खाद्य और रोजगार के अधिकार को लेकर प्रदर्शन महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में, 10 दिसम्बर को

मानवाधिकार के दिवस अवसर पर, खाद्य और रोजगार के अधिकार को लेकर, लोक राज समिति की अगुवाई में, तहसील पर जोरदार प्रदर्शन किया गया।

इस प्रदर्शन में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की इलाका कमेटी के साथियों ने भाग लिया।

भिवंडी की सड़कें हजार से भी ज्यादा स्त्री-पुरुषों के नारों से गूँज उठीं! वे नारे थे - “राशन हमारा हक़ है, वो हम लेके रहेंगे!”, “नौकरी हमारा हक है वो हम लेके रहेंगे!”, “कैसे लेंगे? लड़ के लेंगे!” आदि जोशीले नारों के साथ 45 से भी ज्यादा गांवों से आये 1000 से भी ज्यादा लोग अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे थे।

पूर्व निर्धारित स्थान पर लोग सुबह 10 बजे इकट्ठा हुए। लोग सरकार की घोषित योजनाओं में हो रही अनियमितताओं को लेकर बहुत गुस्से में थे। फिर जोशीली नारेबाजी के साथ तहसीलदार की कचहरी के सामने पहुंचे।

प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को हर एक गाँव से एक प्रतिनिधि तथा संगठन के प्रतिनिधि सहित, 45 लोगों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए बाध्य किया। तहसीलदार ने घोषणा की कि, ‘वे सभी राशन दुकानदारों की बैठक बुलाकर चेतावनी देंगें। उन्होंने यह भी मान लिया कि ग्राम सभा में लोगों द्वारा चयन किये ग्रामिणों की निगरानी समिति का भी गठन करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अगर हमें ठीक से राशन नहीं मिला तो हम चुप नहीं रहेंगे।

प्रदर्शन का दूसरा मुद्दा, ग्रामीण रोजगार योजना के तहत लोगों को रोजगार न मिलना। तहसीलदार ने संबंधित अफसर को निर्देश दिए कि वह शून्य क्रेडिट अकाउंट बैंक में खोलने के लिए ग्रामीणों की मदद करेगा एवं जो भी काम करना चाहता है उसे काम भी देगा।

प्रदर्शन में एस.यू.सी.आई. के नौजवान साथी भी शामिल हुए।

मजदूर एकता लहर, लोक राज संगठन की पड़घा समिति को एवं उन सभी बहादुर प्रदर्शनकारियों को बधाई देते हैं और उनकी पुरजोर हिमायत करते हैं।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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