हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच रक्षा संबंधों में खतरनाक वृद्धि

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:39

दिसंबर की शुरुआत में, अमरीकी रक्षा सचिव, एश्टन कार्टर ने हिन्दोस्तान की यात्रा की थी, जिसके दौरान उन्होंने हिन्दोस्तान के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर के साथ एक संयुक्त बयान जारी किया था। उस बयान में हिन्दोस्तान को अमरीका के “प्रमुख रक्षा सांझेदार” का दर्जा दिया गया। बयान में कहा गया कि “हिन्दोस्तान को दिया जा रहा ‘प्रमुख रक्षा सांझेदार’ का दर्जा एक विशेश दर्जा है, जिससे हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच व्यापार और प्रौद्योगिकी की लेन-देन को और आसान बनाने में हुयी प्रगति को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। यह दर्जा पाकर हिन्दोस्तान अमरीका के निकटतम मित्रों और सांझेदारों के बराबर स्तर तक पहुंच गया है और इससे भविष्य में हमारा स्थाई सहयोग सुनिश्चित होगा।” और अब ओबामा सरकार ने औपचारिक रूप से हिन्दोस्तान को “प्रमुख रक्षा सांझेदार” घोषित कर दिया है।

रक्षा क्षेत्र का विश्लेषण करने वालों के अनुसार, हिन्दोस्तान को “प्रमुख रक्षा सांझेदार” का दर्जा दिए जाने का मतलब है हिन्दोस्तान को रक्षा सामग्रियों के निर्यात के कानूनों में बहुत खास और व्यापक छूट देना, जिसकी वजह से हिन्दोस्तान अमरीका का सबसे बड़ा रक्षा सांझेदार बन सकता है। यह दर्जा हिन्दोस्तान को बिना लाइसेंस के, अमरीका से सैनिक प्रौद्योगिकी खरीदने में ज्यादा सहूलियत देगा। विदित है कि अब तक, अमरीका के नाटो मित्रों के अलावा, उसकी इस प्रकार की सांझेदारी दक्षिण कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ रही है। और अब हिन्दोस्तान अमरीका के निकटतम रक्षा मित्रों के इस विशिष्ठ गिरोह में प्रवेश करने जा रहा है।

इस वर्ष जून में, वाशिंगटन डी.सी. में अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुयी एक बैठक के बाद, अमरीका ने सरकारी तौर पर हिन्दोस्तान को “प्रमुख रक्षा सांझेदार” की मान्यता दी थी। कार्टर-पर्रीकर वार्ता के बाद जारी किया गया संयुक्त बयान हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच बढ़ते रक्षा सम्बंधों की एक और सार्वजनिक घोषणा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके साथ, अमरीका को हिन्दोस्तान से रक्षा ठेकों के रूप में कई अरबों डालरों का मुनाफ़ा होगा।

कुछ ही महीने पहले, हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच एल.ई.एम.ओ.ए. (लेमोआ) समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था। उस समझौते के अनुसार, अमरीकी फौजों को एशिया-प्रशांत महासागर इलाके में अपने कार्यों के दौरान हिन्दोस्तानी सैनिक अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जायेगी। अमरीकी रक्षा सचिव ने हिन्दोस्तान के साथ संयुक्त सैनिक अभ्यासों की गति को और तेज़ करने तथा इस इलाके में अमरीका के अन्य मित्रों को भी इन अभ्यासों में जोड़ने की बात की। उन्होंने कहा कि “...ये अभ्यास सिर्फ अमरीका-हिन्दोस्तान के अभ्यास नहीं हैं, बल्कि अमरीका-हिन्दोस्तान-जापान के अभ्यास हैं, अमरीका-हिन्दोस्तान-ऑस्ट्रेलिया के अभ्यास हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एशिया-प्रशांत महासागर इलाके में हमारा प्रभाव बढ़ रहा है, विस्तृत हो रहा है, जैसा कि मैं कह रहा था ...” इस वर्ष के मालाबार समुद्री नौसैनिक अभ्यासों में अमरीका और हिन्दोस्तान के साथ जापान को भी शामिल किया गया था, जबकि उन अभ्यासों के अगले दौर में ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने की कोशिशें चल रही हैं।

