बाबरी मस्जिद विध्वंस

Submitted by sampu on शुक्र, 16/12/2016 - 17:30

न्याय से वंचित चैबीस वर्ष

6 दिसम्बर, 2016 को कम्युनिस्ट व अन्य पार्टियों, मानव अधिकार संगठनों, मज़दूर संगठनों, महिला संगठनों व छात्र संगठनों के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दिये जाने की मांग को लेकर मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक एक ज़ोरदार व शानदार जुलूस निकाला।

लोक राज संगठन की पहल पर 25 से भी अधिक संगठनों ने मिलकर जुलूस व रैली को आयोजित किया व हिस्सा लिया।

 


6 दिसम्बर, 2016 को कम्युनिस्ट व अन्य पार्टियों, मानव अधिकार संगठनों, मज़दूर संगठनों, महिला संगठनों व छात्र संगठनों के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दिये जाने की मांग को लेकर मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक एक ज़ोरदार व शानदार जुलूस निकाला।

लोक राज संगठन की पहल पर 25 से भी अधिक संगठनों ने मिलकर जुलूस व रैली को आयोजित किया व हिस्सा लिया।

जुलूस में शामिल लोग बैनर और तख्तियां उठाये हुए थे, जिन पर इस जघन्य अपराध के लिये जिम्मेदार सत्ताधारियों को सज़ा दिलाने की मांगें रखी गयी थीं। “बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दें!”, “राज्य द्वारा आयोजित फिरकापरस्ताना हिंसा व आतंक के खिलाफ़ एकजुट हों!”, “एक पर हमला, सब पर हमला!” और “एक ऐसे समाज की रचना करें जो न्याय पर आधारित हो!”- ये जुलूस के मुख्य नारे थे। इस रैली की खूबी थी, इसमें भाग लेने वाले नौजवानों का उत्साह।

रैली जंतर-मंतर पर पहुंचने पर एक सभा में तब्दील हो गई।

सभा का संचालन लोक राज संगठन की कॉमरेड सुचरिता ने किया। अपने प्रारम्भिक भाषण में लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस. राघवन ने हर वर्ष दो दर्जन से भी अधिक संगठनों द्वारा इस दिन एकजुट होकर रैली करने के लिये सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे लोगों की एकता स्पष्ट रूप से दिखती है। आने वाले दिनों में इस एकता को और भी मज़बूत करने की ज़रूरत है। कांग्रेस पार्टी और भाजपा ने मिलकर लोगों की एकता तोड़ने के लिये बाबरी मस्जिद का विध्वंस आयोजित किया था। इस साजिश के खिलाफ़ और राजकीय आतंकवाद का अंत करने के लिये हम लोगों को लड़ना होगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि राज्य के हरेक तंत्र - कार्यपालिका, विधानपालिका और न्यायपालिका की सांठ-गांठ में लोगों के खिलाफ़ ऐसी हिंसाओं का आयोजन होता रहता है। अगर लोगों को राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिकता और आतंकवाद का अंत करना है तो उन्हें इसके स्रोत के खिलाफ़ एकजुट होना होगा। राज्य खुद ही अपने खिलाफ़ कार्यवाई नहीं करेगा। लोगों को स्वयं इस राज्य सत्ता के खिलाफ़ एकजुट होना होगा और एक नये राज्य के लिये संघर्ष करना होगा जिसमें न्याय और सभी के अधिकार सुनिश्चित होंगे।

उन्होंने लिब्राहन आयोग का उदाहरण दिया जिसे विध्वंस की जांच करने के लिये 16 दिसम्बर, 1992 को नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के कुछ ही महीनों के अंदर इसे अपनी जांच की रिपोर्ट पेश करनी थी। परन्तु देखने वाली बात यह है कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट 400 सत्रों और 16 वर्षों के बाद ही पेश की। इस जांच के दौरान बड़ी संख्या में गवाहियां ली गयीं थीं परन्तु गुनहगारों के खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की गयी।

