कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की सालगिरह पर मुम्बई में जनसभा

6 जनवरी, 2013 को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की महाराष्ट्र इलाका समिति ने पार्टी की सालगिरह मनाने के लिए सभा आयोजित की। इसमें  पार्टी के सदस्यों और समर्थकों ने हिस्सा लिया। इसमें संगठित क्षेत्र के मजदूर, महिलाएं तथा नौजवान बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

शुरुआत में श्री टी.एस. संकरन जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी, जिनको पार्टी के सब साथी मामा कहते थे। इस महान हस्ती का देहांत 15 दिसम्बर, 2012 को हुआ था। वे 86 वर्ष के थे। अपने आखरी दम तक लोगों के लिए लड़ने वाले मामा को सब साथियों ने खड़े होकर श्रद्धांजलि दी।

इलाका समिति के कई साथियों ने पहले अपने विचार रखे। पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया सबतरफा संकट की चपेट में है। अमरीकी-बर्तानवी साम्राज्यवाद पूरी दुनिया पर अपना कब्ज़ा ज़माने के ध्येय से विविध देशों पर हमला कर रहा है। उसके साथ हिन्दोस्तानी पूंजीपति वर्ग भी अपने साम्राज्यवादी मंसूबे पूरे करने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। दूसरी तरफ़, लोगों के संघर्ष भी बढ़ रहे हैं और मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था का ज्यादा से ज्यादा पर्दाफाश हो रहा है। कम्युनिस्टों का काम इस व्यवस्था को बचाना नहीं है, जो अनेक बड़ी कम्युनिस्ट पार्टियां करने की कोशिश कर रही हैं। उनका कर्तव्य है लोगों को, और खास करके मज़दूर वर्ग को संगठित करके इस व्यवस्था का पुनर्निर्माण करना।

अगले वक्ता ने पार्टी की भूमिका स्पष्ट की कि कैसे हिन्दोस्तानी राज्य सांप्रदायिक है। लोगों के बीच फूट डालने के लिए, उनको गुमराह करने के लिए, सांप्रदायिकता, पूंजीपति वर्ग का पसंदीदा अस्त्र है। पूंजीपति वर्ग की कोई भी पार्टी “कम बुरी”  नहीं है। गुनाहों के लिए आला कमान को दोषी ठहराने की हमारी पार्टी की मांग, अब आंदोलन में कई ताकतें उठा रही हैं। सांप्रदायिक हिंसा के लिए ज़िम्मेदार गुनहगारों को सज़ा दिलाने की मुहिम को पुरजोर समर्थन मिल रहा है, इससे यह ज़ाहिर होता है कि कैसे लोगों ने इस बात पर पार्टी की लाईन अपनायी है।

महिलाओं पर हिंसा के बारे में साथी ने कहा कि लोगों के ख़िलाफ़ पूंजीपति वर्ग इस शस्त्र का इस्तेमाल करता है, और इसलिए राज्य के विविध अंग ही सबसे बड़े गुनहगार होते हैं। पूंजीपति वर्ग ने अपने खुदगर्ज़ हितों के लिए पितृसत्ता को बरकरार रखा है। सबके मानवाधिकारों की जहां हिफा़ज़त की जाएगी, ऐसे समाज के लिए संघर्ष में महिलाओं को आगे आना चाहिए।

अगले वक्ता ने पूंजीवाद की कब्र खोदने वाले मज़दूर वर्ग की भूमिका स्पष्ट की। 19वीं सदी में पैरिस कम्यून, 20वीं सदी की शुरुआत में महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति के समय से लेकर मजदूर वर्ग द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में बात रखी। उन्होंने यह बात समझायी कि कैसे अपने देष में मज़दूर वर्ग के सबसे प्रगतिशील घटकों को क्रांति के लिए संगठित करना अहम है।

समापन संबोधन में वक्ता ने अपनी पार्टी के इतिहास तथा उपलब्धियों की एक झलक दी - कौन सी परिस्थिति में पार्टी की स्थापना की गयी, कैसे वह मज़दूर वर्ग की हुकूमशाही स्थापित करने के लिए, तथा हिन्दोस्तानी क्रांति का सिद्धांत विकसित करने के लिए वचनबद्ध है, कैसे वह आंदोलन में प्रचलित गलत लाईनों के ख़िलाफ़ लड़ती आयी है, इत्यादि। हमारी पार्टी को इस बात का गर्व है कि इसमें कोई भी गुट नहीं है, और न ही इसमें कभी कोई फूट पड़ी है - जो हिन्दोस्तानी कम्युनिस्ट आंदोलन में एक मिसाल है। यह इत्तेफ़ाक से नहीं हुआ है बल्कि इसलिए हुआ है क्योंकि हम संगठन के तत्व बतौर लोकतांत्रिक केंद्रवाद के असूल की हमने पुष्टि की है और इस पर मजबूती से अमल किया है।

इसके बाद अनेक साथियों ने मंच पर अपने महत्वपूर्ण मुद्दे रखे। खास करके नौजवानों ने कई सवाल पूछे, खास करके विष्वव्यापी संकट के बारे में, कम्युनिस्ट आंदोलन में प्रचलित विविध लाईनों के बारे में, तथा उस भावी समाज के बारे में, जिसकी स्थापना करके उसे मज़बूत करने का बीड़ा हम उठायेंगे। अध्यक्षमंडल ने उनका जवाब दिया। इलाका समिति के सचिव ने साथियों को गंभीरता से व्यक्तिगत तथा सामूहिक अध्ययन करने की ज़रूरत पर ध्यान दिलाया।

अनेक क्रांतिकारी गीतों के बाद, अपने चुने हुए मार्ग पर और जागरुकता तथा लगन से आगे बढ़ने के प्रण के साथ सभा संपन्न हुई।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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