होंडा मजदूरों का दृढ़ संघर्ष जारी है

Submitted by sampu on रवि, 16/10/2016 - 04:30

होंडा मोटर साइकिल एंड स्कूटर (एच.एम.एस.आई.) के राजस्थान के टपूकड़ा प्लांट के प्रबंधन द्वारा श्रम विभाग, पुलिस, भाड़े के गुंडों और सरकार के साथ सांठगांठ में किये जा रहे गुनाहों और मजदूर-विरोधी कार्यवाहियों के खिलाफ़, इन्साफ के लिए होंडा के मजदूरों का दृढ़ संघर्ष राजधानी दिल्ली तक पहुँच गया है। होंडा के मजदूर अपनी जायज़ मांगों को लेकर, लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

मजदूर एकता लहर के संवाददाता ने अनशन पर बैठे मजदूरों और मजदूर नेताओं के साथ मुलाकात की। इसमें शामिल है कामरेड सतीश नैन, कामरेड दिलीप, कामरेड अलोक कुमार सिंह, और कामरेड संजय देव कांबले। अपनी यूनियन बनाने की कोशिश के चलते 3000 मजदूरों की गैर-कानूनी बर्खास्तगी के खिलाफ़ होंडा के मजदूर 19 सितम्बर, 2016 से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे थे। करीब 19 दिन से लगातार हड़ताल के बाद, कुछ मजदूरों की हालत बहुत गंभीर हो गयी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अन्य मजदूरों ने अपना संघर्ष जारी रखा और तुरंत क्रमिक हड़ताल शुरू कर दी।

होंडा के मजदूर अपने संघर्ष को लेकर दृढ़ हैं। वहां उपस्थित मजदूरों ने अपने संघर्ष का अनुभव सांझा किया। उन्होंने बताया कि उनका संघर्ष काफी लम्बा और मुश्किल हो सकता है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि अंत में जीत उनकी ही होगी। भूख हड़ताल के दौरान, कई मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल होंडा के मजदूरों से मिलने आये और उनके संघर्ष के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता प्रकट की।

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के अलावा, इन मजदूरों ने अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूरों और होंडा कंपनी के बनाये गये मोटर साइकिल और स्कूटर खरीदने वाले ग्राहकों तक पहुँचने के लिए कई नए तरीके अपनाये हैं। फरवरी 2016 में बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी करने के बाद कंपनी के प्रबंधन ने गैर-कानूनी तरीके से उत्पादन शुरू करने के लिए अन्य राज्यों से मजदूरों की ठेके पर भर्ती की। ये मजदूर कम से कम वेतन पर भर्ती किए गए और इनके पास पर्याप्त ट्रेनिंग भी नहीं है। इसकी वजह से कंपनी में बनाये जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता में गिरावट देखी गयी है। ग्राहकों के सामने इस बात को उजागर करने के लिए होंडा मजदूरों ने 5 अक्तूबर को 13 राज्यों में होंडा मोटर्स के शोरूमों पर प्रदर्शन किये। ये राज्य हैं - राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल, आदि। हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने बताया कि देशभर के कई होंडा शोरूम और वर्कशॉप से मेंटेनेंस और रिपेयर के मामलों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट आई है। इसी तरह का अभियान इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी आयोजित किया गया है। मजदूरों ने ग्राहकों को आगाह किया है कि होंडा कंपनी दिवाली के मौके पर डिस्काउंट के नाम पर खराब दर्जे के उत्पाद बेचने की कोशिश कर रही है, ताकि लाखों की तादाद में जमा खराब दर्जे का माल किसी तरह खाली किया जा सके।

हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने बताया कि वे केवल अपनी यूनियन बनाने और इज्ज़त के साथ काम करने के अधिकार के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। जब हमारे मजदूर साथियों पर हमला किया जाता है, उन्हें बेइज्ज़त किया जाता है तो हम कैसे चुप बैठ सकते हैं, फिर वे मजदूर साथी स्थायी हों, ठेका मजदूर हों या कैजुअल मजदूर हों। उन्होंने कहा, सरकार और पुलिस बेशर्मी से हमारे अधिकारों की हिफाज़त के लिए बने कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं।

अपने संघर्ष के बारे बताते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने तमाम विभागों के मजदूरों को एक साथ मिलाकर 6 अगस्त, 2015 को अपनी यूनियन बनाने के लिए ट्रेड यूनियन के रजिस्ट्रार को अर्जी दी थी। इस अर्जी पर 227 मजदूरों के दस्तखत थे। इसके अलावा, कैजुअल मजदूर, प्रशिक्षु और ठेका मजदूरों ने इसका पूरा समर्थन किया था। तमाम श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए श्रम विभाग ने हमारे यूनियन बनाने के अधिकार से हमें वंचित किया है। आज एक साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक हमारी अर्जी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जबकि, इसी श्रम विभाग ने एक अन्य यूनियन को 15 दिनों से कम समय में मान्यता दी, क्योंकि उस यूनियन को प्रबंधन का समर्थन है, जिसका मकसद है मजदूरों की एकता को तोड़ना। इससे यह साफ नज़र आता है कि सरकार और श्रम विभाग पूरी तरह से होंडा के मालिक इजारेदार पूंजीपतियों के साथ हैं।

