हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन की ललकार :

Submitted by sampu on शनि, 17/12/2016 - 16:48

आने वाले क्रांतिकारी तूफ़ानों के लिए तैयारी करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन का आयोजन नवम्बर 2016 में किया गया।

ज़ोरदार तालियों के बीच पार्टी के महासचिव, कॉमरेड लाल सिंह ने देश के अनेक भागों से व विदेश आये प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए महाअधिवेशन का उद्घाटन किया।

कॉमरेड लाल सिंह ने जोर देते हुए कहा कि हमारी ताक़त का स्रोत अपने अधिकारों की सुरक्षा के संघर्ष में तथा पूंजीवाद, सामंतवाद के सभी अवशेषों, बस्तीवाद व साम्राज्यवाद को समाप्त करने के उदेश्य से क्रांति को अगुवाई देने के लिए मजदूर वर्ग को तैयार करने तथा उसको नेतृत्व देने के कर्तव्य को अडिगता से निभाने में है। दुनिया भर से पार्टी के संगठनों के सभी प्रतिनिधि, पार्टी की लाइन व कार्यक्रम में दृढ़़ विश्वास के साथ इस महाअधिवेशन में आये हैं। वे मज़दूरों, किसानों, महिलाओं, युवकों व विद्यार्थियों को पार्टी की इसी लाइन व कार्यक्रम के इर्द-गिर्द संगठित करते आये हैं।

कॉमरेड लाल सिंह ने बताया कि अपनी पार्टी का पांचवां महाअधिवेशन ऐसे समय पर हो रहा है जब हिन्दोस्तान में व विश्व स्तर पर हालातें दिखा रही हैं कि हम बड़े टकरावों की तरफ बढ़ रहे हैं। सभी देशों के मज़दूर वर्ग व लोग निरंतर बढ़ते शोषण तथा उनकी ज़मीन व श्रम की लूट को अब बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।

सत्ताधारी वर्ग में गहरी फूट के कारण वह विरोधी गुटों में बंटा हुआ है और पुराने तरीकों से राज नहीं कर पा रहा है।

दुनिया भर में तीव्र होते हुए अंतर्विरोधों के बीच हम हिन्दोस्तान में बाहरी व आंतरिक, दोनों शक्तियों से और भी ज्यादा ख़तरे का सामना कर रहे हैं। अपने देश के बड़े पूंजीपतियों का रुख़ आक्रमक है और उन्होंने मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी तथा देश-विरोधी कार्यक्रम को तेज़ी से लागू करने के लिए मोदी के नेतृत्व में बहुमत के साथ भाजपा को सत्ता में बिठाया है। अमरीकी साम्राज्यवाद संपूर्ण एशिया पर हावी होने के अपने उद्देश्य की तरफ आक्रमकता से बढ़ रहा है तथा उसे हासिल करने के लिए हिन्दोस्तानी सत्ताधारी वर्ग के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है।

कॉमरेड लाल सिंह ने याद दिलाया कि आज की परिस्थिति में तथा एक शताब्दी पूर्व जो स्थिति थी, जब पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था के सभी अंतर्विरोध सुलझने की कगार पर पहुंच गए थे, उनमें अनेक समानताएं हैं। हमने अभी-अभी महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष में कदम रखा है। आज भी अनेक देशों के मज़दूर वर्ग तथा लोग अपने घृणित शोषकों व दमनकारियों का तख्ता पलटने के लिये तैयार हैं।

कॉमरेड लाल सिंह ने कहा कि सभी आर्थिक व राजनीतिक गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि क्रांति की लहर भाटे से ज्वार में बदलने वाली है। इस परिस्थिति में आवश्यक है कि हम कम्युनिस्ट, मज़दूर वर्ग को इस लहर पर सवार होने में अगुवाई दें और यह सुनिश्चित करें कि इससे स्थायी क्रान्तिकारी बदलाव आये, जिसके ज़रिये पूंजीवाद से समाजवाद और कम्युनिज़्म की तरफ बदलाव हो।

