पश्चिम बंगाल में बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:30

पश्चिम बंगाल के दक्षिण - 24 परगना जिले के भांगोर गांव के निवासी दिसंबर 2016 के अंतिम हफ्ते से, बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ डटकर संघर्ष कर रहे हैं। खमारैत, माछी भांगा, टोना और गाज़ीपुर गांवों में बड़ी-बड़ी जन सभायें और विरोध प्रदर्शन हुये हैं, जिनमें हजारों गांववासियों ने भाग लिया है। पड़ोसी गांवों के लोग भी अपना भाईचारा दर्शाने के लिये आ रहे हैं।

भांगोर के निवासी मुख्यतः किसान और मछुआरे हैं। वे राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे उनकी कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। यह भूमि अधिग्रहण पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पी.जी.सी.आई.एल.) द्वारा पावर प्लांट (केन्द्र सरकार की परियोजना) बनाने के लिये किया जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, भांगोर में भूमि अधिग्रहण लगभग 2 वर्ष पहले शुरू किया गया था। यह भूमि अधिग्रहण पश्चिम बंगाल सरकार के प्रत्यक्ष भूमि खरीदारी नमूने के तहत किया गया था। इस नमूने, जिसे सरकार द्वारा भूमि

अधिग्रहण का विकल्प बताया जा रहा है, के अनुसार, राज्य सरकार ने पावर ग्रिड कारपोरेशन को सब-स्टेशन के लिये ज़रूरी (रिपोर्टों के अनुसार लगभग 16 एकड़) भूमि प्रत्यक्ष तौर पर खरीदने को कहा था, पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों ने ऐसा बताया है।

प्रत्यक्ष खरीदारी नमूने के तहत, परियोजना को लागू करने वाली सार्वजनिक या निजी कंपनी की ओर से पंचायत और निगम अधिकारी भूमि अधिग्रहण करते हैं। इसके लिये जो मुआवज़ा दिया जाता है वह बाज़ार भाव और उसके अलावा 50 प्रतिशत हरजाना है। समाचार सूत्रों के अनुसार, अक्सर ऐसा देखने में आया है कि पंचायतों और निगमों के स्थानीय नेता गांववासियों को आतंकित करके, उन्हें सस्ती कीमत पर भूमि को बेचने को मजबूर करते हैं।

2014 में जो केन्द्रीय भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू हुआ था, उसके तहत दिया गया मुआवजा बाज़ार भाव का तीन से चार गुणा है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण तभी किया जा सकता है जब सरकार सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करके अनुमति देती है। भूमि अधिग्रहण तभी किया जा सकता है जब 80 प्रतिशत निवासी अपनी सहमति देते हैं। अधिनियम के तहत, अपनी भूमि खोने वाले लोग अपनी-अपनी शिकायतें भी दर्ज कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने अब तक उस केन्द्रीय अधिनियम को लागू नहीं किया है।

भांगोर के निवासी प्रत्यक्ष खरीदारी नमूने के तहत दिये गये बहुत कम मुआवजे़ का विरोध कर रहे हैं। वे स्थानीय पंचायत नेताओं व उनके गुंडों द्वारा फैलाये गये आतंक और हिंसा का भी विरोध कर रहे हैं, जिसके ज़रिये उन्हें अपनी भूमि बेचने को मजबूर किया गया है। वे वहां के निवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कई लाख वोल्ट बिजली का उत्पादन करने वाले पावर प्लांट के दुष्परिणामों के बारे में बहुत चिंतित हैं। रिपोर्टों से जाना जाता है कि उस इलाके के मछुआरों की रोज़ी-रोटी पहले से ही खतरे में है क्योंकि मछलियों का मुख्य स्रोत, उस इलाके में बहने वाली बिद्याधरी नदी भारी प्रदूषण और जल ठहराव से प्रभावित है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से हमला किया है। उस इलाके में धारा 144 लागू की गई है। मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, महिलाओं और पुरुषों को उनके घरों से घसीटकर बाहर निकाला गया है और पीटा गया है, उनकी दुकानों और घरों को नष्ट किया गया है। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। समाचार सूत्रों के अनुसार, पंचायतों और निगमों के नेताओं के स्थानीय गुंडे, जो बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण करवाने में सक्रिय रहे हैं, वहां पुलिस की सहायता के साथ आतंक फैला रहे हैं।

भांगोर के निवासियों का विरोध संघर्ष जायज़ है। उनकी रोज़ी-रोटी के स्रोत उनसे छीने जा रहे हैं और उन्हें विस्थापित किया जाने वाला है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी उनके संघर्ष का समर्थन करती है और पुलिस व स्थानीय गुंडों द्वारा उन पर की जा रही बेरहम हिंसा की कड़ी निन्दा करती है।

Tag:    Feb 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)