मारुति सुजुकी के मजदूरों पर पुलिस आतंक की कड़ी निंदा करें!

यूनियन बनाने और अति-शोषण का विरोध करने के मजदूरों के अधिकार की हिफ़ाज़त में एकजुट हों!

18 जुलाई, 2012 को मारुति सुजुकी के मानेसर स्थित प्लांट में हुई हिंसा के पश्चात, राज्य की पुलिस को आदेश दिया गया है कि गुड़गांव-मानेसर इलाके में मजदूरों के बीच आतंक फैलाया जाये। मारुति सुजुकी के सौ से अधिक मजदूरों को गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया गया है। सैकड़ों मजदूर गिरफ्तार होने से बचने के लिये, अपने घर-बार छोड़ कर भाग गये हैं। सुजुकी के गुड़गांव प्लांट और सुजुकी पावर टे्रन पर भारी तादाद में सुरक्षा कर्मी तैनात किये गये हैं।

18 जुलाई को संदिग्ध हालतों में मारुति प्लांट पर आग लगने से एक मानव संसाधन प्रबंधक की दुखद मृत्यु का इस्तेमाल करके यह विचार फैलाया जा रहा है कि वह हिंसा किसी ''आतंकवादी'' द्वारा आयोजित गहरी साज़िश का परिणाम था। हरियाणा उद्योग मंत्री ने ऐलान कर दिया कि ''माओवादियों'' ने मजदूरों के बीच में घुसकर इस कांड को अंजाम दिया। इस तरह का प्रचार करके मजदूरों पर तथा साथ ही साथ, कम्युनिस्टों और मजदूर वर्ग को संगठित करने वाले अन्य लोगों पर पुलिस दमन और मजदूरों के राजनीतिक अधिकारों पर व्यापक हमलों को उचित ठहराने के लिये हालत तैयार की जा रही है।

जांच शुरू होने से पहले ही पूंजीपतियों और केन्द्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने मजदूरों और उनके यूनियन को इस कांड के लिये दोषी ठहराना शुरू कर दिया है। परन्तु अगर तथ्यों को ध्यान से देखा जाये तो यह दिखता है कि सच्चाई इसका ठीक उल्टा है। गुड़गांव-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में समस्याओं के लिये पूंजीपति और उनकी सरकारें ही जिम्मेदार हैं।

मजदूरों को अपना यूनियन बनाने व अपने नेताओं को चुनने से किसी भी हालत में रोकने के लिये मारुति-सुजुकी का निर्देशक बोर्ड जिम्मेदार है। मजदूरों के अधिकारों की मांग करने के ''अपराध'' के लिये निजी कर्मचारियों को अलग करके उन्हें प्रताड़ित करने के लिये भी वह ही जिम्मेदार है। देश के कानूनों का हनन करके, मारुति से बाहर के किसी व्यक्ति को यूनियन में भाग लेने से रोकने के लिये वह जिम्मेदार है। प्रत्येक बड़ी हड़ताल के बाद, मजदूरों से किये गये वादों को बार-बार तोड़ने के लिये वह जिम्मेदार है।

जून 2012 से एक नये वेतन समझौते पर बातचीत चल रही है, जो अगले तीन वर्ष तक लागू रहेगा। काम के दौरान, तनाव के महौल में, 17 जुलाई को एक सुपरवाइजर ने किसी मजदूर को गाली दी और उस पर शारीरिक हमला किया। जब मजदूर ने अपने बचाव में प्रतिहमला किया तो उसे निलंबित कर दिया गया। इससे मजदूर बहुत गुस्से हो गये।

18 जुलाई को बातचीत के तीन दौर हुये। मजदूरों के प्रतिनिधियों ने मांग की कि या तो निलंबित मजदूर को वापस लिया जाये या सुपरवाइजर को भी निलंबित किया जाये। मारुति-सुजुकी के मालिक नहीं माने। इतना ही नहीं, उन्होंने गेट के पास एच.आर. ऑफिस पर खड़े मजदूरों को भड़काने और उन पर हमला करने के लिये किराये के गुंडे लगा दिये। किराये के गुंडों और मजदूरों के बीच झगड़े के दौरान आग लग गयी। या तो किसी ने जानबूझकर आग लगाई या दुर्घटनावश शॉर्ट सरकिट हो गया। खुद को बचाने की कोशिश करते हुये, एच.आर. प्रबंधक आग में फंस गये और उनकी जान चली गई।

यह प्रचार, कि उस हिंसा में ''माओवादियों'' का हाथ है, इसका उद्देश्य है झूठा इल्ज़ाम लगाना और देश भर में कम्युनिस्टों तथा मजदूर वर्ग को संगठित करने वालों पर हमला करने का औचित्य देना।

हमारे देश के इजारेदार पूंजीपति खुद वैश्विक बड़े पूंजीपति बनने की दौड़ में लगे हुये हैं, और वे चाहते हैं कि वे खुद तथा बड़े-बड़े विदेशी पूंजीपति हिन्दोस्तानी मजदूरों के श्रम का आसानी से अतिशोषण कर सकें। ''टे्रड यूनियन और हड़ताल पूंजीनिवेश के लिये बुरा वातावरण पैदा करती हैं!'' यह मंत्र जपते हुये कांग्रेस पार्टी, भाजपा और दूसरी पूंजीवादी पार्टियां पूंजीनिवेशकों को आकर्षित कर रही हैं, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और नये औद्योगिक क्षेत्रों में बेइंतहा शोषण की हालतें तैयार कर रही हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस झूठे प्रचार अभियान की निंदा करती है, जिसका मकसद है मजदूरों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करने के लिये तानाशाही के कदमों को उचित ठहराना।

वर्तमान परिस्थिति में सभी मजदूरों के मूल अधिकारों की हिफ़ाज़त में, कम्युनिस्टों और मजदूर वर्ग को संगठित करने वाले सभी दलों की पक्की एकता की जरूरत है। बीते दिनों में बेअसूल बंटवारे की वजह से मजदूर वर्ग की एकता और अतिशोषण के खिलाफ़ उसका विरोध कमज़ोर हुआ है।

''एक पर हमला सब पर हमला!'' यह सभी कम्युनिस्टों और मजदूर वर्ग के नेताओं के संघर्ष का नारा होना चाहिये। मारुति के मजदूरों व अन्य मजदूरों, जिन पर अनुचित इल्ज़ाम लगाया जा रहा है और जिन्हें राजकीय आतंकवाद का शिकार बनाया जा रहा है, उनका हमें पूरा समर्थन करना चाहिये।

पूंजीपति वर्ग खुद अमानवीय अतिशोषण करना चाहता है परन्तु मजदूरों को सभी अधिकारों से वंचित करके, उनके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करना चाहता है! हम इसकी इजाज़त नहीं दे सकते।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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