झारखण्ड में कोयले की खान में त्रासदी

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/02/2017 - 21:08

कोयले की खदानों में मजदूरों की सुरक्षा के प्रति बेरहम लापरवाही

समाचार सूत्रों के अनुसार, झारखण्ड के गोड्डा जिले में, राज्य की राजधानी रांची से 400 किलोमीटर दूर, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ई.सी.एल.) की लालमाटिया खदान में, 29 दिसंबर, 2016 की शाम को, बड़े पैमाने पर मिट्टी धंस जाने से, लगभग 100 मज़दूर उसके नीचे दब गए।

शुरुआती जांच से जाना जाता है कि भूमि के 200 फुट नीचे खदान का काम चल रहा था, जब 100 फुट की लम्बाई वाली मिट्टी की दीवार धंस गयी। यह घटना शाम के साढ़े सात और साढ़े आठ के बीच हुयी। खदान का प्रवेश बंद हो गया और सभी मज़दूर तथा कई मशीन अन्दर फंस गए। त्रासदी के बाद लगभग एक हफ्ते तक बचाव कार्य चलता रहा परन्तु प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, अन्दर फंसा कोई भी मज़दूर ज़िन्दा नहीं बचा। कितने मज़दूर अन्दर थे और कितनी लाशें बाहर निकाली गयीं, इनके सरकारी आंकड़े बदलते रहे हैं।

बचाव कार्य में भाग लेते हुए, पटना से आये हुए राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एन.डी.आर.एफ.) के सहायक अध्यक्ष श्री जय प्रकाश ने साफ-साफ कहा है कि त्रासदी मानव-निर्मित है। यह प्राकृतिक दुर्घटना नहीं है। यह मानव-निर्मित है। यहां सुरक्षा के लिए कोई साधन नहीं हैं। जिस इलाके में हम तलाश कर रहे हैं, वहां अभी भी बहुत खतरा है”, उन्होंने कहा।

रिपोर्टों के अनुसार, खदान के अन्दर फंसे हुए ज्यादातर मज़दूर बिहार, मध्य प्रदेश और आस-पास के राज्यों के गरीब किसान परिवारों से हैं।

ईस्टर्न कोलफील्ड्स एक सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी है जो देश के पूर्वी राज्यों में कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) नामक सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी के तहत कोयले की खदानों के संचालन के लिए जिम्मेदार है। परन्तु कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में खदानों के संचालन तथा यातायात और अन्य संबंधित कामों समेत खनन के असली काम को निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर दिया जाता है। राष्ट्रीय आपदा राहत बल के इंजिनीयरों और बचाव कार्य में लगे दूसरे सरकारी अधिकारियों तथा कई खनन विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा है कि खदानों में सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही खराब है, कि अगर सुरक्षा कदमों को सख्ती से लागू किया जाए तो ऐसी त्रासदियां पूरी तरह रोकी जा सकती हैं। परन्तु जिन निजी कंपनियों को इन खदानों को आउटसोर्स किया गया है, वे अपने अधिक से अधिक मुनाफ़ों को सुनिश्चित करने के लिए मूल सुरक्षा नियमों का भी खुलेआम हनन करती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों (ई.सी.एल. और सी.आई.एल.) के मुखिए इस बात को नजरंदाज़ कर देते हैं। सूचनाओं के अनुसार, महालक्ष्मी नामक जिस निजी कंपनी को खादन को आउटसोर्स किया गया था, उसके अधिकारी तथा निजी यातायात कंपनी के अधिकारी खदान में मिट्टी धंसते ही वहां से फरार हो गए।

