बैंक कर्मचारियों का प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:24

राज्य द्वारा नोटबंदी की वजह से बैंक कर्मचारियों पर दिन-ब-दिन काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से कर्मचारियों को रातों-दिन काम करना पड़ रहा है। इन हालतों में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्तमंत्री अरुण जेटली और रिज़र्व बैंक यह आरोप लगा रहे हैं कि बैंकों में पर्याप्त मात्रा में कैश है परन्तु बैंक कर्मचारी अपने खास ग्राहकों को करोड़ों-करोड़ों रुपये चोरी से दिला रहे हैं और आम जनता को बता रहे हैं कि बैंक में पैसा नहीं है।

 

इन आरोपों का खंडन करने के लिये, बैंक यूनियनों व कर्मचारियों ने 15 दिसम्बर से 22 दिसम्बर, 2016 तक अपने-अपने बैंकों की शाखाओं और आर.बी.आई. के मुख्यालयों पर सर्व हिन्द क्रमिक हड़ताल की। बैंक कर्मियों की यूनियनों के नेताओं ने इन झूठों का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद आज तक बैंकों को ज़रूरत के मुताबिक कैश नहीं मिला है, जिसकी वजह से बैंक कर्मचारियों को तनाव में काम करना पड़ रहा है और जनता को ज़रूरत के मुताबिक पैसा नहीं मिल रहा है। बैंक कर्मचारी रात के 10-10 बजे तक काम कर रहे हैं। उनको किसी भी प्रकार का कोई मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा है।

रिज़र्व बैंक की गाईड लाइन रोज़ बदलती रहती है जिसके कारण बैंक के कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसकी वजह से जनता भी परेशान हो रही है। सरकार की नीति है कि झूठे प्रचार करके देश की जनता को गुमराह करना तथा देश की जनता को बैंक कर्मचारियों के खिलाफ़ भड़काना।

Tag:    Jan 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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