शहीदे आजम भगत सिंह का 109वां जन्मदिवस

Submitted by sampu on रवि, 16/10/2016 - 04:30

इंकलाब की गूंज जारी है...

शहीदे आजम भगत सिंह के 109वें जन्म दिवस के अवसर पर, राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के गांव रामगढ़ में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लोक राज संगठन, हिन्द नौजवान एकता सभा, लोक जन समिति और रामगढ़ सेवा समिति के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें हजारों की संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं, नौजवानों, महिलाओं और बुजुर्गों ने हिस्सा लिया।

सभा की शुरुआत में अध्यक्षमंडल की तरफ से भगत सिंह की तस्वीर के सम्मुख पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही, पूरा रामगढ़ गांव ‘इंकलाब ज़िन्दाबाद!’, ‘साम्राज्यवाद-पूंजीवाद मुर्दाबाद!’ तथा ‘समाजवाद ज़िन्दाबाद!’ के नारों से गूंज उठा।

इसके बाद, एक के बाद एक, नौजवानों और बच्चों ने क्रांतिकारी गीतों पर नृत्य पेश किये और कई लड़के-लड़कियों ने क्रांतिकारी कविताएं सुनाईं। साथ ही नौजवानों, महिलाओं और लड़कियों ने जोशीले भाषणों से सभा में जोश के वातावरण को दोगुना बना दिया। कार्यक्रम इतना मनमोहक था कि लोग पंडाल में अंत तक जमे रहे। इसलिए यह सभा शाम 6 बजे से रात 11.30 तक चलती रही।

कार्यक्रम का संचालन कामरेड अशोक और ओम प्रकाश सांगर ने किया। उन्होंने अपने गीतों और कविताओं से उपस्थित लोगों का जोश बनाये रखा।

हिन्द नौजवान सकता सभा के प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुये कहा कि हमारे देश के नौजवानों के दिलों में करतार सिंह सराभा और भगत सिंह आज भी ज़िन्दा हैं। समाज की नाइंसाफी के खिलाफ़, राजकीय आतंक के खिलाफ़, शोषण के खिलाफ़, जातीय-उत्पीड़न के खिलाफ़, हमारे देश के अनगिनत नौजवानों का आगे आकर संघर्ष करने का लंबा इतिहास है। शासक वर्ग नहीं चाहता है कि मजदूर, किसान, उत्पीड़ित जनता और नौजवान, देश में बढ़ते बेतहाशा शोषण-दमन के खिलाफ़ आवाज़ उठायें। हमारे शासक वर्ग बार-बार प्रचार करते हैं कि हिन्दोस्तान दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इस पर गर्व करना चाहिए। जबकि असलियत हम सभी जानते हैं यह लोकतंत्र और चुनाव कितना फरेब है!

इस बढ़ते शोषण-दमन की पूंजीवादी व्यवस्था से देश को मुक्त करना होगा। सिर्फ मजदूर-किसान का राज ही मजदूरों, किसानों और मेहनतकशों को सुख, सुरक्षा और खुशहाली दे सकता है। आओ हम संगठित हों, हुक्मरान बनें और समाज को बदल डालें।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के वक्ता ने आयोजकों को बधाई देते हुये कहा कि भगत सिंह ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्हें हमारे दुश्मनों को भी मानने को मजबूर होना पड़ता है। शहीद भगत सिंह हिन्दोस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नौजवानों के आदर्श हैं।

उन्होंने आगे बताया कि आज हमारे शासक वर्ग और उनकी इजारेदार मीडिया हिन्दोस्तान-पाकिस्तान के लोगों बीच में नफ़रत का ज़हर फैला रहे हैं। हुक्मरान पूंजीपति वर्ग देश के लोगों का राजकीय आतंकवाद के ज़रिये बर्बर दमन करते हैं। जब राजस्थान के किसान पानी की मांग को लेकर संघर्ष करते हैं, उनके संघर्ष को लाठियों-गोलियों से सरकार द्वारा दबाया जाता है। लोगों पर राजकीय दमन और आतंक का प्रचार मीडिया नहीं करती है।

