तेहरान में गुट निरपेक्ष सम्मेलन : साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा जंगफरोश और दखलंदाज़ी का सख्त विरोध करना ज़रूरी

गुट निरपेक्ष आन्दोलन की 16वीं शिखर बैठक ईरान की राजधानी तेहरान में 26 अगस्त, 2012 को शुरू हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, हिन्दोस्तान समेत 120 देशों के नेता बैठक में भाग ले रहे हैं। रूस, चीन तथा कुछ और देश बैठक में पर्यवेक्षक बतौर भाग ले रहे हैं।

ईरान की सरकार द्वारा तेहरान में इस शिखर बैठक का सफलता पूर्वक आयोजन बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और इस्राइल समेत उनके मित्रों के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। ईरान, जिसने खुद को अमरीकी साम्राज्यवाद का कट्टर दुश्मन साबित कर दिया है, अगले तीन वर्षों के लिये गुट निरपेक्ष आन्दोलन की अध्यक्षता करेगा। उसके बाद इसकी अध्यक्षता वेनेजुएला को सौंपी जायेगी, जिसकी वर्तमान सरकार अमरीकी साम्राज्यवाद का एक और कट्टर दुश्मन है।

इसके अलावा, यह ध्यान देने वाली बात है कि ईरान पर भयानक बहुतरफा सैनिक, आर्थिक और कूटनीतिक घेराबंदी के बावजूद, इतने सारे देशों के प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने का फैसला किया है।

अमरीका और इस्राइल ने अनेक देशों पर दबाव डाला है कि वे इस बैठक में भाग न लें। जाना जाता है कि इस्राइल के प्रधानमंत्री, श्री नेतनयाहू ने खुद संयुक्त राष्ट्र महासचिव से 9 अगस्त, 2012 को आग्रह किया कि वे गुट निरपेक्ष आंदोलन की बैठक में जाने की योजनाएं बदल दें। परन्तु इतने सारे देशों का इस बैठक में उपस्थित होना यह दिखाता है कि पूरी दुनिया में ईरान का अपनी संप्रभुता की हिफ़ाज़त में साम्राज्यवाद विरोधी रवैये को तथा सत्ता परिवर्तन के इरादे से संप्रभु देशों के अन्दरूनी मामलों में बेरहमी से हस्तक्षेप करने और जंग फैलाने की अमरीकी साम्राज्यवादी नीति के खिलाफ़ ईरान के रवैये को काफी समर्थन प्राप्त है।

गुट निरपेक्ष आंदोलन की 16वीं बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनके इस्राइली मित्रों ने सिरिया और ईरान, दोनों में सत्ता परिवर्तन करने के लिये सैनिक हस्तक्षेप की पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने सिरिया के अन्दर अपने दलालों को सैनिक और हर प्रकार का समर्थन दिया है तथा उस देश में गृह युद्ध फैलाया है। दिन-प्रति-दिन वे ऐलान कर रहे हैं कि जब तक सिरिया की वर्तमान सरकार को गिराकर ऐसी सरकार नहीं लायी जायेगी जो साम्राज्यवादियों के नियंत्रण में हो और उनके आदेश के अनुसार काम करने को तैयार हो, तब तक वे चैन से नहीं  बैठेंगे। जैसा कि लिबिया में उन्होंने किया है, वैसे ही उन्होंने सिरिया में झगड़े पर बातचीत करके समझौता करने के विभिन्न देशों के प्रयासों को मानने से इंकार किया है। सिरिया को इसलिये निशाना बनाया गया है क्योंकि सिरिया की सरकार फिलिस्तीनी लोगों के मुक्ति संघर्ष का समर्थन करती है और पश्चिम एशिया पर अपना आधिपत्य जमाने की अमरीकी साम्राज्यवादी योजनाओं का विरोधी रही है। खबरों के अनुसार, बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी और उनके मित्र ईरान पर सैनिक हमला और कब्ज़ा करने की तैयारी कर रहे हैं और वहां सत्ता परिवर्तन करने की कोशिश कर रहे हैं।

