किसान संसद में कृषि बजट पेश किया गया

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:54

स्वराज अभियान के जय किसान आंदोलन ने 1 फरवरी, 2017 को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक किसान संसद का आयोजन किया। किसानों की दुखद परिस्थिति पर केन्द्र सरकार की उदासीनता का विरोध करने के लिये ऐसी पहल ली गयी थी।

किसान संसद में पेश किये गये बजट प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल किये गये :

  1. एक नये किसान आय गारंटी कानून के तहत एक संवैधानिक राष्ट्रीय किसान आय आयोग का गठन करना। यह आयोग कृषि क्षेत्र में पारिवारिक आय का आकलन करेगा और यह सभी के लिये उचित आय को टिकाऊ बनाने के सारे कदम उठायेगा।
  2. किसानों के लिये लाभकारी और सर्वव्यापी कीमत मिलना सुनिश्चित करने के लिये, किसानों को लागत खर्चे पर 50 प्रतिशत आमदनी दिलाना। इसके लिये न्यूनतम समर्थन कीमतें व सार्वजनिक वितरण प्रणाली सभी फसलों पर लागू हों।
  3. कृषि क्षेत्र के 18 करोड़ परिवारों के लिये एक बार ऋण मुक्ति दिलाने के लिये पर्याप्त निधि आबंटित करना। सभी निजी कर्जे़ को संस्थागत कर्जों में बदलने के लिये, कुछ चुनिंदा कर्ज़ों की माफी के लिये व अन्य की पुनः संरचना के लिये, भारतीय खाद्य निगम की किसानों के प्रति सभी देय राशियों को चुकाने के लिये, फसलों की बर्बादी पर बेहतर भरपाई देने के लिये तथा काश्तकारों को कर्ज़ों की गारंटी देने के लिये, इस निधि का इस्तेमाल किया जाये।
  4. संस्थागत कर्ज़ों की उपलब्धता को खेतीहरों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना - खास तौर पर काश्तकारों और महिला किसानों तक। एक लाख तक के कर्जे़ के लिये जमानत न हो।
  5.  नोटबंदी से हुए प्रतिकूल असर पर काबू पाने के लिये भरपाई करना।
  6. आत्महत्या किये किसानों के परिवारों को अनुग्रहपूर्वक 5 लाख की अदायगी, सभी कर्ज़ो के लिये कर्ज़माफी या सरकार द्वारा एक बार में निपटारा, जीवित सदस्यों के लिये जीविका पाने में सहायता, बच्चों की शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की उपलब्धि प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करना।
  7.  चिरस्थायी कृषि तथा किसानों की असली ज़मीनी ज़रूरत के मुताबिक अनुसंधान व नयी तकनीकों के लिये ज़रूरी संसाधन जुटाने के लिये निधि स्थापित करना।
  8. कृषि-पर्यावरणीय खेती को बढ़ावा देने के लिये पारंपरिक और जैव खेती को बढ़ावा देना, जिसमें हानिकारक रसायन व तकनीकों का इस्तेमाल न हो।
  9. किसान के नेतृत्व में बीजों की आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिये बीज कंपनियों व वितरकों पर किसानों की निर्भरता को खत्म करना तथा पौधों की विविधता को बचाये रखना।
  10. वर्षा पर आधारित कृषि, जो कि हिन्दोस्तान की कृषि का 60 प्रतिशत से भी अधिक है, इसके समर्थन में एक मिशन का गठन करना। मिशन की प्राथमिकता कृषि को सूखे से बचाना, समर्थन व्यवस्था को वर्षा पर आधारित कृषि के अनुकूल करना, भू-जल के स्तर को बरकरार रखते हुए, शुष्क भूमि पर खेती के लिये ज़रूरी सिंचाई व्यवस्था बनाना तथा जल विभाजन व अन्य छोटी सिंचाई व्यवस्थाओं के लिये संसाधन जुटाना होगी।
  11. छोटे और हाशिये के किसानों को सामूहिक खेती करने को प्रोत्साहन देना और उनके लिये पर्याप्त कार्यशील पूंजी जुटाने तथा प्रसंस्करण व भंडारन की व्यवस्था स्थापित करना।
  12. सभी सरकारी सहायता व्यवस्थाओं को सभी असली खेतीहरों को उपलब्ध कराने के लिये गांवों में सभी मौखिक व अन्य पट्टों को पंजीकृत करते हुए काश्तकारों व बंटाईदारों की पहचान करना तथा एक ऋण गारंटी निधि स्थापित करना ताकि उनको कर्जे़ उपलब्ध कराये जा सकें।
  13. किसानों द्वारा पशु पालन तथा पशुओं की घरेलू नस्लों व जैव विविधता को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में तकनीकी सुधारों, संस्थागत समर्थन, शोध व वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
  14. राष्ट्रीय आपदा राहत निधि स्थापित करना, जिन्हें आज तक सरकारों ने कभी लागू नहीं किया, हालांकि ऐसा करना आपदा प्रबंधन कानून के तहत अनिवार्य है। इससे सूखे से राहत सहित आपदा दूर रखने में सहायता मिलेगी।
  15.  सभी राज्यों को उन सभी अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिये धनराशि उपलब्ध कराना, जो 200 करोड़ रुपयों में पूरी की जा सकती हैं। इन्हें अगले तीन वर्षों में समाप्त करना होगा और इस शर्त के साथ कि इस राशि का कोई हिस्सा संस्थापन या वेतनों पर खर्च नहीं किया जायेगा।
Tag:    Feb 16-28 2017    Political-Economy    2017   

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