उन्होंने कहा कि उपनिवेशवादी राज्य में 30 करोड़ हिन्दोस्तानियों पर 50 हजार अंग्रेज राज करते थे। आज भी उसी तरह 125 करोड़ हिन्दोस्तानियों पर 2 लाख पूंजीपति सिर्फ 150 इजारेदार घरानों की अगुवाई में राज करते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि एकजुट होकर, मजदूर वर्ग की अगुवाई में हिन्दुस्तान ग़दर पार्टी और भगत सिंह के बताये रास्ते पर चलकर, इस पूंजीवादी शोषण-दमन की व्यवस्था का उन्मूलन करके, एक नये हिन्दोस्तान का निर्माण करना होगा, उन्होंने आह्वान किया।

लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा ने कहा कि यह आज़ादी झूठी है। यह आज़ादी सिर्फ चंद अमीरों की आज़ादी है। इसलिये आज भी कश्मीर में हिन्दोस्तानी राज्य सैकड़ों लोगों और बच्चों का कत्ल करता है। कश्मीर में संघर्ष को आतंकवाद पर जंग के बहाने दबाते हैं। कश्मीर की समस्या राजनीतिक है लेकिन उस समस्या को कानून की समस्या बताकर वहां फौज़ी राज कायम कर रखा है। हमारे हुक्मरान अपने राज को चलाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते हैं।

हिन्दोस्तान-पाकिस्तान के बीच रोज ही जंग करने का प्रचार करते हैं। जंग सिर्फ हमारे शासक वर्ग के हित में है। जंग में हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के मजदूरों-किसानों के बच्चे ही बलि पर चढ़ेंगे।

आज हिन्दोस्तान एक खतरनाक स्थिति में है। एक तरफ तो जंग का माहौल बनाया जा रहा है दूसरी ओर मजदूरों-किसानों के संघर्ष को राजकीय आतंकवाद के तहत दबाया जा रहा है। कश्मीरियों के संघर्ष को आतंकवाद के नाम और आदिवासियों के संघर्ष को माओवादी बताकर कुचला जा रहा है। छात्रों और नौजवानों के संघर्ष को राजद्रोह के नाम पर दबाया जाता है। इसीलिये भगत सिंह ने कहा था कि गोरे अंग्रेज चले जायेंगे मगर काले अंग्रेज राज करेंगे।

हमारे शहीदों और ग़दरियों का पैग़ाम था ‘हम हैं इसके मालिक हिन्दोस्तां हमारा’, यह नारा बहादुर शाह जफ़र ने दिया था। ग़दरियों और शहीदों के सपनों को साकार करने के लिये हमें लोक राज के लिये संघर्ष करना होगा और लोगों को देश का मालिक बनाना होगा।

जनसभा को संबोधित करने वालों में शामिल थे - शिक्षा कमेटी रामगढ़ के अध्यक्ष काशी राम साहू, मोहन लाल, मैनपाल सोखल, सत्यनारायण भांभू, रोहताष थोरी, हिन्द नौजवान एकता सभा के राजस्थान सचिव दिनेश स्वामी व ओम प्रकाश सहारजा, कन्हैया लाल जैन, बनी राम लकेसर, लोक जन चेतना कमेटी के अध्यक्ष बलवन्त भांभू व कोषाध्यक्ष राममूर्ति, का. ओम प्रकाश सर्दू, सुभाष स्वामी, डा. बलवीर खीचड, मनोज शर्मा, का. ओमप्रकाश साहू आदि।

जनसभा का समापन ‘इंकलाब ज़िन्दाबाद!’, ‘समाजवाद ज़िन्दाबाद!’, ‘पूंजीवाद-मुर्दाबाद!’, ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’ के नारों के साथ हुआ।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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