पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड के निजीकरण का विरोध

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:40

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड के निजीकरण की घोषित योजना का उसके कर्मचारी सख्त विरोध कर रहे हैं। ऑल इंडिया एविएशन इंप्लाईज़ यूनियन ने इस कंपनी को निजी क्षेत्र के हवाले किये जाने के खिलाफ़ 5 फरवरी, 2017 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध प्रकट किया है।

हाल ही में, सरकार ने पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड को बेचने का फैसला किया है। जनवरी, 2017 के दूसरे सप्ताह में सरकार ने अपनी पूरी 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिये और इसके प्रबंधक नियंत्रण को ट्रांसफर करने के लिए पूंजीपतियों को इसकी कीमत लगाने का टेंडर जारी कर दिया है। इस संयुक्त कंपनी में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओ.एन.जी.सी. की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। भाजपा नीत सरकार का मंत्रीमंडल और नीति आयोग इस कंपनी की 100 प्रतिशत रणनीतिक बिक्री की सिफारिश पहले कर चुके हैं।

गौरतलब है कि पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की हवाई परिवहन कंपनी है। हेलीकॉप्टर सेवा संचालित करने वाली यह कंपनी एशिया में सबसे बड़ी है। इस कंपनी की स्थापना का मुख्य मकसद, देश के दूर-दराज के इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और तेल क्षेत्रों में सेवा के साथ-साथ चार्टर सेवा देना था। पवन हंस, सरकारी और निजी कंपनियों, राजनेताओं, तीर्थयात्रियों, दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ने, खोज और बचाव कार्य, आदि के लिये उड़ान सेवायें प्रदान करती है। यह कंपनी एयरक्राफ्ट इंजीनियर प्रशिक्षण संस्थान चलाने के साथ-साथ सीमा सिक्योरिटी फोर्स और एच.ए.एल. के लिए हेलीकॉप्टरों की उड़ान और देखभाल भी करती है। पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड के 1000 से ज्यादा कर्मचारियों - एयरक्राफ्ट इंजीनियरों, फ्लाइंग इंजीनियरों, पायलटों, तकनीकी कर्मचारियों और सहायक कर्मचारियों की लगन की वजह से सरकारी आमदनी में इस कंपनी का योगदान क्रमशः बढ़ता रहा है। कंपनी की स्थापना 1985 में मात्र 2 हेलीकॉप्टरों के साथ हुई थी। आज इसके पास 43 से अधिक आधुनिक हेलीकॉप्टरों का बेड़ा है।

लोगों के धन से स्थापित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को सरकार द्वारा देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले किये जाने के खिलाफ़ देश भर में मज़दूर संघर्ष कर रहे हैं। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, पवन हंस हेलिकॉप्टर्स लिमिटेड के निजीकरण का विरोध करती है और निजीकरण के खिलाफ़ इसके मज़दूरों के संघर्ष का समर्थन करती है।

Tag:    Feb 16-28 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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