‘आइये अपने शहीदों को जानें’ विषय पर सभा

Submitted by sampu on रवि, 16/10/2016 - 04:30

28 सितम्बर, 2016 को हरियाणा के जिला फतेहाबाद की जाखल तहसील के डी.ए.वी. स्कूल में जन चेतना मंच की ओर से शहीद भगत सिंह के 109वें जन्म दिवस के अवसर पर एक सभा आयोजित की गई।

सभा में राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार, अध्यापक, नौजवान, महिलाएं, लड़के और लड़कियां शामिल हुये।

सभा की शुरुआत में डी.ए.वी. स्कूल के बच्चों ने स्वागत गीत गाया। जिसके बाद हिन्दोस्तान के शहीदों पर आधारित एक प्रस्तुति पेश की गई जिसे उपस्थित लोगों ने बड़ी उत्सुकता से देखा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य नीरज शर्मा ने की।

सभा का संचालन करते हुये, मास्टर बृजपाल जिंदल ने लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, हमें गर्व है कि शहीद भगत सिंह और उनके जैसे सैकड़ों क्रांतिकारी शहीदों, जो कई दशकों से नौजवानों के आदर्श रहे हैं, के लेखों पर आधारित एक किताब का विमोचन आज हम कर रहे हैं।

इस अवसर पर देश की राजनीतिक और आर्थिक हालत पर चिंतन करते हुये कई वक्ताओं ने अपनी बातों को रखा।

वक्ताओं ने बताया कि शहीद भगत सिंह एक क्रांतिकारी और समृद्ध परिवार से थे। वे चाहते तो अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर सकते थे। लेकिन उन्होंने देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिये अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने बताया कि भगत सिंह को शहीदे आज़म इसलिये कहा जाता है कि क्योंकि उन्होंने फांसी का फंदा चूमा था। वे हिन्दोस्तान में समाजवाद स्थापित करना चाहते थे। उनका एक शोषण-विहीन समाज की स्थापना का सपना था, जो आज भी अधूरा है।

सभा के मुख्य वक्ता, लोक राज संगठन के साथी ने बताया कि हिन्दोस्तान में कश्मीर से कन्याकुमारी तक व पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों और उनकी शहादत को सलाम करते हैं। ब्रिटिश साम्राज्यवादी हों या हिन्दोस्तान के शासक वर्ग, दोनों ने ही उनको बदनाम करने की बहुत कोशिश की, लेकिन असफल रहे। उनके क्रांतिकारी विचारों को लोगों के दिलों से निकाल पाने में ये नाकाम रहे, इसलिये तो हुक्मरान वर्ग ने उनको अपना लिया। आज शासक हुक्मरान वर्ग भगत सिंह की मूर्ति की पूजा कर रहा है। ऐसा भगत सिंह खुद नहीं चाहते थे। शासक वर्ग और उनकी पार्टियां चाहती हैं कि गीता, कुरान, बाइबल की तरह उनको पूजा जाये। उनके क्रांतिकारी विचार और दिशा पर विचार-विमर्श से देश के मेहनतकशों और नौजवानों को दूर रखा जाये। हिन्दुस्तान ग़दर पार्टी और भगत सिंह ने कहा था कि आज़ादी के बाद सत्ता अंग्रेजों के हाथों से निकलकर काले अंग्रेजों के हाथों में चली जायेगी। आज प्रत्यक्ष हमारे सामने है।

उन्होंने बताया कि देश की शिक्षा नीति, वही शिक्षा नीति है, जिसे अंग्रेज अधिकारी मैकाले ने बनाया था। उसने सिद्धांत पेश किया था कि अंग्रेजों को लम्बे समय तक राज करना है तो हिन्दोस्तानियों को सिर्फ क्लर्क बनने की शिक्षा दी जानी चाहिये जो अंग्रेजी राज की सेवा कर सके। वह शिक्षा नहीं दी जानी चाहिये, जिससे हिन्दोस्तानी अपना दिमाग इस्तेमाल कर सकें। आज़ादी के बाद भी मैकाले की दिशा वाली शिक्षा नीति जारी है। ऐसा इसलिए कि हमारे देश के बच्चे और नौजवान ये सवाल न उठायें कि हम गरीब क्यों हंै? हमारे पास रोज़गार क्यों नहीं है? क्यों किसान आत्महत्या करते हैं? मजदूरों को मेहनत के बदले जीवन-जीने लायक वेतन क्यों नहीं मिलता है? देश की महिलाएं असुरक्षित क्यों हैं? देश में भूख से लोग क्यों मरते हैं?

उन्होंने कहा कि आज हमारे शासक वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों व सेवाओं आदि का निजीकरण कर रहे हैं। अध्यापक जो देश का भविष्य बनाते हैं, ठेके पर हैं। सरकार का कहना है कि देश की आवाम की देखभाल, सुख-सुरक्षा रखना उसका दायित्व नहीं है। ऐसा करने में सभी ससंदीय पार्टियां शामिल हैं, चाहे उन पार्टियों के झंडों का रंग कोई भी हो। इन पार्टियों का काम है लोगों को सत्ता से दूर रखना। लोक राज संगठन का मानना है कि लोगों के नाम पर पार्टियां राज नहीं कर सकती हैं। पार्टियों का काम है कि जनता को राज करने के काबिल बनाना व उनको दिशा देना, ताकि जनता खुद राज करने के काबिल बन सके। उम्मीदवार का चयन करने का अधिकार, चुनने और चुने जाने का अधिकार, जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार, नीति-निर्धारण करने का अधिकार लोगों की समितियों को देना होगा। यही राजनीतिक पार्टियों की आधुनिक परिभाषा हो सकती है। तब ही हम शहीद भगत सिंह और ग़दरियों के सपने को साकार कर सकते हैं।

सभा के अंत में किताब ’आइये अपने शहीदों को जानें’ का विमोचन हुआ और लोक राज संगठन को शहीद भगत सिंह की तस्वीर से सम्मानित किया गया साथ ही साथ कई गणमान्य व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।

सभा को संबोधित करने वालों में थे - हरियाणा सर्वदलीय कमेटी के चेयरमैन नवनीत शर्मा, सरपंच सुरेन्द्र मित्तल, हरीश गर्ग, हर्मेश शर्मा, अरुण गुप्ता, डा. राजेश शर्मा, जरनैल सिंह भंगू, डा. यादविंद्र शर्मा, बाबू राज कुमार, तहसीलदार महावीर सिंह, संस्था चेयरमैन करनैल सिंह खिप्पल और जन चेतना मंच के बी.पी. आदीवाल आदि।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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