रेल चालकों और गार्डो का विशाल संयुक्त प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:47

2 फरवरी, 2017 को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) और ऑल इंडिया गार्डस कौंसिल (ए.आई.जी.सी.) की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने अपनी मांगों को लेकर संसद पर विशाल धरना दिया।

धरने में भारतीय रेल के विभिन्न मंडलों में काम करने वाले रेल चालक और गार्ड सपरिवार उपस्थित हुये। धरने के समर्थन में मज़दूर एकता कमेटी, दक्षिण रेलवे इंप्लॉईज़ यूनियन और ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसियेशन ने हिस्सा लिया।

धरने को संबोधित करते हुए, सभी वक्ताओं ने भारतीय रेल का निजीकरण करने के लिए सरकार की कड़ी निंदा की।

 

वक्ताओं ने बताया कि भारतीय रेल को निजी हाथों में दिये जाने की योजना, जो बिबेक देबरॉय कमेटी ने बनाई है, उसे लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। बिबेक देबरॉय कमेटी की सिफारिशों में शामिल हैं - भारतीय रेल को अलग-अलग कंपनियों और निगमों में बदलना, विशाल अचल संपत्तियों का ट्रस्ट बनाना, स्कूली व स्वास्थ्य सेवा को खत्म करना और अन्य कामों को निजी हाथों में सौंपना, आदि।

उन्होंने बताया कि सरकार का मकसद, भारतीय रेलवे को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करना है ताकि वे अपने मुनाफ़े की हवस को पूरा कर सकें।

ए.आई.एल.आर.एस.ए. के महासचिव का. एम.एन. प्रसाद ने सभी यूनियनों को एक मंच पर आकर रेलवे के निजीकरण के खिलाफ़ संघर्ष छेड़ने की अपील की।

ए.आई.जी.सी. के महासचिव ए.के. श्रीवास्तव ने कहा कि यह वक्त ‘करो या मरो’ का है।

संसद सदस्य ए. संपत और के. करूणाकरण ने रेल मज़दूरों की समस्याओं को संसद में उठाने का आश्वासन दिया और कहा कि वे रेल मज़दूरों के संघर्ष में साथ हैं।

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लॉईज़ एंड वर्कर्स के महासचिव एम. कृष्णनन ने भारतीय रेल के निजीकरण के बारे में यूनियनों, मज़दूरों, यात्रियों और देशवासियों को जागरुक करने की ज़रूरत पर जोर दिया।

कोलकाता मेट्रो के गौतम दास और ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसियेशन के एम.एस. खान सहित भारतीय रेल के विभिन्न मंडलों से आये ए.आई.एल.आर.एस.ए. और ए.आई.जी.सी. के प्रतिनिधियों - डी.एन.एस. श्रीनिवास राव, यू.एस. सिंह, वी.के. सिंह, द्वारका प्रसाद, आर.एन. दीक्षित, डी. बिश्वास, आर.सी. गुप्ता, अनिल कुमार, एस.एस. कामत, ए.के. पंकज, ए.के. ठाकुर, आर. कुमारेश्वर, जे.एन. शाह, एस.पी. साहू, बी.के. जैन, मनोज कुमार राय, पारस कुमार, डी.एस. कुपाकर, लूणाराम, एच.एस. भदौरिया तथा रविकांत कुमार, आदि ने धरने को संबोधित किया।

सभी प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में ज्वाइंट एक्शन कमेटी को आश्वासन दिया कि रेल के निजीकरण के खिलाफ़ हड़ताल के आह्वान का वे समर्थन करेंगे।

ज्वाइंट एक्शन कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगें थीं :

  1. सातवें वेतन आयोग के अंतर्गत वेतन में 14.29 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाये।
  2. चालक भत्ते पर अधिकार प्राप्त कमेटी को रद्द किया जाये।
  3. लोको चालक स्टाफ के लिए आवंटित वेतन के स्तर की विसंगतियों को सुधारा जाये।
  4. उच्च स्तरीय कमेटी (एच.पी.सी.) की सिफारिशों पर रेल मंत्रालय के फैसले की समीक्षा की जाये।
  5. खतरे के सिग्नल को पार करने पर न्यूनतम दंड के रूप में सेवा से हटाने को लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाये।
  6. नई पेंशन योजना को रद्द किया जाये।
  7. गार्डों को संरक्षा श्रेणी में शामिल किया जाये।     
Tag:    Feb 16-28 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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