उन्होंने भाजपा नेतृत्व में सरकार की नोटबंदी का हाल का उदाहरण दिया। सरकार ने इसकी सफाई यह कह कर दी कि इसका उद्देश्य व्यवस्था से काले धन को बाहर निकालना है ताकि ऐसे धन से की जाने वाली आतंकवादी हरकतों को धक्का दिया जाये। परन्तु, असलियत में, सरकार लोगों को ही आतंकवादी कहती है जब वे सरकार के खिलाफ़ आवाज़ उठाते हैं। कश्मीर, मणिपुर, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा दिल्ली सहित अनेक दूसरे राज्यों में नौजवानों सहित लोग सरकार की लोक-विरोधी कार्यवाइयों का विरोध करने के लिये रोज़ाना सड़कों पर उतर रहे हैं। सरकार के खिलाफ़ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दुनिया का असली आतंकवादी अमरीकी राज्य है जिसने इराक, सीरिया, अफग़ानिस्तान सहित विभिन्न देशों पर सैनिक हमले किये हैं। वह इन देशों में आतंकवादी हरकतें आयोजित करता है और फिर उन देशों के लोगों को ही ’आतंकवादी’ बताता है। वैश्विक तौर पर लोगों के खिलाफ़ किये जा रहे हमलों को खत्म करने का एक ही तरीका है, और वह है कि लोग आपस में भाईचारा बनाकर ऐसे दमन के खिलाफ़ लड़ें।

जमात-ए-इस्लामी हिन्द के मोहम्मद अहमद ने कहा कि पिछले 24 वर्षों से लोगों द्वारा लगातार मांग उठाने के बावजूद, बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों के खिलाफ़ कोई कार्यवाई नहीं की गयी है। लोग न्याय की मांग कर रहे हैं; पर इसकी जगह वे न्यायालय के बाहर कुछ समझौते की बात करते हैं। मुख्यतः हमें दो मांगें रखनी होंगी - कि न्यायालय इस मुद्दे पर कार्यवाई पूरी करे और गुनहगारों को कड़ी सज़ा देने का फैसला दे।

यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट के शाहिद अली ने ध्यान दिलाया कि जिन पार्टियों ने इस अपराध का आयोजन किया था, वे ऐसे बर्ताव करती हैं जैसे कि वे कानून से ऊपर हैं। जिस क्रम में घटनाएं घटी थीं उससे संविधान सहित पूरी व्यवस्था पर सवाल उठता है। राज्य साम्प्रदायिक है और हम, लोग साम्प्रदायिक नहीं हैं। हमें साज़िशों का निशाना बनाने के बावजूद, हमारा कर्तव्य है कि हम मिलकर साम्प्रदायिकता का मुकाबला करें।

सिटिजंस फॉर डेमोक्रेसी की तरफ से एन.डी. पंचोली ने सभी उपस्थित लोगों की सराहना की क्योंकि वे इतने वर्षों से न्याय की मांग उठाने में एक साथ हैं। इस देश के लोगों के खिलाफ़ घोर अन्यायों को उन्होंने देशद्रोह बतौर याद किया और 6 दिसम्बर की घटनाओं को उन्होंने हिन्दोस्तानी लोकतंत्र के लिये एक काला धब्बा बताया। उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों को आह्वान दिया कि वे न्याय के लिये संघर्ष का समर्थन करें। उन्होंने ध्यान दिलाया कि भाजपा और कांग्रेस पार्टी, दोनों ही इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। उन्होंने लोगों को बुलावा दिया कि वे अपनी आवाज़ बुलंद रखें जब तक कि अन्याय खत्म नहीं हो जाता है।

