भुगतान बैंक जनता को लूटेंगे

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:33

12 जनवरी को केन्द्रीय वित्त मंत्री ने बड़े शोर-शराबे के साथ एयरटेल व कोटक महिंद्रा बैंक के बीच संयुक्त कारोबार द्वारा बनाये गये पहले भुगतान बैंक की शुरुआत की। विभिन्न लेन-देन के लिए बैंक की शुल्क दरों पर यदि नज़र डालें तो पता लग जाता है कि हिन्दोस्तानी सरकार क्यों और किसके फायदे के लिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दे रही है।

एयरटेल भुगतान बैंक ने घोषणा की है कि 4000 रुपये से ज्यादा नगदी पैसा निकालने पर 0.65 प्रतिशत शुल्क लगेगा; 10 और 4000 रुपये के बीच नगदी पैसा निकालने पर 5 से 25 रुपये का शुल्क लगेगा। दूसरे बैंक को पैसा भेजने के लिए 0.5 प्रतिशत शुल्क लगेगा, मतलब हर 1000 रुपये भेजने पर 5 रुपये शुल्क देना पड़ेगा। यहाँ तक कि भुगतान बैंक में खाता बंद करने के लिए 50 रुपये का शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।

मित्तल की मालिकी के एयरटेल के अलावा मुकेश अंबानी समूह के रिलाएंस जिओ, बिरला समूह के आइडिया मोबाइल और टाटा व चीन के अलीबाबा समूह की मालिकी के पेटीएम को भुगतान बैंक खोलने के लिए लाइसेंस दिये गए हैं।

हर लेन-देन के लिए शुल्क लगाने का प्रस्ताव इस झूठे प्रचार का भंडाफोड़ कर देता है कि नोटबंदी का तथाकथित मकसद भ्रष्टाचारियों पर कर लगाना तथा ईमानदार मेहनती लोगों के हाथों में अधिक धन पहुंचाना है। यह तथ्य कि नए भुगतान बैंक लेन-देन शुल्क लेना चाहते हैं दिखाता है कि मेहनती व ईमानदार लोग डिजिटल भुगतान सेवा प्रदान करने वाले इज़ारेदार पूंजीपतियों की कंपनियों के लिए अधिकतम मुनाफ़ा सुनिश्चित करने के लिए और भी ज्यादा लूटे जायेंगे।

स्थापित व्यवसायिक बैंकों की तुलना में ज्यादा ब्याज दर देकर नए भुगतान बैंक ग्राहकों को लुभा रहे हैं। एक बार उनके चंगुल में फंसने के बाद, हर बार अपना खुद का पैसा निकालने के लिए या किसी दूसरे के अकाउंट में पैसा भेजने के लिए लोगों से शुल्क वसूला जायेगा।

जहाँ “डिजिटल इंडिया” को एक तकनीकी प्रगति और सभी के विकास के लिये दूरदर्शिता कहकर प्रोत्साहित किया जा रहा है, असली अजेंडा है अभी तक शुल्क-रहित सेवाओं पर लोगों को शुल्क देने के लिए मजबूर करना, जिससे पूंजीवादी इज़ारेदार कंपनियां अधिकतम मुनाफ़ा कमा सकें।

सार्वजनिक कामों के लिए ज़रूरी नगदी प्रदान करने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बजाय, राज्य लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए तथा देश के सबसे अमीर पूंजीवादी इज़ारेदार घरानों की दौलत बढ़ाने के लिए शुल्क देने पर मजबूर कर रहा है।

डिजिटल भुगतान के लिए लोगों को मजबूर करना उनके अधिकारों पर हमला है। लोगों को मांग करनी चाहिये कि वे किस तरह भुगतान करें यह तय करने की उन्हें छूट होनी चाहिये तथा जो बैंक सेवाएं अभी तक शुल्क-रहित थीं उन पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता है।

Tag:    Feb 1-15 2017    Political-Economy    2017   

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