन वक्त पर कंपनी ने मीटिंग रद्द कर दी और कहा कि “अब मामला पुलिस के हाथों में है।” हत्याकाण्ड तब हुआ जब इस बात पर गुस्साये हुए खदान मज़दूरों की बड़ी भीड़ पर पुलिस ने गोलियां चलायीं। यही दिखता है कि हड़ताल तोड़ने के लिए, अराजकता फ़ैलाने के लिए तथा खदान मज़दूरों के खि़लाफ़ स्वचलित बंदूकधारी पुलिस बल द्वारा हिंसा करने का यह एक सोचा-समझा षडयंत्र था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिन पर गोलियां चलायी गयीं, उनमें से अनेकों के ज़ख़्म उनकी पीठ पर हैं।

हड़ताल की शुरुआत से ही पुलिस कंपनी के लिए हड़ताल तोड़ने वालों की भूमिका अदा कर रही थी। हड़ताली खदान मज़दूरों पर पुलिस ने ही गोलियां चलायी थीं, यह साबित करने वाला वीडियो होने के बावज़ूद, अधिकारियों ने 150 से ज्यादा खदान मज़दूरों को अपने मज़दूर भाइयों की हत्या करने के आरोप में गिरफ़्तार किया है! यह नरसंहार आयोजित करने वाली पुलिस के खि़लाफ़ कोई भी आरोप दजऱ् नहीं किया गया है, और न ही कंपनी के खि़लाफ़, जिसने मज़दूरों के खि़लाफ़ पुलिस का इस्तेमाल किया था।

5 सितम्बर, 2012 को जोहानस्बर्ग से पष्चिमोत्तर दिषा में, 100 कि.मी. की दूरी पर स्थित इस खदान के पास 3000 से ज्यादा हड़ताली खदान मज़दूरों ने सड़कों पर मार्च किया। 16 अगस्त के हत्याकाण्ड के बाद यह सबसे बड़ा विरोध था।

लानमिन यह एक कुख्यात बर्तानवी साम्राज्यवादी कंपनी है जिसकी स्थापना 1909 में लंदन एंड रोडेषियन मायनिंग एण्ड लैंड कंपनी के नाम से हुई थी। आज यह प्लैटिनम उत्पादन पर केंद्रित है और दुनिया में तीसरे नंबर की उत्पादक है।

प्लैटिनम एक बहुमूल्य धातु है, जिसका उपयोग मुख्य तौर पर वाहन उद्योग में केटेलिटिक कनवर्टर्स बनाने के लिए तथा इलेक्ट्रानिक और गहनों में भी होता है। आज आर्थिक संकट की वजह से इसकी मांग कम हुई है। प्लैटिनम की गिरती हुई कीमतों के बावजूद अपने मुनाफ़े की दर अधिकतम बनाने के उद्देश्य से लाॅनमिन खदान मज़दूरों को न्यूनतम से न्यूनतम वेतन दे रही है। इन मज़दूरों में से अधिकतम झुग्गी-झोपडि़यों जैसी ख़राब बस्तियों में ही रहते हैं।

लाॅनमिन अपने मज़दूरों को करीबन 4000 रेंड मासिक वेतन देती है। हज़ारों मज़दूर हड़ताल पर गये इस मांग को लेकर कि उनके वेतन जीने लायक 12,000 रेंड तक बढ़ाने चाहिए। तुलना में दक्षिण अफ्रीका की पुलिस का मासिक वेतन 15,000 से 20,000 रेंड की श्रेणी में होता है।

दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने पुलिस की करतूत की निंदा करने से इंकार किया है। इज़ारेदारी मीडिया ने तत्परता के साथ उस करतूत का समर्थन किया है। यह साफ है कि मज़दूरों का अतिषोषण करके, उनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव करके, मालिकों को और ताकतवर बनाना चाहिए।

आज दक्षिण अफ्रीका पर विदेषी, खास करके आंग्ल अमरीकी वित्त पूंजीपतियों का वर्चस्व जारी है। वे इस खनिजों से समृद्ध भूमि की खदानों के इजारेदार मालिक हैं। वे मज़दूरों का अति शोषण करते हैं तथा इस देष के प्राकृतिक संसाधनों को लूटते हैं। दक्षिण अफ्रीका के लोगों ने अंत में, नस्लवाद को उख़ाड़ कर फेंका, इस बात को 18 साल हुए हैं; आज भी वहां अमीर और अमीर बन रहे हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका की जनता की गरीबी तथा कंगाली बढ़ रही है।

दक्षिण अफ्रीका के लोगों में व्यवस्था के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है और वे अर्थव्यवस्था की नयी दिषा के लिए तरस रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका की खदानों के राष्ट्रीयकरण की मांग लोग उठा रहे हैं। इस मांग से खदान मज़दूर, खास करके नयी पीढ़ी के मज़दूर, सहमत हैं।

आज जो हड़ताल का संघर्ष जारी है, और दक्षिण अफ्रीका के पुलिस बल का इस्तेमाल करके मज़दूरों का संहार करने वाली, बर्तानवी इज़ारेदार कंपनी लाॅनमिन द्वारा बर्बर दमन का उपयोग यही दिखाता है कि उस देष में विभाजन बढ़ रहा है। एक तरफ़ हैं वे लोग जो अपने देष के समृद्ध संसाधनों का लोगों की आवष्यकताओं के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। और दूसरी तरफ़ हैं लंदन तथा न्यूयाॅर्क में स्थित जिनके मुख्यालय हैं, ऐसी इज़ारेदार कंपनियों की सेवा में लगे हुए लोग, जो उनको अधिकतम मुनाफ़े दिलाना चाहते हैं।

लानमिन द्वारा जीने लायक वेतन देना चाहिए, यह मज़दूरों की मंाग पूर्णतः न्यायसंगत है। अपनी अर्थव्यवस्था अपने लिए हो, इसलिए उसकी दिषा को नियंत्रित करने का दक्षिण अफ्रीका के लोगों का संघर्ष पूर्णतः न्यायसंगत है।

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Oct 1-15 2012    Struggle for Rights    Rights    

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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