जन संघर्ष मंच, हरियाणा के अध्यक्ष कॉमरेड फूल सिंह ने रैली में शामिल सभी संगठनों व लोगों को क्रांतिकारी बधाई दी। उन्होंने हिन्दोस्तानी राज्य के आज़ादी और लोकतंत्र के दावों पर प्रश्न उठाये। इस राज्य के दमन से कोई भी सुरक्षित नहीं है। परन्तु लोग चुप नहीं रह रहे हैं; हम इसके विरोध में अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, मुझे विश्वास है कि भगत सिंह के दिखाये रास्ते पर चलकर लोग आज़ादी हासिल कर सकते हैं। सत्ता में बैठे लोगों के गुनाहों के खिलाफ़ हमें लगातार आवाज़ उठाते रहना है और एक शक्तिशाली आंदोलन खड़ा करना है। निष्कर्ष में उन्होंने कहा कि “हमारा समय आयेगा और हम कामयाब होंगे! मैं आप सभी को बधाई देता हूं। हमें संघर्ष के मोर्चे में आगे रहना होगा। धाराएं एक साथ आकर एक नदी बन रही हैं। अब ये साम्प्रदायिक शासक ज्यादा देर नहीं टिक पायेंगे। इंकलाब जिन्दाबाद!”

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के ए. सईद ने कहा कि हमारा देश एक भयंकर संकट से गुजर रहा है। धर्म के आधार पर हो रहे लोगों के दमन की उन्होंने निंदा की। कानून लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं करता है। बाबरी मस्जिद का विध्वंस और मुठभेड़ों में हत्याएं भी इस बात का स्पष्ट सबूत हैं। बाबरी मस्जिद का मुद्दा सिर्फ एक मस्जिद का मुद्दा नहीं है। इससे हमारे देश में ज़मीर के अधिकार पर और न्यायपालिका व कानूनी व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि शासकों ने अपने देश की गरिमा और आज़ादी को साम्राज्यवादी ताक़तों को समर्पित कर दिया है।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कॉमरेड प्रकाश राव ने इस तथ्य का अभिवादन किया कि विभिन्न संगठन, विचारधारा और आस्था के लोग रैली में मौजूद हैं और सभी अन्यायों के खिलाफ़ लड़ने के लिये एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस अपने देश के लोगों और आम तौर पर हिन्दोस्तानी समाज के दिल में चाकू घोप देने जैसा था। यह सिर्फ मुस्लिम आस्था पर ही हमला नहीं था। अपने लोगों पर इस निर्दयी हमले ने स्पष्ट रूप से दिखा दिया कि हिन्दोस्तानी राज्य साम्प्रदायिक और आतंकवादी है। हमें मौजूदा राज्य की जगह एक नया राज्य स्थापित करने की ज़रूरत है जो सभी की सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 32 वर्ष पहले 1984 में दिल्ली की सड़कों पर लोगों का खून बहा था। तब से इस तरह के कत्लेआम होते आये हैं। हमारे सामने सवाल यह है कि लोगों को एक नयी व्यवस्था के लिये लड़ने के लिये संगठित करके कैसे इस परिस्थिति को लोगों के हित में बदलें। हम लोगों को जगाने की कोशिश कर रहे हैं और राज्य अपनी पूरी कोशिश कर रहा है कि लोगों को बांट कर उन्हें सुला दिया जाये। मज़दूरों और किसानों का खून चूसा जा रहा है। हमें लोगों को सचेत करना है कि सरकारें बदल सकती हैं, सत्ताधारी पार्टियां बदल सकती हैं, परन्तु जब तक राज्य व्यवस्था बरकरार रहती है, लोगों का जीवन सिर्फ बद से बदतर ही होता जायेगा।

उन्होंने सभी को याद दिलाया कि लोगों का असली दुश्मन राज्य व्यवस्था है न कि यह या वह राजनीतिक पार्टी। उन्होंने अमरीकी राज्य की दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी बतौर कड़ी निंदा की, जो हिन्दोस्तानी लोगों को अपने पाकिस्तानी भाइयों व बहनों के खिलाफ़ भड़काने की कोशिश करता रहा है।

पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की ओर से मोहम्मद आरिफ ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने की ज़रूरत है कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस राज्य के साम्प्रदायिक होने का प्रतीक है। सत्ताधारियों के अजेंडे के आधार पर अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दोस्तानी लोग साम्प्रदायिक नहीं हैं बल्कि वे शांति चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोग चुप नहीं रहेंगे और न्याय के लिये आवाज़ उठाते रहेंगे।

