अवैध ताला बंदी के विरोध में आंदोलन

गुड़गांव स्थित ईस्टर्न मेडिकिट लि. कम्पनी की पांच इकाइयों में 18 मई, 2012 से उत्पादन बंद है। इस गैर-कानूनी तालाबंदी के खिलाफ़, आल इंडिया मेडिकेट इम्पलाईज यूनियन की अगुवाई में वहां के मजदूर, बीते पांच महीनों से संघर्ष कर रहे हैं।

विदित रहे कि ईस्टर्न मेडिकिट लि. कम्पनी में बिजली, पानी भी कटवा दिया गया है। केवल 3-4 सिक्युरिटी गार्ड ही कम्पनी में ड्यूटी पर आ रहे हैं। सभी श्रमिक अपनी उचित पाली में ड्यूटी पर उपस्थित हो रहे हैं। 18 सितम्बर, 2012 से यहां के  मजदूर जिला आयुक्त कार्यालय पर भी धरना दे रहे हैं। कम्पनी प्रबंधन ने मई माह से आज तक का अर्जित वेतन भी श्रमिकों को नहीं दिया है। इस बीच, आर्थिक तंगी की वजह से दो श्रमिक आत्महत्या कर चुके हैं। गैर कानूनी तालाबंदी से 1200 श्रमिकों के परिवारों को अमानवीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

ईस्टर्न मेडिकिट लि. कम्पनी ने 1988 में आजादपुर में किराये के छोटे से प्लांट में उत्पादन शुरू किया था। मजदूरों का अतिशोषण करके कम्पनी प्रबंधन ने गुड़गांव में ही 5 इकाइयों की स्थापना की। इनमें 1200 स्थाई श्रमिक तथा लगभग 300 स्टाक कार्यरत हैं। सभी श्रमिकों को कम्पनी में काम करते हुये 15 से 22 वर्ष हो चुके हैं। अतिमुनाफा अर्जित करने के उद्देश्य से कम्पनी प्रबंधन ने 3 साल पहले देहरादून (उत्तराखण्ड) में नये प्लांट को लगाया। अब वहां सुचारू रूप से उत्पादन होने के बाद, गुड़गांव की इकाइयों में अवैध रूप से अघोषित ताला बंदी कर दी है।

पिछले डेढ़ वर्ष से कम्पनी प्रबंधन ने मजदूरों का प्रोविडेंट फंड तथा ई.एस.आई. की किस्त भी जमा नहीं की है। सरकार ने इस चोरी के खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की है।

सन् 1991 से नई आर्थिक नीति आने के बाद, पूंजीपतियों की राज्य सत्ता ने मजदूरों को लूटने की पूरी छूट दे दी है। मजदूरों के अधिकारों को दबाकर, इजारेदार पूंजीपतियों की लालच को प्राथमिकता दी गई है। गुड़गांव-मानेसर क्षेत्र में मजदूर अपने जायज अधिकारों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। शासक वर्ग बड़ी हेकड़बाजी के साथ मजदूरों को अपने अधिकारों से वंचित करता है और इसके लिए क्रूर दमन और बलप्रयोग का सहारा लेता है।

हरेक सरकार पूंजीपतियों को कौड़ी के भाव जमीन, रियायतें तथा ढेर सारी सबसिडी देती है। यह भी देखा जा रहा है कि एक राज्य से रियायतें हड़पने के बाद, पूंजीपति दूसरे राज्य में चले जाते हैं और उन राज्यों में भी सारे कानूनों का तथा  सारे आम श्रम कानूनों का उल्लंघन करने के लिये तत्पर रहते हैं।

ईस्टर्न मेडिकिट लि. के मजदूरों के संघर्ष के चलते, श्रम विभाग की मध्यस्थता में हरियाणा सरकार द्वारा कम्पनी मालिक को 7 सितंबर, 2012 को अघोषित अवैध ताला बंदी को खत्म करने तथा कम्पनी को सुचारू रूप से चलाने का निर्देश जारी किया गया है। लेकिन सरकार की ओर से कंपनी को खुलवाने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं।

मजदूर एकता लहर ईस्टर्न मेडिकिट लि. के मजदूरों के जायज़ संघर्ष का समर्थन करती है।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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