इंटक संबंधित राष्ट्रीय कोलियेरी मज़दूर संघ के महासचिव ए.के. सिंह और महागना के विधायक अशोक कुमार का यह कहना है कि 2012 में उसी खदान में इसी प्रकार की दुर्घटना हुयी थी, जिसमें तीन लोग मारे गए थे। उस घटना के कारण, ई.सी.एल. के तत्कालीन महाप्रबंधक को उनके पद से हटाया गया था और खदान को बंद कर दिया गया था। परन्तु 2015 में ई.सी.एल. ने उस खदान में खनन का काम फिर से शुरू करने का फैसला लिया, हालांकि यूनियन की ओर से केन्द्रीय गृहमंत्री और ई.सी.एल. के उच्च अधिकारियों को खदान की खतरनाक हालतों के बारे में कई पत्र लिखे गए थे। उन्होंने त्रासदी को औद्योगिक दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित कत्ल, जिसके लिए ई.सी.एल. के अधिकारी जिम्मेदार हैं” बताया है।

गोड्डा में कोयले की खदान में हुयी यह त्रासदी फिर से दिखाती है कि खदानों में जिन सुरक्षा कदमों का पालन करना चाहिए, उनका आम तौर पर हनन होता है - धनबाद स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस) के विशेषज्ञों ने ऐसा बताया है।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस) के प्रोफेसर आर.एम. भट्टाचार्जी ने कहा कि आजकल हिन्दोस्तान में भूमिगत खदानों से सिर्फ 6 प्रतिशत कोयले का उत्पादन होता है जबकि बाकी 94 प्रतिशत उत्पादन ओपन कास्ट खदानों से होता है। सभी इन ओपन कास्ट खदानों को पसंद करते हैं, क्योंकि इनमें से कोयला निकालना ज्यादा आसान होता है। परन्तु इनमें सुरक्षा के मापदंड बहुत निम्न होते हैं। ओपन कास्ट खदानों में सरकार के कानूनों का भी पालन नहीं होता है। भूमिगत खनन ज्यादा खतरनाक है और उसके लिए अनेक नियम हैं। परन्तु ओपन कास्ट खनन के लिए सिर्फ कुछ मूल नियम ही हैं” जिस खदान में यह हाल की त्रासदी हुयी थी, वह ओपन कास्ट खदान है।

खनन क्षेत्र में सार्वजनिक कंपनियों के साथ-साथ, हिन्दोस्तानी राज्य खनन क्षेत्र को हिन्दोस्तानी और विदेशी निजी इज़ारेदार पूंजीवादी कंपनियों के लिये बड़ी तेज़ गति से खोल रहा है। राज्य भूमि अधिग्रहण और खदानों के संचालन के लिये आवश्यक इज़ाज़त दिये जाने से संबंधित कानूनों और नियमों को बदलने की कोशिश कर रहा है, ताकि खनन क्षेत्र में अधिक से अधिक निजी इज़ारेदार कंपनियों को आकर्षित किया जा सके। जाहिर है कि निजी इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों का मुख्य ध्यान अधिक से अधिक मुनाफ़े कमाने पर होगा। खदानों के मज़दूरों की सुरक्षा का और भी कठोरता के साथ हनन किया जायेगा।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी कोयले की खदानों के मज़दूरों की सुरक्षा के प्रति हिन्दोस्तानी राज्य और उसके अधिकारियों की बेरहम लापरवाही की कड़ी निन्दा करती है। इस प्रकार की त्रासदियां हमारे देश में चल रही पूंजीवादी व्यवस्था के अनिवार्य परिणाम हैं, क्योंकि सबसे बड़े इज़ारेदार पूंजीवादी घरानों का राज्य पर नियंत्रण है। संपूर्ण अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था व प्रक्रिया इन इज़ारेदार घरानों के हित में चलाई जाती है, ताकि वे मज़दूर वर्ग और मेहनतकशों का बेरहम शोषण करके अधिक से अधिक मुनाफे़ कमा सकें। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मज़दूर वर्ग और लोगों से आह्वान करती है कि इस पूंजीवादी व्यवस्था का तख्ता पलट करने और मज़दूर वर्ग की अगुवाई में एक नये समाज - जिसमें सभी मेहनतकशों की सुरक्षा और खुशहाली पर मुख्य ध्यान दिया जायेगा - का निर्माण करने के लिये एकजुट और संगठित हों।

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पार्टी के दस्तावेज

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

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