राजस्थान में कर्मचारियों का संघर्ष

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:25

राज्य सरकार की वादाखिलाफ़ी के बाद संघर्ष का आगाज़!

निजीकरण और ठेकेदारी के खिलाफ़ हड़ताल के लिये मतदान

16 जनवरी, 2017 को पूरे राजस्थान में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के आह्वान पर हड़ताल करने के लिये कर्मचारियों के बीच मतदान की प्रक्रिया शुरू की गई। इसकी शुरुआत राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से की गई। यह मतदान प्रक्रिया 25 जनवरी तक जारी रहेगी। इसके बाद फैसला लिया जायेगा कि सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ़ कर्मचारी महासंघ की क्या रणनीति होगी।

राजस्थान के कर्मचारी, राज्य के सरकारी विभागों में व्याप्त ठेकेदारी, समान काम के लिये समान वेतन, निजीकरण, पी.पी.पी. म मॉडल, अस्थाई कर्मचारियों को पक्का करने, आदि की मांगों को लेकर पिछले कई महीनों से आंदोलनरत हैं। कर्मचारी महासंघ ने यह आंदोलन 18 नवंबर, 2016 को जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर शुरू किया था। इसके बाद यह आंदोलन विभिन्न चरणों में अलग-अलग गतिविधियों मसलन - कर्मचारियों में जागरुकता अभियान चलाकर, जिला मुख्यालयों पर धरना देकर, सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर, आदि रूपों में लगातार चलता रहा।

विदित रहे कि अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के आह्वान पर 29 दिसंबर, 2016 को पूरे राजस्थान की तहसीलों पर कर्मचारियों ने तहसीदारों के समक्ष धरने दिये। धरने के दौरान कर्मचारियों ने एक 15 सूत्रीय मांगपत्र मुख्यमंत्री के नाम से तहसीलदार को सौंपा। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, ये प्रदर्शन राजस्थान के सभी जिलों की सभी तहसीलों में आयोजित किये गये।

इसी कार्यक्रम के तहत हनुमानगढ़ जिले में वहां के कर्मचारी संगठनों के साथ मिलकर, लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा तथा सदस्यों ने नोहर तहसील पर धरना दिया। जिले की अन्य तहसीलों - भादरा, टिब्बी, रावतसर, पीलीबंगा - पर भी कर्मचारियों के संगठनों ने धरने दिये और तहसीलदारों को ज्ञापन सौंपे। इनमें कर्मचारी महासंघ के अनेक पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सभाओं को संबोधित किया। नोहर तहसील पर धरने को संबोधित करने वालों में थे - लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा, कृषि पर्यवेक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश खटोतिया, शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के भंवर सिंह चैधरी, प्रबंधक संघ के सीतारात ब्यास, आदि।

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की मांगें हैं :

