”हिन्दोस्तान किस दिशा में?“ - इस विषय पर तमिल नाडू में सफल सभा

”गद्दार बड़े पूंजीपतियों के वर्ग ने, अर्थात उपनिवेषवादी शासकों के साथ सहयोग करके अमीर बननेवाले बड़े पूंजीपतियों तथा बड़े ज़मीनदारों ने, 1947 के सांप्रदायिक विभाजन के साथ समझौता और सहयोग किया था। अपने खुद के हाथों में सत्ता लेने के संकुचित उद्देष्य के लिए बड़े पूंजीपतियों के वर्ग ने ऐसा किया था। उस सत्ता के ज़रिये वह बहुत ही बड़ा बन चुका है। आज अपने संकुचित ध्येयों के लिए वह देष को फासीवाद तथा युद्ध की दिषा में खींच रहा है।

“गहरे सामाजिक परिवर्तन का मार्ग खोलने के लिए वक्त एक नयी शुरुआत की मांग कर रहा है। अपने 1857 के महान विद्रोह तथा उसके पहले और बाद के भी इंकलाबी शहीदों की आकांक्षाएं, सिर्फ़ मजदूर वर्ग की अगुआई में ग़दर ही पूर्ण कर सकता है। हिन्दोस्तान किस दिशा में? - इस सवाल का यही जवाब है।”

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता ने इन्हीं ज़ोरदार शब्दों से आज के कम्युनिस्टों के सामने जो कार्य है, उसका आषय निकाला। तमिल नाडू के कन्याकुमारी जि़ले में आयोजित “हिन्दोस्तान किस दिषा में?”, इस विषय पर एक महत्वपूर्ण सभा में वे बोल रहे थे। 2 सितंबर को लोक आवाज़ पब्लिषर्स एंड डिस्ट्रिब्यूटर्स ने इस सभा का आयोजन किया था।

“लगभग 125 करोड़ लोगों का यह बहुराष्ट्रीय देष किस दिषा में जा रहा है?” यह सवाल सामने रख कर वक्ता ने संबोधित किया कि “उदारीकरण व निजीकरण के जरिये भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का भद्दापन पूरे तरीके से प्रकट हो गया है। एक तरफ़ हिन्दोस्तान की सबसे बड़ी पूंजीवादी कंपनियां विष्व स्तर की इज़ारेदारियां बन चुकी हैं। देष के भीतर के और विष्वस्तर के बाज़ारों पर भी हावी होने के लिए वे विदेषी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग करती हैं और स्पर्धा भी। दूसरी तरफ़, मज़दूरों के शोषण की दर, किसानों के सामने विकट परिस्थिति तथा गरीबी और कंगाली, ये सब अपने देष में बढ़ रहे हैं।”

मुख्य प्रस्तुति के बाद अच्छी चर्चा हुई। सभा में उपस्थित सब साथियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मज़दूर तथा अन्य लोगों के बीच काम करनेवाले बुनियादी संगठनों के सहित मज़दूर वर्ग की पार्टी का निर्माण किये बिना सत्ताधारी वर्ग का समाज-विरोधी आक्रमण रोकना तथा न्याय संगत समाज प्रस्थापित करना मुमकिन नहीं है।

उपस्थित साथियों ने इस बात को भी दोहराया कि संगठित मज़दूरों के बीच पार्टी के जो बुनियादी संगठन हम प्रस्थापित करते हैं, उनके ज़रिये खास करके उस इलाके के बागान तथा नारियल जटा (कॉयर) मज़दूरों के बीच मज़दूर एकता कमेटियों के निर्माण कार्य को बहुत बढ़ावा मिलेगा। ऐसी कमेटियां पार्टी तथा यूनियनों के आपस बीच की होड़ की षिकार नहीं होंगी। ऐसी कमेटियां की हर इलाके में ज़रूरत है।

सब साथी इस बात पर सहमत थे कि मज़दूरों की एकता की ऐसी कमेटियां, मज़दूरों को एक ऐसा मंच प्रदान करेंगी, जहां वे आपस में जानकारी तथा ज्ञान का आदान-प्रदान करेंगी, चर्चा करेंगे, ताकि होषियार और चेतनशील निर्णयकर्ता होने के लिए वे अपना ज्ञान बढ़ा सकेंगे तथा समझ गहरी बना सकेंगे। मज़दूरों की राजनैतिक षिक्षा तथा प्रषिक्षण के लिए ऐसी कमेटियों का यंत्र बतौर विकास करना मुमकिन है और करना ही चाहिए। जारी संघर्ष का मार्ग तय करने के लिए तथा भविष्य में समाज का रास्ता निर्धारित करने के लिए मज़दूरों को ऐसे प्रषिक्षण की ज़रूरत है।

जो साथी उपस्थित थे, उनको निष्चित रूप से लगा कि यह सभा उस इलाके में पार्टी के कार्य को ज़रूर बढ़ावा देगी।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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