तुर्की के लोगों ने सीरिया के खिलाफ़ “जंग नहीं” का नारा दिया!

पड़ोसी देश सीरिया से तुर्की की जंग की संभावना का विरोध करने के लिये, तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्ताम्बुल की सड़कों पर हजारों लोग उतर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत तब हुयी जब अर्दोगन सरकार ने अपने संसदीय बहुमत का इस्तेमाल करके, संसद से “विदेशी देशों”  के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने की अनुमति ले ली थी। तुर्की की सरकार को अगले एक साल में कोई भी दुष्कर हमला करने के “विस्तार, हद और समय”  तय करने की अनुमति मिल गयी है।

कुछ ही दिन पहले सीरिया में सीमा के पास गोलीबारी के दौरान कुछ गोले तुर्की में गिरने और इनसे एक परिवार के सदस्यों की मौत होने से तुर्की के युद्ध में फंस जाने का ख़तरा निकट आ गया है। सीरिया की सरकार द्वारा गहरा दुख जताने के बावजूद, तुर्की की सरकार ने तुरंत जवाब में गोले बरसाये और चिल्ला-चिल्ला कर नोक-झोंक की।

पिछले दो वर्षों से, अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके नाटो सहयोगियों ने सीरिया की बशीर अस्साद की सरकार को गिराने का हर संभव प्रयास किया है। इनमें सीरियाई विरोधी गुटों को हथियारों से लैस करना, उनको पैसा देना और हर तरह का भौतिक और राजनीतिक समर्थन देना शामिल है। इसका नतीजा रहा है कि देश के अंदर एक लंबा और खूनी युद्ध जारी है। सीरियाई सरकार विरोधी इस अभियान में प्रधान मंत्री अर्दोगन के तहत तुर्की ने एक अहम भूमिका अदा की है। उसने अमरीका-नाटो के अभियान में “अग्रिम पंक्ति”  बतौर सशस्त्र विरोधियों को आधार और दूसरे समर्थन दिये हैं। जून के महीने में, जब सीरिया के बलों ने तुर्की के एक लड़ाकू विमान को धराशाई किया था, जो सीरिया की वायुसीमा के अंदर आ गया था, तब अमरीका-नाटो की शह में तुर्की की सरकार सीरिया से युद्ध के कगार पर जा पहुंची थी।

बढ़ते तौर पर, तुर्की के चिंतित लोग अपनी सरकार की अमरीकी साम्राज्यवाद के आधिपत्य जमाने के उद्देश्य से मेल खाने वाली अक्खड़ और खुदगजऱ् नीति के खिलाफ़ सड़कों पर उतर रहे हैं। यह इस्ताम्बुल के विरोध प्रदर्शन में उनके नारों व  झंडों से पता चलता था। प्रदर्शनकारियों की पुकार थी, “जंग नहीं!”  और “अमरीका मध्यपूर्व से बाहर निकलो!” उनके द्वारा उठायी गई तख्तियों और झंडों पर लिखा था: “यह युद्ध हमारा युद्ध नहीं है!”, “सीरिया में साम्राज्यवादी दखलंदाजी बंद करो! ” , “हम ए.के. पार्टी की युद्ध राजनीति को रोक देंगे!”, “हम साम्राज्यवाद के लिये सैनिक नहीं बनेंगे” और “अमरीका, मध्यपूर्व से अपने हाथ दूर रखो!”

इस्ताम्बुल के विरोध प्रदर्शन, इस इलाके में साम्राज्यवाद के अनवरत घुसने को रोकने के कदमों में, तुर्की के लोगों की बहुत ही अहम पहलकदमी है। लोगों ने साफ कर दिया है कि वे साम्राज्यवादी उद्देश्य के लिये अपने आप को तोप का चारा नहीं  बनने देना चाहते हैं। इराक, लीबिया, सीरिया और इस इलाके के अन्य देशों की तरह वे अपने देश को युद्ध का मैदान नहीं बनने देना चाहते हैं। सिर्फ लोगों की एकता और मजबूती ही, साम्राज्यवाद द्वारा पश्चिम एशिया में भ्रात्यहत्याई युद्ध उकसाने और अपना आधिपत्य जमाने की जघन्य योजना को हरा सकती है।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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