गुड़गांव के मजदूरों ने अधिकारों के लिए महारैली की

21 सितम्बर, 2012 को संयुक्त ट्रेड यूनियन कमेटी की अगुवाई में, ईस्टर्न मेडिकेट कंपनी का ताला खुलवाने तथा मारुति-सुजुकी (मानेसर) के मजदूरों को काम पर वापस लेने की मांग को लेकर, पांच हजार से ज्यादा मजदूरों ने गुड़गांव स्थित लघु सचिवालय पर महारैली की।

इस महारैली में, मारुति-सुजुकी के पीडि़त मजदूरों के परिवारों के सदस्य, मजदूर एकता कमेटी, मारुति गुड़गांव, हरियाणा मजदूर संघ, एटक, सीटू, एआईयूटीयूसी, होंडा मानेसर, सुजुकी पावर ट्रेन, रिको (गुड़गांव तथा धारूहेड़ा), हीरो मोटर्स (गुड़गांव तथा धारूहेड़ा), सुजुकी बाइक प्लांट, सत्यम ऑटो मानेसर, सोना कोयो स्टेयरिंग सहित 42 यूनियनों ने भाग लिया।

इसके पहले, 19 अगस्त, 2012 को इन्हीं उपरोक्त मुद्दों पर गुड़गांव के गोशाला से लघु सचिवालय तक मजदूरों ने एक विशाल रैली निकाली थी।

विदित रहे कि गुड़गांव के उद्योग विहार स्थित, मेडिकल उपकरण बनाने वाली ईस्टर्न मेडिकेट कंपनी बीते 5 महीने से गैर-कानूनी तरीके से बंद पड़ी है। कंपनी का ताला खुलवाने की मांग को लेकर 1200 कर्मचारी, प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ़ अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।

महारैली को संबोधित करते हुए, ट्रेड यूनियन नेता काÛ विरेन्द्र सिंह सिरोही ने बताया कि हर ऐसी घटना, जैसा कि मारुति-सुजुकी में हुई, इसलिए आयोजित की जाती है, ताकि अधिकारों के लिए मजदूरों के संघर्ष को खत्म किया जा सके। 1967 में मोदी कपड़ा मिल गोली कांड, 1977 में हैरिंग इंडिया में गोली कांड, 1979 में जिंदल पाईप की गाजियाबाद कांड, इटली की कंपनी ग्रेजियानो में सी.ई.ओ. की मौत, एलाइड निप्पोन में वरिष्ठ प्रबध्ंाक की मौत आदि कई उदाहरण हैं, जब उक्त फैक्ट्रियों में मजदूर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने 2 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर मारुति-सुजुकी के मजदूरों के समर्थन में आयोजित होने वाले धरने में सभी को आमंत्रित किया।

ईस्टर्न मेडिकेट यूनियन के अध्यक्ष संजय मलिक ने कहा कि ईस्टर्न मेडिकेट में अवैध तालाबंदी की वजह से, कर्मचारी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। मकान मालिक मकान खाली करने को कह रहे हैं। हमारी रोजी-रोटी का साधन छीन लिया गया है। हम डटकर अपने साथ हुई नाइंसाफी के खिलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं।

विभिन्न ट्रेड यूनियन के नेताओं ने महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा श्रम विभाग को आदेश दिया गया है कि मजदूरों को अपनी पसंद का यूनियन बनाने से रोकने में पूंजीपतियों की मदद की जाये। सरकार की सांठगांठ में पूंजीपति मालिक यूनियनों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के साथ संबंध न बनायें, ठेका मजदूरों की मांगों को न उठायें और फैक्ट्री से बाहर का कोई अनुभवी मजदूर वर्ग कार्यकर्ता उनकी यूनियन का सदस्य न बने।

उन्होंने बताया कि अपनी पसंद का यूनियन बनाने के अधिकार के लिये गुड़गांव-मानेसर व दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में संघर्ष कर रहे मजदूरों को राष्ट्र-विरोधी करार दिया जा रहा है, सिर्फ इसलिये कि उनका प्रतिरोध बड़े-बड़े पूंजीपतियों की हमलावर कार्यवाहियों के रास्ते में रुकावट है।

सरकार ने दुनियाभर की इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों द्वारा अधिक से अधिक पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए श्रम का अधिकतम शोषण करना अपनी नीति का मूल सिद्धांत बना लिया है।

महारैली को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने संबोधित करते हुए कहा कि आज मजदूरों की इस हालत के लिए वर्तमान राजनीतिक प्रणाली दोषी है। यह सरकार देशी-विदेशी पूंजीपतियों की सेवा करती है। जिन्हें आप चुनते हैं, उनकी आपके प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। हमें, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन करने के लिए, संघर्ष करना होगा।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने हरियाणा सरकार से मारुति- सुजुकी प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करने और निर्दोष श्रमिकों को तुरंत रिहाई की मांग की। उद्योग विहार स्थित ईस्टर्न मेडिकेट कंपनी की अघोषित तालाबंदी को खत्म करवाकर, कंपनी प्रबंधन के खिलाफ़ कार्रवाई कर, श्रमिकों को काम पर वापस लेने की मांग की।

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Oct 1-15 2012    Struggle for Rights    Rights    

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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