फिर उन्होंने 2010 में हुए चैथे महाअधिवेशन में चुनी गई केंद्रीय समिति को बर्खास्त करने की घोषणा की। यह करते हुए, उन्होंने कहा कि इस केंद्रीय समिति द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट को चर्चा के लिये व इस महाअधिवेशन द्वारा पारित करने के लिए पेश किया जायेगा। फिर उन्होंने इस महाअधिवेशन को चलाने के लिए पांच सदस्यों के अध्यक्षमंडल का प्रस्ताव रखा।

प्रतिनिधियों ने अध्यक्षमंडल को सर्वसम्मति से चुना। अध्यक्षमंडल ने कॉमरेड लाल सिंह को अपना प्रधान चुना और फिर उन्होंने महाअधिवेशन का अजेंडा पेश किया। अजेंडे को सर्वसम्मति से पारित किया गया।

सभी क्रांतिकारी योद्धाओं को लाल सलाम

सभी दिवंगत कम्युनिस्टों तथा क्रांतिकारियों को खड़े होकर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ महाअधिवेशन शुरू हुआ। प्रतिनिधियों ने अपनी पार्टी के साथ-साथ अन्य क्रांतिकारी पार्टियों व संगठनों के दिवंगत कॉमरेडों को याद किया। उन्होंने घृणित बस्तीवादी राज के खिलाफ़ संघर्ष में हिंदुस्तान ग़दर पार्टी तथा अन्य क्रांतिकारी संगठनों के शहीदों के बहादुर आत्म-बलिदान को याद किया। उन्होंने पैरिस के कम्युनार्डों को याद किया। उन्होंने रूस में सर्वहारा क्रान्ति के द्वारा ज़ार व पूंजीपतियों तथा जमींदारों की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए तथा मानव के द्वारा मानव के सभी प्रकार के शोषण से रहित नए समाजवादी समाज की रचना के लिए बोल्शेविक पार्टी के सदस्यों तथा क्रांतिकारी मज़दूरों और किसानों के बहादुर बलिदान को याद किया।

महाअधिवेशन के लिए ड्राफ्ट रिपोर्ट

रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए कॉमरेड लाल सिंह ने समझाया कि यह पिछले छह वर्षों में पूरी पार्टी तथा उसके सभी संगठनों के सामूहिक सैद्धांतिक व संगठनात्मक काम का समालोचन है। सभी कॉमरेडों का यह फर्ज़ है कि वे ड्राफ्ट रिपोर्ट का गंभीरता से अध्ययन करें और उस पर चर्चा में जोष से भाग लें। पूरी चर्चा के बाद और जो भी उसमें बदलाव मंजूर किये जाते हैं, उनके आधार पर जब महाअधिवेशन उसको पारित कर देता है, तब पार्टी के हर सदस्य की ज़िम्मेदारी बनती है कि राजनीतिक व संगठनात्मक रिपोर्ट के निष्कर्षों का वह समर्थन करे। कार्य योजना को लागू करने के लिये लड़ना हम सब का फर्ज़ है।

अपने देश के अंदर व विश्व स्तर पर हुई गतिविधियों का विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट ने दर्शाया कि हिन्दोस्तान के बड़े पूंजीपतियों का आक्रमक अजेंडा मजदूरों, किसानों तथा हमारे समाज में सब कुछ जो स्वस्थ है, उसके लिए गहरा ख़तरा पैदा कर रहा है। हालांकि उसे हमारी अर्थव्यवस्था के विकास के अजेंडे के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे लाखों मेहनतकशों की जीविका नष्ट हो रही है और खूंखार पूंजीवादी इज़ारेदारियों के हाथों में पूंजी का अत्याधिक केन्द्रीकरण हो रहा है। जबकि उसका प्रचार राष्ट्र-रचना की परियोजना की तरह किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मजदूर वर्ग की एकता तथा सभी धर्मों, जातियों व राष्ट्रीयताओं के हिन्दोस्तानियों की एकता को नष्ट करना है।

