टिटवाला रेल यात्रियों का आंदोलन

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 18:00

महाराष्ट्र में टिटवाला पर्यटन के लिये मशहूर है। लेकिन अनेक समस्याओं की वजह से रेल यात्रियों को टिटवाला रेलवे स्टेशन पर बहुत सी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है। टिटवाला स्टेशन की अनेक समस्याओं के बारे में रेल यात्रियों और निवासियों ने रेल प्रशासन के सामने अपनी मांगों को रखा है। लेकिन उनकी समस्याओं और मांगों की ओर रेल प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। रेल यात्रियों और निवासियों ने एकजुट होकर ‘रेलवे पैसेंजर जनहित संघर्ष मंच’ की स्थापना की है।

मंच ने 1800 रेल यात्रियों के हस्ताक्षर के साथ डी.आर.एम. मुंबई को एक मांग पत्र दिया है। उनकी 12 मांगों में से रेल प्रशासन ने केवल पीने के पानी की मांग पर व्यवस्था की है। बाकी मांगों को लेकर रेल प्रशासन ने कुछ नहीं किया है। कई सालों से रेल की पटरियों का टूटना, पेन्टाग्राफ टूटना, बिजली की तारों का टूटना, सिग्नल में गड़बड़ी, गाड़ी का देर से चलना, ये आम बात हो गये हैं। इसकी वजह से महीने में कई बार रेल यात्रियों को ऑफिस पहुंचने में देरी हो जाती है।

रेल यात्रियों के संघर्ष के कारण रेल प्रशासन ने कुछ मांगों को मानने का आश्वासन दिया। जिनमें शामिल थे - सवारी गाड़ी के आने में देरी होने पर, मेल-एक्सप्रेस को टिटवाला स्टेशन पर रोकेंगे, उसमें यात्रियों को जाने की अनुमति देंगे, प्लेटफार्म पर पीने के पानी की व्यवस्था करेंगे, दुर्घटना के लिये उपचार कक्ष और एम्बुलेंस की व्यवस्था करेंगे, कसारा साइड का शौचालय चालू करेंगे, आदि।

जब डी.आर.एम. ने अपने वायदों को 2 महीने तक पूरा नहीं किया तब ‘रेलवे पैसेंजर जनहित संघर्ष मंच’ टिटवाला की तरफ से 11024 रेल यात्रियों के हस्ताक्षर लेकर वरिष्ठ स्तर के जनरल मैनेजर और रेल मंत्री को अपनी मांगों का मांगपत्र 17 जनवरी, 2017 को दिया गया। खबरों के मुताबिक वे अपने संघर्ष को तेज़ करने की तैयारी कर रहे हैं।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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