हिन्दोस्तानी राज्य और उसके वर्ग चरित्र पर चर्चा

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 27/01/2017 - 22:43

Printer-friendly version

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की उप-तहसील रामगढ़ में कुम्हार धर्मशाला में 19 दिसम्बर को लोक जन समिति रामगढ़, रामगढ़ सेवा समिति, लोक राज संगठन और हिन्द नौजवान एकता सभा ने मिलकर, एक सभा का आयोजन किया। यह सभा अशफ़ाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिये की गई थी। इस सभा में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद एक चर्चा रखी गई जिसका विषय था - हिन्दोस्तानी राज्य और उसका वर्ग चरित्र।

चर्चा की शुरुआत करते हुये हिन्द नौजवान एकता सभा के का. सूरज भाम्भू ने कहा कि वर्तमान हिन्दोस्तानी राज्य कमेरे वर्ग का दुश्मन है और लुटेरे वर्ग का दोस्त है। लोक जन समिति के सचिव मनीराम लकेसर ने नोटबंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सब पूंजीपतियों द्वारा हमसे लूटी गई पूंजी को काले से सफेद करने का ज़रिया है। मजदूर बेरोज़गार हो गया है, किसान के पास खाद व बीज लाने के लिये पैसे नहीं हैं। किसान बुआई के समय लाइन में खड़ा है। लाइनों में लोग बेहोश हो रहे हैं, मर रहे हैं। एक भी पूंजीपति कहीं लाइन में खड़ा दिखाई नहीं दे रहा है।

 

हिन्द नौजवान एकता सभा के मनोज शर्मा ने क्रांतिकारियों के जीवन पर विस्तार से चर्चा की और उन्होंने बताया कि क्रान्तिकारियों ने जिस हिन्दोस्तान का सपना देखा था, जिसके लिये शहीद हुए थे, वह सपना आज भी अधूरा है। आज वही पूंजीपति वर्ग राज कर रहा है जिनकी खिलाफ़त हमारे शहीदों ने की थी। उन्होंने कहा कि शहीदों के संघर्ष को जारी रखना होगा। मजदूर वर्ग और मेहनतकशों का राज लाने के लिए आज नौजवानों को आगे आकर बलिदान देना पड़ेगा।

लोक जन समिति के अध्यक्ष बलवन्त भाम्भू ने सरकारों की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों पर बोलते हुए कहा कि इन सारी बीमारियों का एक ही ईलाज है और वह है कि मजदूर और किसान को मिलकर सत्ता पर कब्ज़ा करना होगा।

लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष का. हनुमान प्रसाद शर्मा ने हिन्दोस्तानी राज्य को पूंजीवादी-साम्राज्यवादी करार दिया और कहा कि यह राज्य मजदूर वर्ग के शोषण और ग़रीबी का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के नौजवान क्रांतिकारियो ने शोषण विहिन समाज की रचना के लिए और ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्ति के लिए 1857 के ग़दर, 1913 की हिन्दुस्तान ग़दर पार्टी के क्रतिकारियों के संघर्ष और सोवियत संघ की बोल्शेविक क्रांति से सीख लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए अपने सिर हथेली पर रखे और किसी भी प्रकार का बलिदान देने का संकल्प लिया और उस संकल्प को पूरा किया। इसके बहुत से उदाहरण दिये जा सकते हैं जिनमें से कुछ हैं - अशफाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी - जिन्होंने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चुना। इन्होंने जीते जी बर्तानवी उपनिवेशवादियों की जड़ें हिला दी थीं।

बर्तानवी उपनिवेशवादियों ने हिन्दोस्तान के गद्दार पूंजीपतियों और ज़मीनदारों के साथ मिलकर उस समय हजारों देशभक्तों को जेलों में डाला और बहुतों को फांसी पर लटकाया। उन्होंने हिन्दोस्तानी गद्दारों के साथ मिलकर हमारे शहीदों के क्रांतिकारी आंदोलन को कुचल दिया। उसके बाद बर्तानवियों की अगुवाई में जो पूंजीवादी राज्य स्थापित हुआ, वह केवल पूंजीपति वर्ग की ही सेवा करता आया है, न कि मेहनतकश लोगों की।

इसलिए मैं अंत में यही कहूंगा कि अगर मेहनतकश वर्ग का शासन लाना चाहते हो और क्रांतिकारियों के सपनों का हिन्दोस्तान बनाना चाहते हो, तो नौजवानों को हमारे शहीदों से प्रेरणा लेकर आगे आना होगा और नारा देना होगा कि - हम हैं इसके मालिक, हम हैं हिन्दोस्तान! मजदूर, किसान, औरत और जवान! तभी हो सकता है हिन्दोस्तान का नव-निर्माण।

विचार गोष्ठी में रुलीचंद लकेसर, राममूर्ती भाम्भू, पन्नालाल होदकासिया, कन्हैयालाल जैन, बनवारी लाल भाम्भू, मनीराम स्वामी, विकास सांगर, ओमप्रकाश सहारण, मदन लकेसर, सुरेश पचार, शोकीन खान, राम प्रसाद खाती, महावीर जास्ट, अरजन खिचड़, चेतराम लकेसर, डा. कृष्ण नोखवाल, मदन शर्मा, नरेन्द्र सहारण, दिनेश स्वामी, मोहन लाल कारगवाल, राम कुमार सांगर, दिनेश गोदारा, राजेस सोनी, संजीव सहारण आदि ने अपने विचार रखे और हमारे शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

Tag:    Jan 1-15 2017    Communist School    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)