गुजरात जनसंहार के मामलों में अदालत के फैसले

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 01:56

3 फरवरी, 2017 को गुजरात के गांधीनगर में एक अदालत ने उस राज्य में मुसलमानों के जनसंहार के दौरान आगजनी और दंगे-फसाद के अपराधों के 28 आरोपियों को निर्दोष घोषित कर दिया। 15 वर्ष बीत चुके हैं और कुछ मामलों में, जैसे कि गुलबर्ग सोसाइटी, गोधरा ट्रेन आगजनी, बिलकिस बानो और बेस्ट बेकरी कांडों में, कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, परन्तु कई प्रमुख हत्याकांड, बलात्कार और लूट के मामलों में, जैसे कि नरोदा पाटिया और सदरपुर में, अदालत ने अभी तक अपना फैसला नहीं सुनाया है। अगर किसी को गिरफ्तार किया भी गया है, तो मुख्य आयोजकों को नहीं बल्कि कुछ समाज-विरोधी तत्वों और निचले अफ़सरों को ही दोषी ठहराया गया है। मात्र एक भूतपूर्व मंत्री को गिरफ्तार किया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, उस समय कमान पर बैठे पुलिस अफ़सरों, मुख्यमंत्री और उनके निकट मित्रों पर न तो मुकदमा चलाया गया है, न ही उन्हें सज़ा दी गयी है, हालांकि अनेक व्यक्तियों और संगठनों ने इसके लिए कई बार कोशिशें की हैं।

जैसा कि जनसंहार के सभी मामलों में होता है - 1983, 1984, 1993, 2013, इत्यादि - समुदाय या राष्ट्रीयता के आधार पर बेकसूर लोगों का कत्लेआम आयोजित करने वालों पर न तो मुकदमा चलाया गया है, न ही उन्हें सज़ा दी गयी है। दूसरी ओर, जो-जो संगठन और व्यक्ति पीड़ितों को इन्साफ दिलाने के लिए संघर्ष करते आये हैं, उन्हें सुनियोजित तरीके से उत्पीड़ित किया गया है। उन संगठनों पर ब्लैकमेल, गवाहों को खरीदने और कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगाये गए हैं। उनके खिलाफ़ कानून तोड़ने के अपराधी केस दर्ज किये गए हैं। इसी तरह, कातिलों को अगुवाई देने वालों को पहचानने के लिए जो-जो व्यक्ति आगे आये हैं, उन्हें डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया है।

हिन्दोस्तानी राज्य ने हर तरह से इन्साफ के सभी असूलों का हनन किया है। सांप्रदायिक अपराधों के असली आयोजकों को सज़ा नहीं मिली है, परन्तु इन्साफ के लिए लड़ने वालों को धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

Tag:    Feb 16-28 2017    Voice of the Party    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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