रिपोर्ट ने दिखाया कि पूंजीपतियों को मज़दूरों, किसानों तथा अन्य शोषित-पीड़ित लोगों से बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बड़े पूंजीपतियों के अजेंडे के खिलाफ़ संयुक्त मज़दूर वर्ग के विरोध की शक्ति बढ़ रही है। अपने देश में परिस्थिति बड़े पूंजीपतियों के समाज-विरोधी व साम्राज्यवादी अजेंडे तथा मेहनतकश व शोषित-पीड़ित लोगों के व्यापक विरोध के बीच बड़े टकराव की दिश में जा रही है।

रिपोर्ट इस नतीजे पर पहुंची कि अपने देश में व विश्व स्तर पर हालातें क्षितिज पर क्रांतिकारी तूफानों को दर्शा रही हैं। रिपोर्ट ने क्रांति के लक्षणों को विस्तार से बताया। जाति, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव व दमन सहित अपने समाज में जो सब सड़ा-गला, पिछड़ा, शोषणकारी व दमनकारी है, उसे समाप्त करने के लिए क्रांति के जो प्रमुख लक्षण ज़रूरी हैं, उनका रिपोर्ट में विस्तार से वर्णन किया गया। उसने समझाया कि क्यों क्रांति का लक्ष्य पूंजीवाद पर होना चाहिये। यह इसलिए क्योंकि यह पूंजीवादी विकास ही है जो पुराने दमनकारी संबंधों को बरकरार रखता व बदतर करता है।

हिरावल कम्युनिस्ट पार्टी की आगुवाई में, मज़दूर वर्ग के नेतृत्व में क्रान्तिकारी संयुक्त मोर्चे को राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में लेने की और समाज का क्रांतिकारी परिवर्तन करने की ज़रूरत है। लोगों के राजनीतिक सशक्तिकरण तथा सभी की समृद्धि व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अर्थव्यवस्था के दिशा-परिवर्तन के फ़ौरी कार्यक्रम के इर्द-गिर्द ऐसे मोर्चे को बनाया जा सकता है और बनाना चाहिये।

रिपोर्ट ने जोर दिया कि हमारे संगठनात्मक कार्यों की सफलता की चाभी पार्टी के बुनियादी संगठन बनाने में तथा मज़बूत करने में है। ये बुनियादी संगठन, मज़दूरों, किसानों, युवकों तथा विद्यार्थियों के बीच, फैक्ट्रियों, काम की जगहों, शैक्षणिक संस्थाओं व उन जगहों पर जहां लोग बड़ी संख्या में संघर्ष कर रहे हैं, वहां बनाने चाहिएं।

रिपोर्ट के अंत में कार्य योजना पेश की गयी। यह योजना उसी योजना की निरंतरता व विकास है, जिसे हम अभी तक लागू करते आये हैं। यह मज़दूर वर्ग आन्दोलन में विकास, हमारी पार्टी की शक्ति व क्षमता में विकास तथा विश्व क्रान्ति की भाटे से ज्वार की ओर पनपती स्थिति को देखते हुए काम को एक और ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिये है। रिपोर्ट ने ज़ोर दिया कि हमें विस्तृत दृष्टिकोण के साथ, कार्य करने की ज़रूरत है। और भी साहसिक लक्ष्य सामने रखते हुए तथा अधिकतम राजनीतिक लामबंदी के द्वारा उन लक्ष्यों को पाने के लिए पहल को बढ़ावा देते हुए कार्य करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट पर चर्चा हुई और उसे स्वीकार किया गया

रिपोर्ट की प्रस्तुति के बाद व्यक्तिगत अध्ययन तथा सामूहिक चर्चाएं हुईं। उसके बाद परिपूर्ण सत्र में अध्यक्षमंडल ने सब प्रतिनिधियों को रिपोर्ट के बारे में अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया, इसमें सौ से ज्यादा प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रकट किये।