ए.आई.एफ.टी.यू. (न्यू) के पी.के. शाही ने सवाल उठाया कि 1992 के और इसके पहले व बाद के हादसों के पीछे कौन है। उन्होंने कहा कि लोग मुद्दे को समझते हैं और जब तक हमारे देश के लोग एकजुट नहीं होते किसी भी समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को सोचना चाहिये कि देश कहां खड़ा है तथा न्याय के लिये लड़ने के लिये आगे आना चाहिये।

वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के एस.क्यू.आर. इलियास ने ध्यान दिलाया कि लिब्राहन आयोग ने साफ तौर पर स्थापित किया है कि विध्वंस योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। परन्तु लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट को कूड़े के डिब्बे में फेंक दिया गया है। जिन्होंने बाबरी मस्जिद के विध्वंस का संचालन किया था उनकी पदोन्नति हुई और उनमें से कुछ तो उप-प्रधानमंत्री भी बनाये गये हैं! उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह मुद्दा सिर्फ मुसलमानों का ही मुद्दा नहीं है और बहुत से लोगों ने इस पर अपनी आवाजें उठाई हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि पर बनायी गयी थी। इस झूठ को संघ परिवार ने फैलाया है। उस वक्त के प्रधानमंत्री, नरसिम्हा राव ने वादा किया था कि बाबरी मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होने दिया जायेगा। अतः भाजपा से भी ज्यादा कांग्रेस पार्टी इस दुःखद घटना के लिये जिम्मेदार है क्योंकि वह केन्द्र में सत्ता में थी।

यूनाइटेड सिख मिशन के बलजीत सिंह ने कहा कि 1992 का हादसा हुआ क्योंकि हम 1984 को रोक नहीं पाये। हमने तब भी नारा दिया है ’एक पर हमला, सब पर हमला!’ राज्य ही 1984 और 1992 के हादसों के पीछे था। तब हम इसी राज्य से न्याय कैसे मांग सकते हैं? हम साथ आकर शासन क्यों नहीं चला सकते? हम सबको साथ आकर इस देश पर राज करना चाहिये। हम वो हैं जो अपने लिए ही नहीं, दूसरों की आज़ादी के लिए भी लड़ते हैं। हम सभी के लिये सबसे अच्छा चाहते हैं। मेरा निवेदन है कि हम सब साथ आयें। अगर हम साथ नहीं आते तो ऐसे हमले बार-बार होंगे।

सी.पी.आई. (एम.एल.) न्यू प्रोलेतेरियन के का. शियोमंगल सिद्धांतकर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और भाजपा की निंदा करना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों को नकारना होगा। 1992 के लिये जिम्मेदार व्यक्तियों को इनाम दिये गये थे। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के हर कोने में कांग्रेस पार्टी और भाजपा दोनों, लोगों पर लगातार हमले करती हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगर हम लोगों को एकजुट नहीं करते तो ऐसे हादसे होते रहेंगे। रूसी क्रांति की शताब्दी को ध्यान में रखते हुए हमें अपने संघर्ष में आगे बढ़ना चाहिये।

पुरोगामी महिला संगठन की पूनम ने कहा कि न्याय पाने के लिये हम राज्य पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार ’लोकतंत्र’ की बात करती रहती है। लोकतंत्र का मतलब होता है लोगों का राज, लोगों के द्वारा और लोगों के लिये। परन्तु हमें मालूम है कि राज लोगों का नहीं है बल्कि पूंजीपतियों का है और सत्ताधारी पार्टियां उनकी मैनेजर होती हैं। बाबरी मस्जिद का विध्वंस रातों-रात किया गया था। सत्ताधारी पार्टियां बार-बार साम्प्रदायिक हिंसा आयोजित करती हैं। वही 1984, 2002 और अन्य बहुत से अपराधों के लिये जिम्मेदार हैं। हमारे देश में 150 बड़े इज़ारेदार पूंजीपति घरानों का राज है और सत्ताधारी पार्टियां उनके लिये काम करती हैं। हमें इस बात को समझने की ज़रूरत है कि आतंकवाद का स्रोत ऐसा राज्य होता है जो देश के लोगों की परवाह नहीं करता। इसके खिलाफ़ संघर्ष करने के लिये हमें एकजुट होना होगा।

