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  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 21अक्तूबर, 2019

    जनसंहार की इस पूरी अवधि के दौरान कई चिंतित और जाने-माने नागरिकों ने सरकार से अपील की, जिनमें कई कार्यरत न्यायाधीश, सांसद, सेवा निवृत्त सेनाध्यक्ष और एयर मार्शल शामिल थे। उन्होंने देश के गृहमंत्री और राष्ट्रपति से इस जनसंहार को रोकने की अपील की। लेकिन उनकी अपील केवल खामोश दीवारों से टकराती रही। यह जनसंहार 72 घंटों तक लगातार चलता रहा। इस दौरान दिल्ली की सड़कों पर हर एक मिनट में एक सिख का कत्ल किया जाता रहा।

  • Jallianwala Bagh 1919

    देश भगत यादगार कमेटी, जलंधर ने 28वां ग़दरी मेला जलियांवाला बाग़ के शहीदों को समर्पित किया है, जो 13 अप्रैल, 1919 को शहीद हुये थे। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा इस अवसर पर भेजे गये संदेश को हम प्रकाशित कर रहे हैं।

    बस्तीवादी राज्य की तरह ही मौजूदा हिन्दोस्तानी राज्य भी हिन्दोस्तानी और विदेशी शोषकों और दमनकारियों के हितों की हिफ़ाज़त करता है। लोगों पर उनके राजनीतिक विचारों और धार्मिक आस्थाओं के लिए हमला किया जाता है। जिन तंत्रों और हथकंडों की सहायता से बर्तानवी बस्तीवादी हिन्दोस्तानी लोगों पर अपना राज चलाते थे, उन्हें और अधिक विकसित और मजबूत किया गया है।

  • बी.एस.एन.एल. के निजीकरण की सरकार की योजना का विरोध करें

    सार्वजनिक क्षेत्र की टेलीकाम सेवा प्रदाता कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल.) के निजीकरण को उचित ठहराने के लिये सरकार काफी प्रचार करती आयी है। इस सरकारी कंपनी की विशाल सम्पत्ति को सरकार बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हाथों में कौड़ियों के दाम पर बेच देना चाहती है। बी.एस.एन.एल. के कर्मचारी इस क़दम के विरोध में संघर्ष कर रहे हैं। मज़दूर एकता लहर ने कामरेड सेबास्टिन जो बी.एस.एन.एल. एक्जीक्यूटिव्स एसोसियेशन के महासचिव हैं, के साथ साक्षात्कार किया। उन्होंने कंपनी के इतिहास, अपने देश के टेलीकाम क्षेत्र के विकास के बारे में और बी.एस.एन.एल. के निजीकरण के वर्तमान क़दमों के बारे में विस्तार से समझाया। हम उनके साथ हुई वार्ता के कुछ अंश यहां पेश कर रहे हैं।
  • जून 2019 में हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच व्यापार संबंधों में तनाव पैदा हो गया जब अमरीका ने हिन्दोस्तानी निर्यातों को मिलने वाली 6 अरब डॉलर की निशुल्क सुविधा को वापस ले लिया और हिन्दोस्तान ने इसके जवाब में 29 अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगा दिया।
  • Economic crisis

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी - लेनिनवादी) लिबरेशन, रेवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने 16 अक्तूबर, 2019 को नयी दिल्ली में संसद पर संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया। “आर्थिक संकट का बोझ जनता पर डालना बंद करो!”, इस झंडे तले, सैकड़ों मज़दूरों, नौजवानों और महिलाओं ने जंतर-मंतर और जयसिंह रोड के चौक से संसद की ओर जुलूस निकाला। संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। वहां एक सार्वजनिक सभा की गई।

     

     

  • सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ई.एस.आई.सी.) के लिये मालिकों व मज़दूरों के योगदान को 1 जुलाई, 2019 से घटा दिया है। मालिकों के योगदान को 4.75 प्रतिशत से घटा कर 3.25 प्रतिशत कर दिया गया है और मज़दूरों के योगदान को 1.75 प्रतिशत से घटा कर 0.75 प्रतिशत कर दिया गया है। इसकी सफाई में सरकार ने कहा है कि इससे मज़दूरों के घर ले जाने वाले वेतन मे बढ़ोतरी होगी, कंपनियों में वित्तीय स्थिरता आयेगी और ई.एस.आई.सी. योजना में और भी कंपनियां जुड़ जायेंगी। अगर हम सरकार के क़दम को मज़दूरों के नज़रिये से देंखे, जिनके लिये यह योजना बनाई गयी है, तो यह साफ़ है कि सरकार के क़दम मज़दूरों के हित में नहीं हैं।
  • Rail workers