विद्यमान परिस्थिति के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए एक के बाद एक प्रतिनिधि ने रिपोर्ट की सराहना की। वर्ग संघर्ष के बारे में अपने खुद के अनुभव के आधार पर उन्होंने विश्लेषण को और समृद्ध बनाया। अधिकारों की आधुनिक परिभाषा के आधार पर कम्युनिस्टों की एकता को पुनस्र्थापित करने के लिए, तथा मज़दूर वर्ग और सब दबे-कुचले लोगों की एकता के लिए पार्टी के विशाल नज़रिये का उन्होंने सकारात्मक मूल्यांकन किया। समाजवाद तथा कम्युनिज़्म की ओर रास्ता खोलने के लिए लाजमी बतौर, हिन्दोस्तानी राज्य के नवनिर्माण के इंक़लाबी कार्यक्रम की स्पष्ट तथा दिलेर प्रस्तुति को उन्होंने सराहा।

दलित तथा जातीय दमन के अन्य पीड़ितों की मुक्ति, यह एक ऐसे सवालों में था, जिसका अध्यक्षमंडल के द्वारा और स्पष्टीकरण किया गया। कॉमरेड लाल सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बड़ी बहुसंख्या में दलित सर्वहारा वर्ग के होते हैं। उन्हें मज़दूर बतौर और दलित बतौर भी शोषण-दमन का सामना करना पड़ता है। विद्यमान हिन्दोस्तानी राज्य एक ऐसे संस्थानों की प्रणाली है जिनका उद्देश्य है पूंजीवादी शोषण तथा पुराने दमनकारी रिश्तों के अवशेषों को बरकरार रखना। जातीय भेदभाव तथा दमन से मुक्ति का अटूट संबंध, पूंजीवादी शोषण तथा सामंतवादी दमन के अवशेषों से मुक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। श्रमिक वर्ग तथा सब जातियों तथा सम्प्रदायों के दबे-कुचले लोगों के लिए लाजमी है कि वे सभी प्रकार के शोषण का अंत करने के लिए वर्ग संघर्ष में हिस्सा लें। श्रमिक वर्ग के भीतर फूट डालने के लिए तथा उन्हें दिशाहीन करने के लिए पूंजीपति वर्ग झूठे सिद्धातों का प्रचार करता है, कि वर्गीय शोषण का अंत किये बिना तथा विद्यमान राज्य को उखाड़ फेंके बिना जातीय दमन की समस्या का हल हो सकता है। ऐसे गलत सिद्धंातों का हमें पर्दाफाश करना आवश्यक है।

नोटबंदी के बारे में सरकार जो प्रचार कर रही है, उसके बारे में कॉमरेड लाल सिंह ने कहा कि सरकार दिखा रही है कि यह आतंकवाद, कालाधन तथा भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक कदम है। सरकार के प्रचार का पूरा पर्दाफाश करना चाहिए। पूरी दुनिया को मालूम है कि अमरीकी साम्राज्यवाद ही आतंकवाद का स्रोत है। अपने वर्चस्व के नीचे एक धु्रवीय दुनिया स्थापित करने के लिए अमरीका ने ही तो आतंकवादी समूहों को बनाया है, “लोकतंत्र के लिए आंदोलन” खड़े किये हैं और विविध देशों में लश्कर के

द्वारा हस्तक्षेप भी किये हैं। जो भी सरकार आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ने में गंभीर है, वह अमरीकी साम्राज्यवाद का और दुनिया भर में उसकी आतंकवादी, जंगफरोश हरकतों का पर्दाफाश करेगी तथा विरोध करेगी। ऐसा करना तो दूर की बात है। इसके बजाय नरेंद्र मोदी सरकार तो रणनैतिक सहयोगी बतौर अमरीकी साम्राज्यवाद को गले लगा रही है।

जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल है, वह तो पूंजीवादी प्रणाली का अनिवार्य अंग है और राजकीय इज़ारेदारी पूंजीवाद के ज़माने में वह बहुत ही बड़े स्तर पर पहुंच गया है। सही बात तो यह है कि सबसे बड़ी हिन्दोस्तानी तथा विदेषी इज़ारेदारियों की अमिट लालच को पूरा करने के लिये नोटबंदी की गयी है। 

