सरकार के मजदूर वर्ग विरोधी कार्यक्रम के खिलाफ़ एकजुट संघर्ष तेज़ करें!

4 सितम्बर के मजदूर वर्ग अधिवेशन की सफलता सुनिश्चित करें!

11 जुलाई 2012 को ट्रेड यूनियन के नेताओं ने नयी दिल्ली में भामस कार्यालय पर हुई सभा में मेहनतकशों से आह्वान किया कि ''सरकार को अपनी नीतियां बदलने को मजबूर करने के लिए एकजुट संघर्ष को और तेज'' किया जाये। इस उद्देश्य से सभा में अपनाये गये प्रस्ताव में सभी ट्रेड यूनियनों से आग्रह किया गया कि वे स्थानीय और राजकीय स्तरों पर तुरंत नये जोश के साथ विरोध कार्यक्रम, रैलियां तथा अधिवेशन और अन्य प्रकार के आंदोलन शुरू करें।

साथ ही साथ, यूनियनों ने ऐलान किया कि 4सितम्बर, 2012 को नयी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक राष्ट्रीय अधिवेशन होगा जिसमें ''आंदोलन को नयी ऊंचाई तक तथा मूल स्तर तक ले जाने के लिए एक कार्यक्रम तय किया जायेगा''।

मजदूर एकता लहर मजदूर वर्ग के एकजुट संघर्ष को तेज करने के ट्रेड यूनियनों के फैसले को बहुत सही समय पर लिया गया, जरूरी फैसला मानती है। इस संदर्भ में यह खुशी की बात है कि केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने समझा है कि उदारीकरण और निजीकरण के जरिये भूमंडलीकरण के नाम पर मेहनतकशों के खिलाफ़ पूंजीपतियों और सरकार के बेरोक हमलों का मुकाबला करने के लिए मजदूर वर्ग की व्यापक एकता बनाना आवश्यक है। सभा में अपनाया गया प्रस्ताव देशभर के सभी ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ताओं, विभिन्न निर्दलीय यूनियनों और फेडरेशनों के नेताओं व प्रतिनिधियों को आमंत्रित करता है, ''ताकि यह अधिवेशन सरकार की लोक-विरोधी नीतियों की खिलाफ़त करने वाले मजदूरों की राष्ट्रीय एकता का सबसे व्यापक रूप बन जाये''।

4 सितम्बर, 2012 का राष्ट्रीय अधिवेशन मजदूर वर्ग के संघर्ष का अगला कदम तैयार करेगा। इससे पहले का कदम 18 फरवरी, 2012 की सर्वहिन्द आम हड़ताल थी। ट्रेड यूनियनों द्वारा पेश की गई 10 सूत्री मांगों में निम्नलिखित मांगें शामिल हैं - कम से कम प्रतिवर्ष 10,000 रुपये कमाने वाले अवैतनिक मजदूर समेत सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना, श्रम कानूनों को सख्ती से अमल में लाना, यूनियन बनाने के मजदूरों के अधिकार और निर्धारित समय के अंदर पंजीकरण प्राप्त करने के अधिकार को लागू करना, सभी कारोबारों में यूनियनों को मान्यता देना बाध्यकारी करना, सभी मजदूरों के लिए प्रतिदिन 8 घंटे तय करना, ठेके मजदूरों को समान काम के लिए समान वेतन दिलाना, किसी भी प्रकार के निजीकरण और विनिवेश का विरोध करना, इत्यादि। इसके अलावा, यूनियनों ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने और मंदी को रोकने के लिए सक्षम कदमों की भी मांग की है।

ट्रेड यूनियनों ने इस बात की निंदा की है कि सरकार समाज कल्याण के कार्यक्रमों पर खर्च की कटौती करके उसे 90,000 करोड़ रुपये तक सीमित करने की कोशिश कर रही है, जिसमें नरेगा, आई.सी.डी.एस. और प्रधानमंत्री साधक योजना जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं।

मजदूर एकता लहर सभी कम्युनिस्टों और मजदूर वर्ग कार्यकर्ताओं से आह्वान करती है कि इस अधिवेशन की सफलता के लिए सक्रियता से काम करें।

मजदूर वर्ग नेताओं और कार्यकर्ताओं, चाहे आज किसी भी पार्टी या यूनियन के हों, के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि पूंजीपति कैसे मजदूर वर्ग और लोगों के अधिकारों पर हमले करते रहते हैं, हालांकि अधिकतम आबादी इन हमलों का विरोध करती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पूंजीपति उदारीकरण और निजीकरण के जरिये भूमंडलीकरण के अपने कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हैं परंतु मजदूर वर्ग अपने कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट नहीं हैं। बीती अवधि में पूंजीपतियों ने सफलतापूर्वक मजदूर वर्ग के नेताओं और कार्यकर्ताओं तथा व्यापक मजदूरों को शासक वर्ग की अलग-अलग पार्टियों के साथ जुड़े हुए अलग-अलग यूनियनों और संगठनों में बांट रखा है। इसकी वजह से मजदूर वर्ग अपने खुद के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट नहीं है।

मजदूर वर्ग के खुद के कार्यक्रम में यूनियनों द्वारा उठायी गई मांगों को शामिल करना होगा परंतु उन मांगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। मजदूर वर्ग के खुद के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पूंजीपति वर्ग की जगह पर मजदूर वर्ग को शासक वर्ग बनाना है। यह जरूरी शर्त है ताकि मजदूर वर्ग पूरे समाज के हित में अर्थव्यवस्था को दिशा दे सकेगा और सभी की खुशहाली सुनिश्चित कर सकेगा।

मजदूर वर्ग के स्वतंत्र कार्यक्रम को विकसित करने के लिए यह जरूरी होगा कि हम उन बंधनों को तोड़ दें जो हमें शासक वर्ग की राजनीतिक पार्टियों के साथ बांधकर रखते हैं और हमें एक ऐसी बंटी हुई, शक्तिहीन ताकत बना देते हैं जो समाज के दौलत के उत्पादनकर्ता बतौर अपने अधिकारों का दावा करने के बजाय और अपने अधिकार बतौर समाज के सभी मामलों को अपने हाथों में लेने के बजाय, सत्ता के सामने गिड़गिड़ाने को मजबूर है।

मजदूर एकता लहर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से आह्वान देती है कि मजदूर वर्ग के स्वतंत्र कार्यक्रम को विकसित करें और उसके इर्द-गिर्द एकजुट हों।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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