भारतीय रेल के निजीकरण को बढ़ावा

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:32

तीन दिवसीय रेल विकास शिविर

भारतीय रेल के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए 18 से 20 नवम्बर तक रेल प्रशासन ने सूरजकुंड, हरियाणा में 3 दिवसीय रेल विकास शिविर का आयोजन किया।

रेल का कार्य कैसे सुधारा जाये, इसके बारे में अपने 13 लाख मज़दूरों से सुझाव इकट्ठे करने के नाम पर, भारतीय रेल ने सितम्बर 2016 से तीन महीनों तक एक बड़ी मुहिम चलायी। 75,000 रेल कर्मियों ने 1,50,000 से अधिक सुझाव दिये और उनमें से सबसे अच्छे सुझावों के बारे में इस तीन दिवसीय शिविर में चर्चा होगी, ऐसा बताया गया था। इस शिविर में केवल मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन, एन.एफ.आई.आर. तथा ए.आई.एफ.आर. के प्रतिनिधियों को उपस्थित होने की इजाज़त दी गयी। 2000 से ऊपर प्रतिनिधि थे और उनमें से ज्यादातर वरिष्ठ व्यवस्थापन कर्मी थे: रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, विभागीय रेलवे मैनेजर्स, विभागीय प्रमुख, इत्यादि। मान्यता प्राप्त यूनियनों के प्रतिनिधियों के अलावा, क्लास 3 तथा क्लास 4 के मज़दूरों की संख्या बहुत ही कम थी।

शिविर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विडियों कांफ्रेंस के ज़रिये किया। उपस्थितों में रेल मंत्री सुरेश प्रभु तथा उनके दो राज्य मंत्री, भारत सरकार के कई सचिव, प्रधानमंत्री के कार्यालय और केबिनेट सेक्रेटेरियट के कुछ वरिष्ठ अधिकारी तथा नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। शिविर को अनेक हस्तियों ने संबोधित किया, जिसमें विश्व बैंक की प्रमुख विश्लेषक, सुश्री मार्था लारेन्स (जो परिवहन क्षेत्र में विषेषज्ञ है), इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवेलेपमेंट बैंक के प्रमुख, स्टेट बैंक के भूतपूर्व अध्यक्ष, आई.आई.टी. तथा आई.आई.एम. के प्राध्यापक तथा रूस, जापान, कोरिया तथा इटली के रेल प्रमुखों का समावेश था!

हालांकि ऐसा बताया गया था कि शिविर का उद्देश्य सबसे बढ़िया विचारों को इकट्ठा करना है, परन्तु जल्द ही साफ हुआ कि इस शिविर का असली ध्येय था भारतीय रेल के निजीकरण के विचारों को बढ़ावा देना। इसके लिए मॉर्गन स्टेनली, मेकेन्ज़ी जैसे विदेशी सलाहकारों के साथ, सलाह-मशवरा करके योजना पहले ही बनायी गयी थी। दिखावे के तौर पर, भारतीय रेल के 17 ज़ोनों के कर्मियों के सुझावों को प्रस्तुत करने का नाटक किया गया। परन्तु शिविर में उपस्थित वरिष्ठ प्रबंधकों ने उन सभी विचारों को गैर मुनाफ़ेदार बताकर उनका खंडन और मजाक किया, जो हमारे देश के अंदरूनी इलाकों के साथ रेल संपर्क बनाने और स्थानीय लोगों को रोज़गार दिलाने के मकसद से रखे गये थे, हालांकि यह प्रचार किया जाता है कि ऐसा करना भारतीय रेल का एक मुख्य दायित्व है। विश्व बैंक के प्रतिनिधि ने तथा विदेशी रेलवे के मुखियों ने (केवल निजीकृत रेलों के मुखियों को ही निमंत्रित किया गया था) भारतीय रेल की वर्तमान कार्य शैली, जिसमें कई भाड़ों में सबसिडी दी जाती है, की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल की सेवाओं के लिए यात्रियों को पूरी कीमत देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आप टिकटें बेचने के लिए क्यों लोग रखते हो, जबकि वह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो सकती है!

शिविर में भाग लेने वालों के सामने रखे गये कुछ विचार निम्नलिखित हैं :

  1. प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश, निजी निवेश, कर्ज़ निधि और निजीकरण के बिना भारतीय रेल का विकास असम्भव है
  2. रेल संरचना का पुनर्निर्माण किया जाएगा। विविध विभागों के कार्यों को 3 अलग-अलग कम्पनियों में बांटा जाएगाः इंजन; पटरियां, स्टेशन बिल्डिंग, इत्यादि, सहित आधारभूत संरचना; तथा डिब्बे (वैगन)
  3. उत्पादन, रख-रखाव तथा परिचालन के क्षेत्रों में विस्तृत यंत्रीकरण तथा स्वचलीकरण
  4. भारतीय रेल को मुनाफ़ा कमाने के मुख्य उद्देश्य वाले धन्धे के रूप में स्थापित करने के कार्यक्रम को प्रोत्साहन देना
  5. टिकट दरों में छूट का अंत करना, तथा हर सेवा सुविधा के लिए यात्रियों से कीमत लेना
  6. कॉर्पोरेट, एन.जी.ओ. तथा निजी क्षेत्र की कम्पनियों के सहयोग से विविध उपक्रम शुरू करना
  7. भूमि, रेल कालोनियों, अस्पतालों, इत्यादि चल-अचल परिसंपत्तियों से पैसे कमाना
  8. मज़दूरों की संख्या को न्यूनतम ज़रूरतों तक सीमित रखकर उसमें भारी कटौती करना और कार्य के अनुसार वेतन, भत्ते तथा प्रेरक इनाम स्थापित करना
  9. उच्च प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण को लागू करने के बाद, परिवर्तित कार्यविधि की ज़रूरतों के अनुसार, कार्यकारी नियम-कायदों की पुनः समीक्षा करना उपरोक्त दिखाता है कि लोगों की पीठ के पीछे और निजी पूंजीपतियों के आक्रमक सहभाग के साथ तथा प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश तथा कर्ज़े के सहारे, भारतीय रेल का कदम-ब-कदम निजीकरण करने की योजना बन चुकी है। इस सरकार तथा भूतपूर्व कांग्रेस सरकार, दोनों का यही कार्यक्रम रहा है। वर्तमान भाजपा सरकार ने निजीकरण प्रक्रिया की गति को और तेज़ बनाने की ठान ली है।

मज़दूर एकता लहर भारतीय रेल के मज़दूरों को तथा हिन्दोस्तान के मज़दूर वर्ग को भारतीय रेल के निजीकरण के जन-विरोधी तथा समाज-विरोधी कार्यक्रम को हराने का आह्वान करती है।

Tag:    Jan 1-15 2017    Political-Economy    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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