मजदूरों की आवाज़ को दबाने के लिए प्रबंधन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष धमकी और कार्यवाही सहित तमाम तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रहा है। हाल में, ऐसे ही एक मामले में प्रबंधन ने विजेंद्र कुमार, जो कि एक स्थायी मजदूर है, उसे फेसबुक पर टपूकड़ा प्लांट के मजदूरों के समर्थन में एक चित्र को “लाइक” करने के लिए 24 सितंबर को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया। इसी तरह से प्रबंधन ने प्लांट में जगह-जगह पर नोटिस चिपकाया है कि यदि कोई फरवरी 2016 में निलंबित किये गये 2500 मजदूरों के समर्थन में कोई भी कार्यवाही करता है या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

मजदूरों ने बताया कि वे प्रबंधन के साथ एक न्यायोचित समझौते व बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रबंधन देश के कानून का उल्लंघन कर रहा है और मजदूरों के सम्मान पर हमला कर रहा है। वह मजदूरों के खिलाफ़ झूठे आरोप लगाकर, उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तार कराकर प्रताड़ित कर रहा है। ऐसे ही एक मजदूर कामरेड कृष्णा को 38 दिनों के लिए झूठे आरोप में जेल में रहना पड़ा।

यह विदित है कि 2005 में जब होंडा मोटर्स के गुड़गाँव प्लांट के मजदूरों ने वेतन, निलंबित किये गए मजदूरों को वापस लेने और अपनी यूनियन बनाने के अधिकार के लिए आवाज़ उठाई थी तो पुलिस ने उन पर वहशी हमला किया था, जिसमें कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे। मजदूरों पर पुलिस की इस बर्बरता के चित्र जब टीवी पर दिखाये गये तो पूरा देश दहल उठा।

राजस्थान-हरियाणा सीमा पर, अलवर राजस्थान में टपूकड़ा स्थित होंडा मोटर्स के प्लांट पर मजदूरों का पुलिस और प्रबंधन के भाड़े के गुंडों के साथ जबरदस्त टकराव चल रहा है। 16 फरवरी को सभी श्रेणियों के मजदूर - स्थायी, अस्थाई, प्रशिक्षु और ठेका मजदूरों ने मिलकर फैक्ट्री के अन्दर सिट-इन हड़ताल कर दी। इसका तात्कालिक कारण यह था कि पेंटशॉप में एक एग्जक्युटिव इंजीनियर ने एक ठेका मजदूर पर शारीरिक हमला किया था और वह मजदूर बीमार था, उसे लगातार चैथे दिन ओवर टाइम करने को मजबूर किया जा रहा था। पेंटशॉप में उस मजदूर पर शारीरिक हमले के तीन दिन बाद, 19 फरवरी को होंडा मोटरसाइकिल और अन्य फैक्ट्रियों के 3000 से अधिक मजदूरों ने गुड़गांव स्थित होंडा के मुख्य कार्यालय पर धरना दिया। उन्होंने मांग की कि उनकी तमाम लंबित मांगों को पूरा किया जाये, जिसमें शामिल है ठेका मजदूरी को खत्म करना, काम करने के हालात को सुधारना और मजदूरों के आत्म-सम्मान पर हमले बन्द करना। अपनी मांगों पर चर्चा करने के लिये मजदूर नेता प्रबंधन से मिले तो पुलिस और गुंडों ने नेताओं को बंदी बना लिया। पुलिस और गुंडों ने उपस्थित मजदूरों को धमकी दी कि वे यहां से तुरंत चले जायें। मजदूरों ने पुलिस से मांग की कि हमारे यूनियन के नेताओं को हमारे सामने लाया जाये। राजस्थान और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टुकड़ी ने साथ मिलकर सरासर गैर-कानूनी तरीके से गुंडों का इस्तेमाल करते हुए मजदूरों पर लाठी-चार्ज किया। बहुत से मजदूरों का सिर फोड़ दिया गया और उन्हें घायल कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने मजदूरों पर फर्ज़ी केस लगाये हैं और उन्हें जेलों में बंद करके यातनायें दे रहे हैं।

अपनी इस हड़ताल के ज़रिये होंडा के मजदूर पूरे देश के मजदूरों के सामने अपने संघर्ष को ले जाने में कामयाब हुए हैं। अब उन्होंने अपना संघर्ष क्रमिक हड़ताल के रूप में टपूकड़ा प्लांट से जारी रखने का फैसला किया है और साथ ही अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में मजदूर संगठनों के साथ मिलकर संघर्ष चलाने की योजना बना रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है सभी निलंबित मजदूरों की नौकरी बहाल करना और पुलिस द्वारा लगाये गए तमाम झूठे इल्जाम वापस लेना।

संघर्ष कर रहे मजदूरों ने एक पर्चा जारी किया है जिसमें उन्होंने उनके प्रचार, प्रदर्शन और कार्यक्रमों में शामिल होने और योगदान देने का बुलावा दिया है।  

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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