ए.पी.सी.आर. के मोहम्मद अनवर ने कहा कि लोग न्याय मांग रहे हैं। बहुत से लोग नागरिक व मानव अधिकारों के लिये काम करते हैं। राज्य हमेशा लोगों को साम्प्रदायिक आधार पर बांटता है और इस या उस संगठन को आतंकवादी घोषित करता है। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर इस गुनहगार राज्य के खिलाफ़ लड़ना होगा।

ऑफ इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के अब्दुल राशिद अगवान ने कहा कि देश का संविधान आज़ादी, न्याय, बराबरी और भाईचारे के सिद्धांत पर आधारित है। परन्तु सच्चाई तो यह है कि बाबरी मस्जिद पर हमला तब शुरू हो गया था जब संविधान सभा की बैठक जारी थी और उसने इसके बारे में कुछ नहीं किया। अतः बाबरी मस्जिद का मुद्दा 24 वर्षों से ज्यादा पुराना है। यह एक मापदंड है जो दिखाता है कि देश आगे बढ़ रहा है कि पीछे जा रहा है। आज देश के हर कोने से लोग अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। यह वक्त का तकाज़ा है कि इस संघर्ष को जीवित रखा जाये। कुछ लोग बोलते हैं कि हमें बाबरी मस्जिद के मुद्दे को भूल जाना चाहिये परन्तु हमें इस न्याय की लड़ाई को जारी रखना होगा।

स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन के लईक अहमद ने कहा कि देश ने 1984 देखा, फिर 1992 और फिर 2003। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अगर हिंसा की इन घटनाओं के लिये भाजपा जिम्मेदार है तो कांग्रेस पार्टी भी उतनी ही जिम्मेदार है। उन्होंने एक नये राजनीतिक संघर्ष का आह्वान किया और कहा कि अगर गरीब, सत्ताहीन समुदाय, दलित और आदिवासी साथ आ जाते हैं तो वे इस देश की बहुसंख्या बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि सभी संगठन न्याय की मांग करते हैं परन्तु न्याय नहीं मिलता है क्योंकि अपराध करवाने वाले और नफ़रत फैलाने वाले सत्ता में बैठे हैं। एक नयी राजनीतिक व्यवस्था तभी स्थापित हो सकती है जब आज़ादी चाहने वाले एक साथ आयें।

नौजवान भारत सभा से विशाल ने कहा कि जब लोगों की मौत होती है तो फासीवादी ताक़तें घड़ियाली आंसू बहाती हैं। यह ज़रूरी है कि लोग एकजुट होकर एक करारा जवाब दें। हमें धर्म और जाति से ऊपर उठ कर लोगों के साथ खड़ा होना चाहिये।

अंत में कॉमरेड सुचरिता ने वक्ताओं के वक्तव्यों को सारांश में बताया। 24 वर्ष पहले जो हुआ था वह केन्द्र और प्रांत की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी और भाजपा ने किया था। यह दिखाता है कि हिन्दोस्तानी राज्य साम्प्रदायिक है। दूसरा, इतने सारे जांच पड़तालों और इतने वर्षों के बाद कुछ भी कार्यवाई नहीं हुई है। ऐसा इसलिये है कि राज्य ने ही अपराध का आयोजन किया था; यह अपने देश के लोगों पर एक राजकीय आतंक का काम था। राज्य द्वारा आयोजित आतंक का मकसद लोगों की एकता को तोड़ना और राज्य पर हावी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अजेंडे को आगे बढ़ाना होता है। हमें एक नये राज्य को स्थापित करने की ज़रूरत है जिसमें उन सभी को कड़ी सज़ा मिले जो लोगों के खिलाफ़ जघन्य अपराध करते हैं। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 24 वर्ष बाद, आज हमारा संदेश है, ’एक पर हमला, सब पर हमला!’, ’राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!’ और ’एक नये राज्य और समाज के संघर्ष में हमारी लगातार एकता ज़िन्दाबाद!’।

Tag:    चैबीस वर्ष    बाबरी मस्जिद विध्वंस    6 दिसम्बर    Dec 16-31 2016    Political-Economy    Communalism     2016   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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