  1. (अ) राज्य सरकार, बोर्ड, निगम, स्वात्तशाषी संस्थाओं, पंचायती राज एवं सहकारी संस्थाओं में कार्यरत कर्मियों के लिये समान काम के लिये समान वेतन की नीति लागू कर पूर्व के वेतनमान में उत्पन्न विसंगतियों का निराकरण कर कार्मिकों का न्यूनतम वेतन 26000 निर्धारित करते हुये 7वें केन्द्रीय वेतनमान के समस्त परिलाभ (वेतन व भत्ते) दिये जायें एवं कार्मिकों को पूर्व में देय परिलाभ में कटौती नहीं की जाये।
    (ब) राज्य कर्मचारी, बोर्ड, निगम, स्वात्तशाषी संस्थाओं, पंचायती राज एवं सहकारी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को केन्द्रीय कर्मचारियों के अनुरूप एरियर सहित बोनस दिया जाये।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मचारियों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ता स्वीकृत किया जये।
  3. राज्य कर्मचारी, बोर्ड, निगम, पंचायती राज एवं स्वायत्तशाषी संस्थाओं के कार्मिकों को सेवाकाल में 5 पदोन्नति के अवसर दिये जायें एवं समयबद्ध पदोन्नति (डी.पी.सी.) की जाये। पदोन्नति नहीं होने की स्थिति में 7, 14, 21, 28 एवं 35 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति के पद का वेतनमान स्वीकृत किया जाये।
  4. (अ) राजस्थान सरकार के अधीन संविदा, ठेकाकर्मी, समेकित वेतन पर कार्यरत, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगी, सहायिका, साथिन, होमगार्ड कर्मी, वन मित्र, कृषक मित्र, मैन विद मशीन कर्मी, कंप्यूटर कर्मी, नरेगाकर्मी, एन.आर.एच.एम. कर्मी, मिड-डे मील कर्मी, पंचायत राज्य के हैंडपंप मिस्त्री, जनता जलकर्मी, पैरा टीचर्स, 108 कर्मी, फार्मासिस्ट, पशुसेवा केंद्र कर्मी, अटल सेवा केंद्र कर्मी, विद्यार्थी मित्र, शिक्षा कर्मी, लोकजुम्बिश कर्मी, प्रेरक, को नियमित कर समस्त परिलाभ राज्य कार्मिकों के अनुरूप स्वीकृत किये जायें।
    (ब) शिक्षा विभाग के प्रबोधकों को शिक्षक घोषित किया जाये, विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा एवं योगा को अनिवार्य किया जाये एवं वर्कचार्ज कार्मिकों को पदोन्नति के अवसर सुलभ कराये जायें। भविष्य में संविदा अथवा अस्थाई प्रक्रिया बंद की जाये।
  5. (अ) राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में समस्त संवर्गों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाये। जनसंख्या एवं कार्यभार के अनुरूप नवीन पद सृजित किये जायें। वर्तमान में विभिन्न संवर्गों के स्वीकृत पदों की कटौती बंद की जाये। विभिन्न संवर्गों में विभागीय सेवा नियमों में विद्यमान पदोन्नति के अवसरों को समाप्त नहीं किया जाये।
    (ब) मंत्रालयिक कर्मचारियों को शासन सचिवालय, लोक सेवा आयोग एवं विधान सभा में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों के अनुरूप वेतन, भत्ते, पदोन्नति एवं अन्य सुविधायें प्रदान की जायें।
  6. नवीन भर्ती सेवा नियम एवं नवीन पेंशन नियम-2004 को समाप्त कर पूर्ववर्ती व्यवस्था पुनः लागू की जाये। प्रोबेशन में पूर्व की भांति नियमित वेतनमान देय हो।
  7. आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में आवेदक को शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पदों पर नियुक्ति दी जाये। प्रशिक्षण एवं आयु की छूट प्रदान की जाये।
  8. महासंघ सहित संबद्ध कर्मचारी संगठनों के मांगपत्रों पर नियमित रूप से वार्ता कर समाधान किया जाये। कर्मचारी संगठनों के साथ हुये समझौते/सहमति के अनुरूप शासकीय आदेश जारी किये जायें।
  9. कार्मिकों को भवन निर्माण, वाहन ऋण सहित अन्य परिलाभ बहाल किये जायें। बैंकों के माध्यम से ऋण अदायगी संबंधी व्यवस्था की समीक्षा की जाये।
  10. सरकार द्वारा कार्मिकों के वेतन से आर.पी.एम.एफ. की कटौती/गणना इत्यादि की समीक्षा के लिये संचालक मंडल का गठन किया जाये। मंडल में महासंघ का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाये। आर.पी.एम.एफ. से आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक किया जाये।
  11. राजस्थान में बोर्ड, निगम एवं स्वायत्तशाषी संस्थाओं के कार्मिकों के मामलों में सरकार एवं महासंघ के मध्य हुये समझौते 1989 एवं 1997 को लागू किया जाये। राज्य कार्मिकों की भांति इन्हें पेंशन सहित अन्य परिलाभ लागू किये जायें।
  12. सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में निजीकरण, पी.पी.पी. मॉडल आधारित व्यवस्थाओं को समाप्त किया जाये।
  13. पुलिस सेवा के कार्मिकों एवं आपातकालीन सेवा के कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देना सुनिश्चित किया जाये एवं इनका कार्यशील समय निर्धारित किया जाये। पुलिस कार्मिकों की समस्याओं के निराकरण के लिये उचित मंच/प्राधिकरण की पारदर्शी व्यवस्था की जाये।
  14. बैंक/बीमा की स्थानान्तरण नीति के अनुरूप राज्य कार्मिकों के लिये पारदर्शी एवं स्पष्ट स्थानान्तरण नीति लागू की जाये। स्थानान्तरण में राजनैतिक हस्तक्षेप नहीं किया जाये।
  15. (अ) राजस्थान में संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के कार्मिकों, मजदूरों का न्यूनतम पारिश्रमिक 21000 रुपये प्रतिमाह किया जाये।
    (ब) विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शासकीय सचिवालय, कलैक्ट्रेट पर प्रदर्शन के लिये उनके कार्यालयों के समक्ष उचित स्थान उपलब्ध करवाये जायें।
    (स) सरकार द्वारा कर्मचारी कल्याण परिषद का गठन कर महासंघ का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाये। कर्मचारियों की व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं का सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से निराकरण किया जाये।
Tag:    Feb 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

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