हिन्दोस्तानी नागरिकता अब धर्म पर निर्भर होगी :

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 20:00

धर्म निरपेक्ष मुखौटे के पीछे से राज्य का सांप्रदायिक स्वभाव स्पष्ट

नागरिकता संशोधन विधेयक-2016 को संसद में इस साल के मानसून सत्र में पेश होने की सम्भावना है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आये जो प्रवासी हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई हैं, उनकी हिन्दोस्तानी नागरिकता की पात्रता की शर्तों को आसान बनाने के लिए, इस विधेयक के ज़रिये, नागरिकता अधिनियम-1955 में संशोधन किया जा रहा है।

अनुच्छेद 8 के तहत हिन्दोस्तान का संविधान किसी को भी, जिनके माता-पिता या दादा-दादी हिन्दोस्तान में पैदा हुए थे, उनके लिये हिन्दोस्तानी नागरिकता प्राप्त करना संभव बनाता है। अन्य व्यक्ति भी आवास के आधार पर हिन्दोस्तानी नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं, यदि वे पिछले 12 महीनों से हिन्दोस्तान में लगातार रह रहे हों और पिछले 14 सालों में से 11 साल तक हिन्दोस्तान में रहे हों। यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो इन तीन देशों से आये, छह धर्मों को मानने वाले प्रवासियों को फिर से कानूनन परिभाषित किया जायेगा और उनके 11 साल के निवास की शर्त को घटाकर 6 साल कर दिया जायेगा, भले ही उनके पास वैध वीजा नहीं है।

कई लोगों ने पहले ही बताया है कि विधेयक में विशेष धर्मों का उल्लेख हिन्दोस्तानी राज्य की “धर्म निरपेक्ष नींव” के दावे के विपरीत है। प्रस्तावित संशोधन में खास बात यह है कि सूचीबद्ध धर्मों की सूची में इस्लाम धर्म को शामिल नहीं किया गया है।

यह स्पष्ट रूप से धर्म के आधार पर भेदभाव है। विधेयक का घोषित लक्ष्य छह धर्मों के उन अवैध प्रवासियों की सहायता करना है जो हिन्दोस्तान को अपनी मातृभूमि बनाना चाहते हैं। लेकिन स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है - कि क्या यह संशोधन केवल सूचीबद्ध धर्मों के अवैध प्रवासियों के लिए ही है और क्या यह दूसरों के लिए नहीं है, जो इस्लाम या किसी अन्य धर्म के हैं या किसी भी धर्म को न मानने वाले हैं।  

विधेयक का अन्तर्निहित औचित्य यह है कि इन छह धर्मों के लोग उन तीनों देशों में धार्मिक अल्पसंख्या में हैं और उनको वहां सताया जाना संभावित है। लेकिन लोगों को केवल उनके धर्म के आधार पर ही नहीं सताया जाता है। कई लोगों को उनकी राष्ट्रीयता के लिए, अपने अधिकारों की मांग करने पर और कई अन्य कारणों के लिए भी सताया जाता है। तो यह स्पष्ट है कि इस विधेयक का इरादा उन देशों में उत्पीड़न की वजह से हिन्दोस्तान में शरण लेने के लिए आने वाले लोगों की मदद करना नहीं है। यदि ऐसा इरादा था तो विधेयक में धर्म का उल्लेख करने की ज़रूरत नहीं थी।

दूसरी ओर, यदि विधेयक का अन्तर्निहित उद्देश्य 1947 के विभाजन के ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना है, यानी उन लोगों की मदद करना है जो किसी भी अन्य कारण से गलत तरफ चले गए, फिर भी धर्म का उल्लेख करना अनावश्यक है। इस्लाम धर्म की आस्था के अनेक लोगों ने हिन्दोस्तान में रहना पसंद किया था और इन तीनों देशों में से और भी अन्य व्यक्ति होंगे जो हिन्दोस्तान को अपनी मातृभूमि चुनना पसंद करेंगे या तो अपने परिवारों के साथ पुनर्मिलन के लिए या किसी अन्य वैध कारण के लिए।

इन उद्देश्यों में से किसी में भी, धर्म के आधार पर भेदभाव के लिए कोई औचित्य नहीं है।

इससे हिन्दोस्तानी राज्य का सांप्रदायिक स्वभाव, उसके धर्म निरपेक्ष मुखौटे के पीछे से साफ नज़र आ रहा है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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