जाना जाता है कि कार्टर-पर्रीकर वार्ता में शामिल उच्च अफसरों के अनुसार, अमरीका और हिन्दोस्तान जल्दी ही एक “बड़ी महत्वपूर्ण” परियोजना की घोषणा करने वाले हैं, जो दुनिया को यह सन्देश पहुंचाएगी कि हिन्दोस्तान को अमरीका के “प्रमुख रक्षा सांझेदार” की मान्यता मिल गयी है। यह परियोजना 2012 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू किये गए डिफेन्स टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव (डी.टी.टी.आई. - रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल) के तहत होगी। डी.टी.टी.आई. का अब विस्तार किया गया है और उसमें 7 संयुक्त कार्य दल शामिल हैं - जेट इंजन टेक्नोलॉजी, विमान टेक्नोलॉजी, नौसैनिक व्यवस्थाएं, वायु सैनिक व्यवस्थाएं, खुफिया कर्म, जासूसी, निगरानी, रासायनिक-जैविक सुरक्षा प्रणाली, इत्यादि।

हिन्दोस्तान-अमरीका संयुक्त बयान में लेमोआ और डी.टी.टी.आई. को इस रक्षा सम्बन्ध की ‘सुर्खियां’ बताया गया है। 2008 से, अमरीका-हिन्दोस्तान रक्षा व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हिन्दोस्तान ने बोइंग नामक अमरीकी कंपनी से बड़ी मात्रा में आधुनिकतम सैनिक विमान खरीदे हैं। हिन्दोस्तान ने अमरीकी कंपनियों से तरह-तरह के नवीनतम हेलीकॉप्टर खरीदने का भी ठेका दे रखा है। कुछ ही हफ्तों पहले, हिन्दोस्तान ने अमरीका से 73.2 करोड़ डॉलर की रक्षा सामग्रियां खरीदने का सौदा किया था।

हिन्दोस्तान को अमरीका के “प्रमुख रक्षा सांझेदार” का दर्जा दिया जाना, यह अमरीकी साम्राज्यवादियों और हिन्दोस्तानी सरमायदारों के बीच तेज़ गति से आगे बढ़ रही, घनिष्ट रक्षा और रणनैतिक सांझेदारी में एक और कदम है। अमरीका के 2017 के नेशनल डिफेंस औथोरायीजेशन एक्ट (एन.डी.ए.ए.) के अनुसार, हिन्दोस्तान को बेची जाने वाली सामग्रियों और प्रौद्योगिकी में शामिल हैं रक्षा सामग्रियों, सेवाओं और सम्बंधित प्रौद्योगिकी की सुरक्षा की जांच करने के तंत्रों, जैसे कि उपयुक्त साइबर सिक्योरिटी और अंत उपयोगकर्ता निगरानी समझौते (एंड यूजर अग्रीमेंट)। इस विषय पर बहुत साफ-साफ जोर दिया गया है कि “दक्षिण एशिया और व्यापक हिन्दोस्तान - एशिया-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमरीका के हितों को बढ़ावा देने के लिए हिन्दोस्तान के साथ रक्षा और सुरक्षा सहकार्य में वृद्धि की जा रही है”। दूसरे शब्दों में, हिन्दोस्तानी राज्य अपनी नीतियों और कार्यों को तय करने में, अमरीकी साम्राज्यवादियों के रणनैतिक हितों, उनकी दादागिरी और जंग-फरोशी, एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में अपना वर्चस्व जमाने के अमरीकी साम्राज्यवादियों के हमलावर प्रयासों के साथ और नजदीकी से कदम मिलाकर चलेगा। इस गठबंधन के ज़रिये हिन्दोस्तानी सरमायदार अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को बढ़ावा देने की उम्मीद करते हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हिन्दोस्तान और अमरीका के बढ़ते सैनिक और रणनैतिक संबंधों की कड़ी निंदा करती है। इस इलाके में शांति और सुरक्षा के लिए यह बहुत गंभीर खतरा है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मजदूर वर्ग और लोगों से आह्वान करती है कि दुनिया की इस सबसे भयानक, खूंखार और लालची ताक़त के साथ हमारे शासकों के बढ़ते सहयोग का एकजुट होकर विरोध करें।

Tag:    Jan 1-15 2017    World/Geopolitics    2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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