    18 अक्तूबर, 2019 को मुम्बई में सैकड़ों रेल मज़दूरों ने निजीकरण की तरफ बढ़ाये जा रहे रेल मंत्रालय के क़दमों का तथा मज़दूर-विरोधी नयी पेन्शन योजना (एन.पी.एस.) का विरोध किया।

    यह विरोध प्रदर्शन आल इंडिया ट्रैकमेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू), इंडियन रेलवेज़ सिग्नल एंड टेलिकॉम मेन्टेनर्स यूनियन (आई.आर.एस.टी.एम.यू), वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज़ मूवमेंट फार ओल्ड पेन्शन स्कीम (डब्ल्यू.आर.ई.एम.ओ.एस.) तथा रेल मज़दूर यूनियन (आर.एम.यू.) ने आयोजित किया था।

     

     

  • Telangana transport workers get head shaved in protest

    5 अक्तूबर, 2019 को तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टी.एस.आर.टी.सी.) के करीब 50,000 मज़दूरों ने हड़ताल कर दी। 21 अक्तूबर को विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही ज्वाईंट एक्शन कमेटी (जे.ए.सी.) ने 30 अक्तूबर को हैदराबाद में एक “सकला जनुला समरा भेरी” सभा का आयोजन करने का बुलावा दिया है, जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे।

    राज्य सरकार ने हड़ताल का बदला लेते हुए ऐलान किया है कि, जो मज़दूर हड़ताल पर हैं और इस वजह से काम नहीं कर रहे हैं, उन्होंने खुद को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है और अब वे टी.एस.आर.टी.सी. के कर्मचारी नहीं रहे।

     

  • pmc_depositors_demonstration

    26 सितम्बर, 2019 को बैंक के खातों में गड़बड़ी नज़र आने की वजह से भारतीय रिज़र्व बैंक ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव (पी.एम.सी.) बैंक के प्रबंध निदेशक और निदेशक मंडल को निलंबित कर दिया। पी.एम.सी. बैंक का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। रिज़र्व बैंक ने अपनी इजाज़त बगैर पी.एम.सी. बैंक को किसी भी कर्ज़ का नवीकरण करने या नए कर्ज़ देने पर रोक लगा दी। बैंक के खाताधारकों को बताया गया कि वह अगले 6 महीनों में बैंक से ज्यादा से ज्यादा केवल 1000 रुपये ही निकाल सकते हैं। इससे बैंक के 9 लाख से अधिक खाताधारकों को बड़ा धक्का लगा और गुस्सा आया, जिनकी जमापूंजी बैंक में फंस गयी है।

     

  • अक्तूबर 2017 में रेलवे बोर्ड ने मुम्बई के परेल वर्कशॉप को बंद करके उसकी जगह पर एक यात्री टर्मिनस बनाने का प्रस्ताव रखा था। वहां के मज़दूर तभी से इस मज़दूर-विरोधी, समाज-विरोधी प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।
  • Teachers protest in New Delhi

    14 अक्तूबर, 2019 को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सी.ए.टी.) के एक आदेश पर दिल्ली के तीनों नगर निगमों - उत्तर, दक्षिण और पूर्व के प्राथमिक स्कूलों के 3,778 शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द कर दी गईं।

    इन शिक्षकों को शहर में फैले तीनों नगर निगमों के 1,600 से अधिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जाना था। उन्हें हाल ही में नियुक्ति पत्र दिए गए थे और 15 अक्तूबर से काम शुरू करना था।

     

     

  • सरमायदारों के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम को हराने के लिए संगठित हो!

    पूंजीवादी पार्टियों के उम्मीदवारों को ठुकरायें!

    लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव में जिताओ!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का आह्वान, 5 अक्तूबर, 2019

    21 अक्तूबर, 2019 को 90 सदस्यों वाली हरियाणा राज्य विधानसभा के लिए चुनाव होंगे। पूंजीपति वर्ग की दो प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस इन चुनावों में हिस्सा ले रही हैं। इनके अलावा हरियाणा के पूंजीपति और बड़े ज़मीनदारों का प्रतिनिधित्व करने वाली कई अन्य पार्टियां भी हिस्सा ले रही हैं जिनमें इंडियन नेशनल लोक दल और जननायक जनता पार्टी शामिल हैं।

  • पूंजीवादी पार्टियों के उम्मीदवारों को ठुकरायें!

    केवल उनका चुनाव करें जो आपके अधिकारों के लिए लड़ते आये हैं!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की महाराष्ट्र क्षेत्रीय समिति का बयान, अक्तूबर, 2019

    लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से भाजपा की जीत के 5 महीने बाद, 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव 21 अक्तूबर, 2019 को होने जा रहे हैं। पिछले दो दशकों से इस राज्य को गठबंधन सरकारें चला रही हैं। भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 1995 से 1999 के बीच और 2014 से शासन किया है। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन 1999 से 2014 के बीच 15 वर्षों तक सत्ता में रहा है।

  • Comrade SK

    25 सितम्बर, 2019 की सुबह को कामरेड शेखर कापुरे का देहांत टिटवाला, मुबंई में उनके निवास स्थान पर हो गया। वे 59 वर्ष के थे और “एस.के.” के नाम से लोकप्रिय थे। 1998 में जब से वे पार्टी के साथ जुड़े थे, उस समय से 20 वर्ष से अधिक समय के लिए वे कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के लड़ाकू साथी बने रहे। उनका जन्म महाराष्ट्र के नांदेड जिले में खुशनूर में हुआ था। यहां से अपनी स्कूल की शिक्षा और स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वे कानून की पढ़ाई करने के इरादे से मुंबई आए। यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक गारमेंट फैक्ट्री में पार्ट टाइम काम करना शुरू कर दिया ताकि वे अपने कॉलेज की फीस और रहने-खाने का खर्चा पूरा कर सकें। लेकिन गारमेंट फैक्ट्री में मज़दूरों के काम की दयनीय हालत को देखते हुए, जल्द ही उन्होंने मज़दूरों को इन हालातों के ख़िलाफ संगठित करना शुरू कर दिया। वे इस काम में इतने व्यस्त हो गए कि उन्होंने पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा समय मज़दूरों को संगठित करने में समर्पित कर दिया। अपने अन्य लड़ाकू साथियों के साथ मिलकर 1998 में उन्होंने लड़ाकू गारमेंट मज़दूर संघ (एल.जी.एम.एस.) की स्थापना की।

  • Workers convention

    हुक्मरान वर्ग के मज़दूर-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी रास्ते को रोकने के लिए देश का मज़दूर वर्ग एकजुट विरोध संघर्ष कर रहा है। इस संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए, देशभर के हजारों-हजारों मज़दूरों ने यह ऐलान किया है कि 8 जनवरी, 2020 को सर्व हिन्द आम हड़ताल आयोजित की जायेगी। 30 सितम्बर, 2019 को नई दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए राष्ट्रीय मज़दूर अधिवेशन में यह फैसला घोषित किया गया। दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों - इंटक, एटक, एच.एम.एस., सीटू, ए.आई.यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., सेवा, ए.आई.सी.सी.टी.यू., एल.पी.एफ. और यू.टी.यू.सी. - ने मज़दूर वर्ग के आगे के कार्यक्रम को तय करने के लिए, संयुक्त रूप से अधिवेशन का आह्वान किया था।

  • File photo

    सितंबर 2019 में देशभर के अधिकांश शहरों में प्याज की खुदरा क़ीमतें 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। सितंबर में ज्यादातर शहरों में दाम 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गये, जबकि जुलाई से अगस्त के दौरान प्याज 20 से 25 रुपये प्रति किलो पर था। इसके जवाब में सरकार ने सभी प्रकार के प्याज निर्यात पर रोक लगा दी, प्याज व्यापारियों के भण्डारण पर सीमा लगा दी और कुछ जगहों पर केंद्रीय भंडार में रखा गया भंडार भी बाज़ार में निकाल दिया गया।

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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