जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को हटाने की तामिलनाडु के लोगों की मांग जायज़ है!

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:32

15 जनवरी से, पूरे तामिलनाडु में लाखों-लाखों छात्र और नौजवान बडे़-बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं और उनमें भाग ले रहे हैं। उन्होंने चेन्नई में मरीना समुद्रतट तथा मदुरई और तामिलनाडु के अन्य शहरों के प्रमुख केन्द्रों पर घेराबंदी कर रखी है और जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को हटाने की मांग की है।

जल्लीकट्टू सांड को पालतू बनाने वाला एक खेल है, जो सदियों से तामिल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह तामिल लोगों के एक महत्वपूर्ण पर्व, फसल कटाई संबंधित पर्व पोंगल का अभिन्न हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाया था। इसकी वजह से पूरे राज्य में बहुत सारे विरोध प्रदर्शन हुये थे। कोर्ट ने प्रतिबंध को सही ठहराने के लिये यह कारण दिया था कि इस खेल में सांड के साथ क्रूर व्यवहार किया जाता है। जनवरी 2016 में, तामिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, पर्यावरण मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर दी कि जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ को इजाज़त दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने फौरन उस अधिसूचना पर स्टे लगा दिया।

जल्लीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शनकारियों पर वहशी राजकीय आतंक की निन्दा करें!

23 जनवरी, 2017 की सुबह को तामिलनाडु की पुलिस ने चेन्नई के मरीना समुद्रतट पर एक हफ्ते से, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारंपरिक सांड उत्सव जल्लीकट्टू पर लगाये गये प्रतिबंध के विरोध में, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नौजवानों और छात्रों पर वहशी आतंक का प्रयोग किया। कोई चेतावनी दिये बिना, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चारों ओर से घेर लिया ताकि पड़ोस में मछुआरों के गांवों और मज़दूरों की बस्तियों से लोग आकर छात्रों और नौजवानों की मदद न कर सकें। इन गांवों और बस्तियों के लोग आंदोलन के दौरान छात्रों और नौजवानों के लिये भोजन, पानी, इत्यादि की व्यवस्था करते रहे।

पुलिस की लाठियों से सैकड़ों युवक-युवतियां बुरी तरह घायल हुई हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इस बर्बर हमले की खबर को सुनकर चेन्नई के लोग सड़कों पर उतर आये और शहर के सारे कामकाज को ठप्प कर दिया। पूरे शहर में लोगों ने बैरियर लगाये और इसमें महिलायें व नौजवान आगे रहे। लोगों ने पुलिस आतंक को फौरन रोकने की मांग की। पुलिस ने कई लोगों के घरों में घुसकर उन पर हमले किये तथा अनेक नौजवानों को गिरफ्तार किया।

इसके साथ-साथ, तामिलनाडु के अन्य शहरों - त्रिची, मदुरई, कोयंबतूर, इत्यादि - में भी पुलिस ने लोगों पर हिंसक हमले किये। चेन्नई की तरह हर शहर में पुलिस ने आंसू गैस का प्रयोग किया, लोगों पर बेरहमी से लाठियां भांजी और बहुत सारे लोगों को गिरफ्तार किया।

राजकीय आतंक को जायज़ ठहराने के लिये तामिलनाडु की सरकार और पुलिस यह प्रचार फैला रहे हैं कि “राष्ट्र-विरोधी” ताक़तें उस आंदोलन में घुस गई थीं। वे ताक़तें तथाकथित आगजनी, आदि कर रही थीं, जिसकी वजह से सरकार को यह कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने तामिलनाडु विधानसभा में, पुलिस हमले पर विपक्ष के नेता के सवाल के जवाब में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने “गणतंत्र दिवस समारोह में तोड़फोड़ करने” की योजना बनाई थी। मीडिया ने बार-बार इन झूठों को दोहराया है, ताकि हिन्दोस्तान के लोग इन पर यकीन करने लग जायें और छात्रों व नौजवानों पर बेरहम राजकीय दमन का विरोध न करें।

परन्तु राज्य सरकार और उसकी पुलिस सच्चाई को लोगों से छिपाने में नाकामयाब रही हैं। ऐसे विडियो देखने में आये हैं जिनमें चेन्नई के कई स्थानों पर पुलिस खुद ही आगजनी करती हुई दिखती है। ऐसा भी संभव है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने के लिये, मरीना समुद्रतट के पुलिस थाने पर सरकार और पुलिस के एजेंटों ने ही आग लगाई हो।

सभी सबूतों से यह स्पष्ट हो जाता है कि 23 जनवरी, 2017 को नौजवानों और छात्रों पर वहशी हमले को केन्द्र और राज्य सरकारों ने मिलकर आयोजित किया था। मरीना समुद्रतट और तामिलनाडु की विभिन्न जगहों पर इकट्ठे हुये प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन रोकने से पहले, यह इंतजार कर रहे थे कि विधानसभा में जल्लीकट्टू को वैधता देने वाला कानून पास हो जायेगा। तो लोगों पर यह वहशी हमला करने की सरकार को इतनी जल्दी क्यों थी? यह साफ है कि इस आंदोलन के दौरान धर्म और जाति की परवाह किये बिना लोगों ने जो एकता दिखाई थी, उससे शासक वर्ग बहुत डरते हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी तामिलनाडु में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिन्दोस्तानी राज्य के राजकीय आतंक की कड़ी निन्दा करती है।

