डॉ. सुलभा ब्रह्मे के निधन पर शोक

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/12/2016 - 05:30

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी डॉ. सुलभा ब्रह्मे के 1 दिसम्बर, 2016 को हुए निधन पर गहरा शोक व्यक्त करती है। डॉ. सुलभा ब्रह्मे पुणे की एक अग्रणी राजनैतिक तथा सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उनकी उम्र 84 साल थी।

डॉ. सुलभा ब्रह्मे ने अपने क्रियाषील जीवन को मज़दूर वर्ग तथा सब शोषितों तथा दबे-कुचले लोगों की मुक्ति के कार्य में बिताया। अपनी अनेक पुस्तिकाओं तथा निबंधों के द्वारा उन्होंने हिन्दोस्तानी राज्य के अपराधी कृत्यों तथा नीतियों के ख़िलाफ़ विरोध व्यक्त किया। हिन्दोस्तानी राज्य के समाज-विरोधी, मज़दूर-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी तथा जन-विरोधी स्वभाव के बारे में श्रमिक जनता को जागृत करने में उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी बितायी। सत्ताधारी वर्ग द्वारा ज़बरन भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ लड़ रहे लोगों के साथ अपनी एकता जताने के लिए कुछ दिन पहले ही वे पुरंदर गयी थीं। उनके दुःखद निधन के चंद दिन पहले ही उन्होंने जो लेख लिखा था, उसमें उन्होंने केंद्र सरकार की नोटबंदी की नीति के फलस्वरूप कामकाज़ी लोगों पर जो भयानक प्रभाव पड़ा है, उसका वर्णन किया था।

हिन्दोस्तानी राज्य की विविध अनर्थकारी नीतियों के प्रभावों के बारे में उन्होंने विस्तार से लिखा था। कोंकण में स्थित कुख्यात एनरॉन प्रकल्प, डंकेल ड्राफ्ट, जैतापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र, हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिक दंगे, उदारीकरण तथा निजीकरण के ज़रिये वैष्वीकरण सहित बड़ी हिन्दोस्तानी कम्पनियों के हितों का संवर्धन करने वाली नीतियां - इन सबके ख़िलाफ़ उन्होंने अपनी आवाज़ बुलंद की थी। पुणे में अनेक प्रगतिशील जन संगठनों को उन्होंने स्थापित किया, स्थापित करने में हाथ बंटाया या समर्थन किया। इनमें शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय, लोक विज्ञान संगठन, लोकायत, जागतिकीकरण विरोधी कृति समिति, पुरोगामी महिला संगठन और लोक राज संगठन का समावेश है।

डॉ. ब्रह्मे सरगर्मी से स्थानीय भाषा, मराठी में लिखती थीं। उनका इरादा था कि महाराष्ट्र के दूर-दराज के इलाकों तक उनके विचार पहुंचें, ताकि वे हिन्दोस्तानी राज्य के जन-विरोधी तथा समाज-विरोधी स्वभाव के बारे में लोगों को जागृत करके उन्हें उसके ख़िलाफ़ लड़ने के लिए प्रेरित कर पायें।

डॉ. सुलभा ब्रह्मे के निधन से हमने एक निष्ठावान सामाजिक तथा राजनैतिक कार्यकर्ता को खोया है, जो अपने आख़री दम तक एक ऐसे समाज का निर्माण करने में व्यस्त थीं, जहां श्रमिक जनता के हाथों में सत्ता हो।

हमारे एक साथी के निधन पर हम गहरा शोक प्रकट करते हैं और उनके परिवार को शोक संदेश व्यक्त करते हैं।

डॉ. सुलभा ब्रह्मे को लाल सलाम!

Tag:    डॉ. सुलभा ब्रह्मे    निधन    Dec 16-31 2016    Popular Movements     Rights     2016   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)