वस्त्र उद्योग के मज़दूरों पर हमले की कड़ी निंदा करें

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:37

नोटबंदी के संदर्भ में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार में उसके सहकर्मियों ने बहुत ही शोरगुल के साथ प्रचार किया है कि सरकार द्वारा लिये गये फैसलों का उद्देश्य मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोगों की भलाई है। वास्तव में, सरकार के सारे फैसले संकट के बोझ को मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोगों पर लादने के उद्देश्य से प्रेरित हैं।

ऐसी रिर्पोटें आयी हैं कि रोज़गार उत्पन्न करने में तेज़ी लाने के नाम पर, केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने श्रम कानूनों व कर्मचारी भविष्य निधि (ई.पी.एफ.) में एक-तरफा बदलावों को मंजूरी दे दी है। असलियत में इन बदलावों का मकसद मज़दूरों के हितों की बलि चढ़ाकर पूंजीपतियों को फायदा दिलाना है। सबसे पहले ये बदलाव वस्त्र उद्योग क्षेत्र के लिए किये गये हैं। साथ ही, इन्हें दूसरे क्षेत्रों में लागू किया जाने वाला है।

कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कर्मचारी और मालिक दोनों भविष्य निधि में वेतन का 12 प्रतिशत योगदान देते हैं। याद होगा कि दो महीने पहले सरकार ने घोषणा की थी कि वस्त्र-पोषाक उद्योग क्षेत्र में वह मालिकों की तरफ से भविष्य निधि में वेतन के 8.33 प्रतिशत का योगदान देगी। पी.आई.बी. की 7 दिसम्बर, 2016 की विज्ञप्ति के अनुसार, अब सबसे नये कदम बतौर, मंत्रीमंडल ने फैसला लिया है कि भविष्य निधि में वेतन के 12 प्रतिशत के मालिकों के योगदान का पूरा भुगतान सरकार करेगी! पूंजीपतियों को सहायता देने के लिये सरकार बेशर्मी से लोगों के धन का इस्तेमाल कर रही है!

साथ ही साथ, मंत्रीमंडल ने प्रस्ताव रखा है कि 15000 रुपये प्रति माह से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिये कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान देना स्वैच्छिक कर दिया जाये। इसकी सफाई में कहा जा रहा है कि इससे मज़दूरों की घर ले जाने वाली आय में बढ़ोतरी होगी! अगर सरकार घर ले जाने वाली आय को बढ़ाने की इतनी इच्छुक थी तो वह ट्रेड यूनियनों द्वारा उठायी गई जीने लायक वेतन के आधार पर न्यूनतम वेतन को क्यों नहीं परिभाषित करती, जो महंगाई से जुड़ा हो। क्यों वह मज़दूर वर्ग की मांगों को अनसुना करती है?

कम वेतन पाने वाले मज़दूरों की, जो अत्यधिक शोषित हैं, उनकी घर ले जाने वाली कम आय की झूठी चिंता से सरकार की क्रूरता और सर्वथा मज़दूर-विरोधी रुख़ का पर्दाफाश होता है। ऐसे मज़दूर न केवल भविष्य निधि से वंचित किये जा रहे हैं, जिसका उपयोग वे संकट काल में कर सकते हैं, बल्कि उनकी बुरी परिस्थिति के लिये उन्हें ही जिम्मेदार माना जा रहा है! सरकार वेतन का 12 प्रतिशत योगदान मज़दूरों के लिये कर्मचारी भविष्य निधि में क्यों नहीं डालती, जैसा कि वह पूंजीपतियों के लिये कर रही है?

ट्रेड यूनियनों व प्रभावित मज़दूरों से परामर्श किये बिना सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि में ये बदलाव किये हैं। यह दिखाता है कि वर्षों के संघर्ष से प्रस्थापित की गयी कुछ थोड़ी-बहुत सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के टुकड़े-टुकड़े करके, सरकार अपने मज़दूर-विरोधी अजेंडे को आगे बढ़ा रही है।

वस्त्र उद्योग के मज़दूरों ने अपने अधिकारों की रक्षा में बहुत से बहादुर संघर्ष किये हैं। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी वस्त्र उद्योग के मज़दूरों व उनकी यूनियनों को बुलावा देती है कि मज़दूर-विरोधी और पूंजीपतियों के हित में सरकार के इन कदमों का करारा जवाब दें।

Tag:    Jan 1-15 2017    Political-Economy    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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