पंजाब विधान सभा चुनाव

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/02/2017 - 02:00

राज बदलो-समाज बदलो” विषय पर बठिंडा में अधिवेशन

31 जनवरी, 2017 को भठिंडा, पंजाब में एक विशाल अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन का विषय था “राज बदलो-समाज बदलो”। इस अधिवेशन का आयोजन वाम और प्रगतिशील नेताओं की एक समिति ने किया था, जिसमें शामिल थे शिंदर सिंह नाथवाला, झंडा सिंह जेठुके, बूटा सिंह बुर्ज गिल, पावेल कुसा, लाल सिंह गोलेवाला, कमलजीत खन्ना और अन्य, जिन्होंने इस अधिवेशन को संबोधित भी किया। अधिवेशन में 20 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

सभी वक्ताओं ने कहा कि सभी संसदीय पार्टियां लोगों के सामने एक दूसरे पर तरह-तरह के इल्ज़ाम डालने का नाटक कर रही हैं, लेकिन लोगों को इससे आगे बढ़कर सही मायने में लोक-हितों का राज्य स्थापित करने के लिए संगठन बनाना होगा और केवल चुनाव में वोट डालने के अधिकार तक अपने आपको सीमित नहीं रखना होगा।

आयोजकों के खिलाफ़ केस दर्ज

इस अधिवेशन के दो दिन बाद पंजाब पुलिस ने बठिंडा, सिविल लाइन्स थाने में आयोजकों के खिलाफ़ धारा 188 के तहत एक एफ.आई.आर. दर्ज किया। यह एफ.आई.आर. बठिंडा अर्बन विधानसभा चुनाव क्षेत्र के चुनाव अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज की गयी। चुनाव अधिकारियों ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बिना इजाज़त के, सरकारी ज़मीन पर अधिवेशन का आयोजन किया था।

अधिवेशन के आयोजकों ने बताया कि उन्होंने शहर के पुलिस मुख्य अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर को अधिवेशन के बारे में नोटिस दिया था। लेकिन पुलिस मुख्य अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर ने न तो उनको कोई नोटिस दिया और न ही अधिवेशन आयोजित करने से मना किया।

मजदूर एकता लहर यह मांग करती है कि नेताओं पर पुलिस द्वारा लगाये गए झूठे आरोपों को तुरंत वापस लिया जाये।

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में केवल सत्ता में बैठे लोग और उनकी पार्टियां बदल जाती हैं, लेकिन मौजूदा राज्य और व्यवस्था जो लोगों का शोषण और दमन करती है, उनकी जिंदगी बर्बाद करती है, उस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आता है।

इस फरेबी चुनाव की राजनीति के ज़रिये शासक वर्ग लोगों के असली मुद्दों को दबाते हैं, लोगों के संघर्ष की जागरुकता को कम करते हैं और उन्हें बांटते हैं। बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई, ग़रीबी, कुपोषण और आत्महत्या की समस्याओं को हल करने के लिए फौरी कदम उठाने की ज़रूरत है।

अधिवेशन के दौरान कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के साथियों ने पंजाब चुनाव पर जारी पार्टी का बयान “पंजाब को बचाने का एक ही रास्ता - ग़दरियों का रास्ता!” को हजारों की संख्या में लोगों के बीच बांटा।

इसके अलावा कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के साथियों ने साहित्य स्टॉल लगाया, जिसमें पार्टी द्वारा जारी कई महत्वपूर्ण साहित्य व दस्तावेज़ प्रदर्शित किये गये और बेचे गये। इसमें शामिल थे “कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के तीसरे और चैथे महाअधिवेशन के दस्तावेज़”, “हिन्दोस्तान किस दिशा में?”, “किस प्रकार की पार्टी”, “नोटबंदी के असली इरादे और झूठे दावे”, तथा अन्य साहित्य। स्टॉल पर आने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने पंजाब चुनाव पर पार्टी का बयान पढ़ा है और उसका समर्थन करते हैं।

Tag:    Feb 16-28 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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