इस तरह, बीते तीन वर्षों से तामिलनाडु के लोगों के लिये, उनके एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व, पोंगल के मनाये जाने पर भारी तनाव मंडराता रहा है। केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने मिलकर, बड़े पैशाचिक तरीके से, लोगों के लिये बड़ी अनिश्चित स्थिति पैदा कर रखी है।

8 जनवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों सहित जल्लीकट्टू को इजाज़त देने वाली केन्द्र सरकार की 2016 की अधिसूचना मान्य है या नहीं, इस पर अपना फैसला सुनाने से इंकार कर दिया। इसका यह मतलब था कि इस वर्ष के पोंगल समारोहों में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध जारी रहेगा। पोंगल समारोहों के दौरान, प्रतिबंध का उल्लंघन करके जल्लीकट्टू आयोजित करने वाले सैकड़ों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अपने पर्व को मनाने और संस्कृति को मानने को अपराधी करार दिये जाने के खिलाफ़ लोगों का गुस्सा पूरे तामिलनाडु में विशाल पैमाने पर किये जा रहे विरोध प्रदर्शनों में फूट पड़ा।

लोगों के गुस्से के इस भारी प्रदर्शन को देखते हुये, केन्द्र सरकार ने लोगों को गुमराह करने तथा उनके संघर्ष को तोड़ने के लिये एक कुटिल योजना बनाई। प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्रियों ने पहले तो ऐलान किया कि वे तामिलनाडु के लोगों की मांगों के प्रति हमदर्द हैं परन्तु जल्लीकट्टू की इजाज़त देते हुये अध्यादेश जारी नहीं कर सकते हैं क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

उसके ठीक तीन दिन बाद, 21 जनवरी, 2017 को राष्ट्रपति ने तामिलनाडु सरकार द्वारा पारित किये गये, पशुओं के साथ क्रूरता रोकथाम अधिनियम, 1960 का संशोधन करने वाले एक अध्यादेश को अनुमति दे दी। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्याओं के मद्देनज़र, जल्लीकट्टू से संबंधित किसी भी आदेश को एक हफ्ते के लिये स्थगित किया जाये। तामिलनाडु के मुख्यमंत्री, ओ. पनीरसेल्वम ने ऐलान कर दिया कि 22 जनवरी, 2017 को पूरे राज्य में जल्लीकट्टू को आयोजित किया जायेगा। उन्होंने लोगों से अपना विरोध रोकने को कहा।

तामिलनाडु के लोग केन्द्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार की इन चालों में नहीं फंसे हैं। उन्होंने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को हमेशा के लिये हटाने की मांग की है। अल्लंगानल्लूर में लोगों ने उस फाटक, जहां से सांड आते हैं, तक पहुंचने वाले सभी रास्तों को रोक दिया। मदुरई के निकट स्थित अल्लंगानल्लूर इस खेल का परंपरागत केन्द्र है। चेन्नई के मरीना समुद्रतट पर 22 जनवरी से पहले की तुलना में, ज्यादा संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुये। लोगों ने कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट और केन्द्र सरकार जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को स्थाई तौर पर नहीं हटाती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।

एक तरफ, केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि तामिलनाडु के लोग इस खेल के लिये इस्तेमाल होने वाले सांडों की खुशहाली की चिंता नहीं करते हैं। दूसरी तरफ, वे तामिलनाडु के लोगों को कह रहे हैं कि कुछ एन.जी.ओ. तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता समस्या खड़ी कर रहे हैं। यह हिन्दोस्तानी राज्य और उसके संस्थानों का स्वाभाविक तरीका है, लोगों को बांटने तथा उनकी समस्याओं के असली स्रोत, असली शैतान से उनका ध्यान हटाने के लिये।

लोगों की समस्याओं का असली स्रोत, असली शैतान केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट हैं। वे दोनों मिलकर, सुनियोजित तरीके से, हमारे लोगों की एकता को तोड़ने के लिये बांटो और राज करो की नीति को लागू करते हैं। वे धर्म, जाति, भाषा, नदियों के जल के आवंटन, राज्यों के बीच सीमाओं और ढेर सारे दूसरे मुद्दों पर लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिये जिम्मेदार हैं। उनकी आंखों के सामने बार-बार सांप्रदायिक जनसंहार आयोजित किये गये हैं, परन्तु गुनहगारों को कभी सज़ा नहीं दी गई है। हिन्दोस्तानी राज्य और उसकी अदालतों से हमारे लोग इंसाफ की उम्मीद कभी नहीं कर सकते हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी तामिलनाडु के लोगों पर इस हमले के लिये केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करती है।

Tag:    Feb 1-15 2017    Voice of the Party    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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