परमाणु हथियारों पर रोक लगाने के विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ का महत्वपूर्ण प्रस्ताव

Submitted by sampu on मंगल, 12/01/2016 - 10:59

अधिकतम राष्ट्र और लोग शांति चाहते हैं, जंग नहीं!

अपने 71 वर्षों के इतिहास में पहली बार, संयुक्त राष्ट्र संघ ने 28 अक्तूबर को परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाली एक नयी संधि पर बातचीत शुरू करने के पक्ष में मतदान किया।

ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, मैक्सिको, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील ने इस प्रस्ताव को पेश किया। इससे कई हफ्तों पहले से, अमरीका और दूसरी प्रमुख परमाणु ताक़तों ने अन्य देशों पर खूब दबाव डाला, ताकि वे परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाले प्रस्ताव के खिलाफ़ मतदान करें। परन्तु उनकी कोशिशों के बावजूद, 123 मत इस प्रस्ताव के पक्ष में तथा 38 मत इसके खिलाफ़ थे, और यह प्रस्ताव पास हो गया। 16 देशों ने मतदान नहीं किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पांच परमाणु ताक़तों में से चार - ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमरीका - ने प्रस्ताव के खिलाफ़ मत दिया। चीन ने मतदान नहीं किया, जैसे कि हिन्दोस्तान और पाकिस्तान ने भी मतदान नहीं किया। जापान, जो परमाणु बम का प्रथम शिकार था, जिसकी जनता परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ़ लगातार अभियान चलाती रही है, उसने परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाले प्रस्ताव के खिलाफ़ मतदान किया। इस्राइल जो खुद ही एक अहम परमाणु शक्ति है, उसने मतदान नहीं किया। दक्षिण कोरिया ने उत्तरी कोरिया से परमाणु खतरे का बहाना देकर, मतदान नहीं किया। परन्तु इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि उत्तरी कोरिया, जिसके परमाणु कार्यक्रम की साम्राज्यवादी ताक़तें हमेशा निंदा करती हैं और “दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा” बताती हैं, उसने परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाले प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

“परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के मानव जाति पर भयानक परिणामों” पर चिंता प्रकट करते हुए, प्रस्ताव में कहा गया है कि अगले वर्ष के मार्च महीने में नयी संधि पर बातचीत शुरू की जायेगी। इस वर्ष के नवम्बर महीने के अंत में या दिसंबर महीने के आरम्भ में, संयुक्त राष्ट्र संघ की सम्पूर्ण आम सभा में मतदान के लिए इस प्रस्ताव के पेश किये जाने की उम्मीद है।

अमरीका के ओबामा प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र संघ के इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया और सभी दूसरे देशों, खास तौर पर उसके मित्र देशों, पर इसके खिलाफ़ मतदान करने का खूब दबाव डाला। जिनेवा में निरस्त्रीकरण के विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ की गोष्ठी में अमरीका के विशेष प्रतिनिधि राजदूत रोबर्ट वुड ने सवाल उठाया कि “जो राज्य अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों पर निर्भर है, वह परमाणु हथियारों को बदनाम और खत्म करने वाले समझौते में कैसे शामिल हो सकता है?” उन्होंने ऐलान किया कि “परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाले समझौते से इस इलाके की सुरक्षा को खतरा होगा”।

इस प्रस्ताव पर मतदान से यह स्पष्ट होता है कि कई प्रमुख साम्राज्यवादी देश - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य व अन्य - बड़ी सरगर्मी के साथ अपने परमाणु और गैर-परमाणु हथियारों के भंडारों को बढ़ा रहे हैं तथा जंग की तैयारी कर रहे हैं। इसीलिये वे परमाणु हथियारों पर रोक लगाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ़ हैं। हिन्दोस्तानी शासक वर्ग, जो दुनिया की अगुवा साम्राज्यवादी ताक़तों के साथ मिलकर ऊंचे मंच पर बैठने की अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने में लगा है, वह भी अपनी परमाणु ताक़त को बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहा है, और दुनिया की कुछ अगुवा परमाणु ताक़तों के साथ समझौते कर रहा है। परन्तु अधिकतम राष्ट्रों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया के अधिकतम लोग साम्राज्यवादी ताक़तों द्वारा जंग की तैयारियों और जंगफरोशी, परमाणु जंग और वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के विनाश के खतरे का डटकर विरोध कर रहे हैं।

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