कॉमरेड लाल सिंह ने समझाया कि कोई भी हीरो इस प्रणाली को बदल नहीं सकता। सिर्फ लोग ही इंकलाब के ज़रिये इसे बदल सकते हैं। नये समाज के लिए लड़ने के लक्ष्य के साथ लोगों को अगुवाई देने के उद्देश्य से मज़दूर वर्ग को संगठित करने के लिए अपनी पार्टी सब कम्युनिस्टों के साथ काम करती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हम अपनी पार्टी के भीतर साफ-साफ और खुले दिल से जिस तरह चर्चा करते हैं, वह कम्युनस्टों को शोभा देता है। उसी प्रकार से हमें और पार्टियों के कम्युनिस्टों के साथ चर्चा करनी होगी।

इस बहुत उत्साहपूर्ण तथा सहभागितापूर्ण सत्र के बाद महाअधिवेशन ने एकमत से ड्राफ्ट रिपोर्ट को स्वीकार किया।

केंद्रीय समिति का चुनाव

केंद्रीय समिति के चुनाव का मुद्दा अजेंडा पर था। उसका परिचय कराते हुए अध्यक्षमंडल के प्रधान ने समझाया कि केंद्रीय समिति की क्या भूमिका होती है। केंद्रीय समिति की ज़िम्मेदारी है कि वह महाअधिवेशन के निर्णयों को लागू करे, न कि वह लाइन को बदले। एक नये महाअधिवेशन को बुलाये बिना लाइन को नहीं बदला जा सकता, क्योंकि सबसे ताकतवर समूह तो पार्टी की पूरी सदस्यता है। इसके बाद केंद्रीय समिति का चुनाव हुआ। केंद्रीय समिति की पहली परिपूर्ण सभा हुई, जिसमें कॉमरेड लाल सिंह को पार्टी का महासचिव चुना गया। इस सभा ने पार्टी के चार प्रवक्ताओं को भी चुना।

अंतिम सत्र

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अंतिम भाषण देने के लिए कॉमरेड लाल सिंह खड़े हुए। उन्होंने विश्वास जताया की नव-निर्वाचित केंद्रीय समिति एकजुटता के साथ काम करके अपनी ज़िम्मेदारी निभाएगी। उन्होंने कहा कि इंकलाब तब कामयाब होगा जब मज़दूर, किसान उसकी आवश्यकता के बारे में सचेत होंगे और वर्तमान परिस्थिति उनको स्वीकार्य नहीं होगी। हम कम्युनिस्टों के सामने चुनौती है मज़दूरों-किसानों को इंकलाब की ज़रूरत के बारे में सचेत करना।

हर तरह के नितांत अन्याय तथा भेदभाव पर आधारित इस शोषक तथा दमनकारी सामाजिक प्रणाली को उखाड़ फेंकने की कितनी ज्वलंत आवश्यकता है, इसके बारे में कॉमरेड लाल सिंह बहुत भावुक होकर बोले। यह किस प्रकार का समाज है, जिसमें दलित होने की वजह से लोगों को एक ही कुएं से पानी नहीं लेने दिया जाता और जहां महिलाओं को तथा लड़कियों को सबसे बदतर हिंसा और बेइज्जती का सामना करना पड़ता है? उन्होंने सब कॉमरेडों को ललकारा कि वे ऐसे नये समाज का निर्माण करने के लिए संघर्ष तेज़ करें जो शोषण रहित हो, जो जाति और धर्म पर आधारित हर प्रकार के दमन से मुक्त हो और जहां महिलाओं को सही मायने में मुक्ति हो।

महासचिव के समापन संबोधन के बाद प्रतिनिधियों ने अनेक भाषाओं में इंक़लाबी गीत गाये। अंतरराष्ट्रीय मजदूर वर्ग आंदोलन के इंक़लाबी गीत इंटरनेशनल के साथ महाअधिवेशन का समापन हुआ।

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पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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