भारतीय रिज़र्व बैंक के टकसाल मजदूरों ने अतिशोषण का विरोध किया

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:23

पश्चिम बंगाल स्थित सालबोनी के टकसाल मज़दूरों ने 29 दिसंबर को प्रति पाली में 9 घंटे से अधिक काम करने से इंकार कर दिया। विदित है कि 14 नवंबर से उन्हें लगातार प्रति पाली 12 घंटे काम करना पड़ा है, ताकि सरकार की नोटबंदी से पैदा हुई हालत में नये नोटों की मांग को पूरा किया जा सके।

भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड इंप्लाईज़ यूनियन के अनुसार, कई कर्मचारी बीमार पड़ गए हैं और कर्मचारियों के लगातार काम करते रहने से उनके परिवार पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।

सालबोनी टकसाल में 700 कर्मचारियों सहित, नोट छापने के अन्य टकसालों - मैसूर, नासिक तथा देवास - में हजारों कर्मचारी इस काम में लगे हुये हैं। सभी टकसालों के कर्मचारियों को सरकारी आदेश के कारण 12-12 घंटे की शिफ्टों में काम करना पड़ रहा है। लंबे घंटों तक काम करने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

सालबोनी टकसाल के एक मज़दूर का यह कहना है कि “हम न तो गुलाम हैं न रोबो, जो कि हम ‘देश की महान भलाई’ के लिये हर दिन 12-12 घंटे काम करेंगे। हम इंसान हैं। हमें आराम की ज़रूरत होती है”।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी भारतीय रिज़र्व बैंक के टकसाल मज़दूरों के अतिशोषण की निन्दा करती है। 

Tag:    Feb 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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