महाराष्ट्र आंतरिक सुरक्षा कानून के खिलाफ़ संघर्ष तेज़ करना होगा!

Submitted by sampu on रवि, 16/10/2016 - 04:30

माननीय संपादक महोदय,

मजदूर एकता लहर के सितंबर 1-15, 2016 के अंक में प्रस्तावित महाराष्ट्र आंतरिक सुरक्षा कानून के बारे में लेख पढ़ा। इस लेख में बखूबी समझाया गया है कि इस तरह के कानून जारी करने के पीछे राज्य का उद्देश्य है - सरकार की जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ जन संघर्षों को कुचलना। लेख के अंत में निष्कर्ष भी बेहद सरल शब्दों में लिखा गया है कि चूँकि अपने देश की सत्ता बड़े सरमायदारों के हाथों में है, उस राज्य सत्ता के अधिकार बढ़ाने वाले सभी कदम सरमायदारों के हित में एवं मेहनतकशों के खिलाफ़ होंगे।

महाराष्ट्र सरकार की उस कोशिश के खिलाफ़ जब समाज के अलग-अलग तबकों से तीखा विरोध हुआ, तब मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव को रोकने की घोषणा करनी पड़ी, ऐसा प्रसार माध्यमों में रिपोर्ट किया गया है। मगर इस खुशफहमी में अगर श्रमिकों के संगठन एवं मानव अधिकार संगठन काले कानूनों के खिलाफ़ अपना संघर्ष ठंडा करेंगे तो गलती होगी।

ख़बर आई है कि महाराष्ट्र के तुरंत बाद, गुजरात की सरकार भी गुजरात आंतरिक सुरक्षा कानून विधेयक को आने वाले बजट सत्र में पेश करने वाली है। यह विधेयक भी लगभग महाराष्ट्र आंतरिक सुरक्षा कानून के जैसा ही है। खबरों के मुताबिक, इस विधेयक में भी वही प्रावधान हैं कि केवल शक के आधार पर पुलिस किसी भी नागरिक को इस कानून के तहत गिरफ्तार कर सकती है और इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत नहीं मिल सकती। हालांकि यह कानून अब तक जारी नहीं हुआ है, मगर फिर भी गुजरात सरकार और पुलिस की नीतियों के खिलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों और सभाओं के लिये अनुमति देने से इंकार कर रही है।

कुछ ही दिन पहले, मुंबई में स्थित रेलवे कर्मचारियों को प्रशासन ने एक नोटिस जारी करके धमकाया था कि अगर रेलवे कर्मचारी सरकार-विरोधी प्रदर्शन करेंगे तो उन पर कड़ी कार्यवाही होगी। फिर चाहे, यह विरोध प्रदर्शन, ईमेल, वाट्सएप या फेसबुक के ज़रिये ही क्यों न हो!

अब 10 अक्तूबर को कई अख़बारों में यह रिपोर्ट आयी है कि जो सरकारी कर्मचारी हैं, उन पर सरकारी कर्मचारी होने के कारण यह पाबंदी है कि वे सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना किसी भी माध्यम - ईमेल, वाट्सएप, एस.एम.एस. या फेसबुक या लिखित तौर पर नहीं कर सकते हैं। यह फतवा वित्त मंत्रालय ने जारी किया है!

इसका मतलब स्पष्ट है कि हमें अपना संघर्ष और तीखा करना होगा।

आपका

अमित कुमार, मुंबई

Tag:    काले कानूनों    जन-विरोधी    Oct 16-31 2016    Letters to Editor    Privatisation    2016   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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