नोहर में गांववासियों के एकजुट संघर्ष की जीत

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:23

19 दिसम्बर, 2016 को दिल्ली-गंगानगर मेगा हाई-वे पर नोहर-भादरा के बीच मुंशरी के पास गांववासियों ने निजी कंपनी रिडकोर द्वारा स्थापित टोल प्लाजा को घेर लिया। टोल प्लाजा द्वारा आस-पास के गांवों के वाहनों से टोल-टैक्स वसूलने के विरोध में हजारों की संख्या में गांववासियों ने अपने-अपने वाहनों के साथ टोल प्लाजा के पास मेगा हाई-वे को बंद करके अपना विरोध प्रकट किया।

 

इस विरोध संघर्ष का नेतृत्व लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष का. हनुमान प्रसाद शर्मा व माकपा नेता का. बलवान पुनिया ने किया। दो-ढाई घंटे तक टोल प्लाजा के बंद रहने के बाद भादरा के तहसीलदार व गोगामेड़ी के थाना प्रभारी पुलिस बल लेकर वहां पहुंचे और बंद को खुलवाने की कोशिश की। परन्तु आन्दोलनकारियों ने कहा कि जब तक आस-पास के गांवों के वाहनों को टोल टैक्स देने से छूट नहीं दी जाती है, तब तक हम नहीं हटेंगे।

लोगों के आक्रोश से डरकर और तनाव को बढ़ते देखकर प्रशासन ने रिडकोर कंपनी के मैनेजर से फोन पर बात की। मैनेजर ने मौके पर अपने अधिकारी को भेजा। प्रशासन ने आन्दोलनकारियों और रिडकोर कंपनी के अधिकारी के बीच वार्ता करवाई। कंपनी ने यह मान लिया कि आस-पास के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले गांवों के वाहनों से टोल टैक्स नहीं लिया जायेगा। मौके पर ही इसके लिये लिखित आदेश जारी किये गये। इसके बाद प्रदर्शन को खत्म कर दिया गया।

टोल प्लाजा के बंद के दौरान एकत्रित गुस्साये लोगों ने सरकार और पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ नारे लगाये। वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुये केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें सरमायदारों की वफादार हैं व किसानों और मजदूरों की विरोधी हैं।

Tag:    Jan 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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