आज से 35से अधिक साल पहले जब ईरान में क्रांति हुई थी, उस समय से ईरान मुसलमान लोगों के बीच में सभी साम्राज्यवाद विरोधी ताकतों के लिये और आम तौर पर दुनिया की सभी साम्राज्यवाद विरोधी ताकतों के लिये एक प्रोत्साहन का स्रोत रहा है। दूसरी ओर ईरान अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनके मित्रों के हमलों का शिकार भी बना रहा है और इन साम्राज्यवादियों ने उसे फिर से एक नव-उपनिवेश में बदल डालने की पूरी कोशिश की है। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने सद्दाम हुसैन को ईरान के खिलाफ़ भयानक युद्ध छेड़ने को उकसाया था, जिसमें लाखों लोग मारे गये या घायल हुये और ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। इस समय ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाये गये हैं और उसे सैनिक तौर पर घेर लिया गया है, सिर्फ इसलिये कि वह अपना अलग प्रकार का शासन तंत्र चलाना चाहता है और उसकी सरकार ने सिरिया और अन्य देशों में बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनके मित्रों की खूनी हरकतों और दखलंदाजी का लगातार विरोध किया है। ईरान पर चारों ओर से दबाव डाला जा रहा है ताकि उसे दूसरे देशों से अलग किया जाये। इजारेदार पूंजीपतियों की मीडिया में ईरान के बारे में झूठा प्रचार किया जा रहा है, ईरान के परमाणु संयंत्रों के कम्प्यूटरों पर भीषण साइबर हमले किये जा रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ़ प्रस्ताव पास किया जा रहा है, और ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों का कत्ल किया जा रहा है, ईरान पर कठिन वैत्तिक पाबंदियां लगाई जा रही हैं और जंग का नगाड़ा बजाया जा रहा है। हिन्दोस्तान समेत दूसरे देशों पर यह दबाव डाला जा रहा है कि वे ईरान के साथ व्यापार सम्बंधों को काट दें या उसे बहुत कम कर दें, ताकि ईरान को दूसरे देशों से अलग किया जाये और घुटनों पर लाया जाये।

परन्तु तमाम मुश्किलों का सामना करते हुये ईरान ने कभी अपनी दिशा नहीं बदली है। दुनिया के मामलों में ईरान की भूमिका को नकारने और उसे अलग करने की कोशिशों का मुकाबला करने के लिये ईरान ने कई सक्रिय कदम उठाये हैं। अगस्त 2012 के आरंभ में ईरान की सरकार ने पड़ौसी देश सिरिया में हस्तक्षेप का विरोध करने के लिये और उस देश की सभी राजनीतिक पार्टियों के बीच आगे के रास्ते पर बातचीत का आह्वान देने के लिये, लगभग 30देशों की बैठक बुलायी थी।

उम्मीद है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन की शिखर बैठक में मुख्य तौर पर यह चर्चा होगी कि अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनकी नीतियों की हमलावर जंगफरोश नीति के कारण सभी देशों की संप्रभुता और आज़ादी को तथा दुनिया में व उस इलाके में शांति को गंभीर खतरा है।

यह स्पष्ट है कि अनेक देश बर्तानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनके मित्रों द्वारा पैदा की गयी हालत से खुश नहीं हैं। यह सिर्फ शांति और संप्रभुता के लिये ही नहीं, बल्कि खुद अपने तरीके से अपना शासन चलाने और अपना विकास करने की इच्छा रखने वाले सभी देशों और लोगों के अस्तित्व के लिये भी भारी खतरा है।

तेहरान में हो रही गुट निरपेक्ष आंदोलन की शिखर बैठक ईरान के लिये उसे अलग करने की कोशिशों को नाकामयाब करने का एक मौका ही नहीं है, बल्कि यह बैठक इसमें भाग लेने वाले सभी देशों के लिये एक ऐसा मौका भी है जब वे दुनिया में तथा उस इलाके में हो रही गंभीर परिस्थिति का सामना करने के लिये आपस में मिलजुल कर कदम उठा सकेंगे। यह उम्मीद की जाती है कि इसमें भाग लेने वाले देशों के नेता वक्त की जरूरत के अनुसार, साम्राज्यवादी ताकतों की जंग फरोशी और खुलेआम हस्तक्षेप के खिलाफ़ कठोर रवैया अपनायेंगे। 

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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