अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में नौकरियों की भारी तबाही

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 18:00

बड़ी इज़ारेदार कंपनियों के बीच जबरदस्त होड़ के चलते इन कंपनियों के विलयन की वजह से हाल के महीनों में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों मज़दूरों को नौकरियों से निकाला गया है।

टेलिकॉम के क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से विलयन और अधिग्रहण की लहर सी चल पड़ी है और ऐसा अंदेशा है कि यह लहर बड़े पैमाने पर नौकरियों को बर्बाद करेगी।

रिलायंस जियो जिसने पूरे बाज़ार को अपनी मुफ्त सेवाओं से हिलाकर रख दिया है, उससे टक्कर लेने के लिए आईडिया सेल्युलर और वोडाफोन विलयन की कोशिश कर रहे हैं। एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) के बीच भी विलयन के लिए बातचीत चल रही है। रूस के एम.टी.एस. का आरकॉम के साथ विलयन हो चुका है। नॉर्वे की टेलीनॉर आरकॉम-एयरसेल के गठबंधन में विलयन करना चाहती है या फिर एयरटेल द्वारा अधिग्रहित होना चाहती है।

15 फरवरी को एयरसेल ने ऐलान किया कि जल्द ही वह हिन्दोस्तान में अपने 8000 मज़दूरों में से 700 की छंटनी करने जा रही है। दूसरी बड़ी टेलिकॉम कंपनियां भी जल्दी ही ऐसा करने जा रही हैं। टेलिकॉम उद्योग के जानकार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस क्षेत्र में पूंजी के संकेंद्रीकरण की वजह से हिन्दोस्तान में 3,00,000 टेलिकॉम मज़दूरों में से 1,00,000 मज़दूर अपनी नौकरियां खोने जा रहे हैं।

इसी तरह टेलिकॉम से संबंधित अन्य उद्योगों में, खास तौर से टावर के क्षेत्र में संकेन्द्रण की प्रक्रिया जारी है। 2016 में अमरिकन टावर्स (ए.टी.सी.) ने विओम नेटवर्क को खरीद लिया और इसके चलते उसने अपने मज़दूरों की संख्या एक-तिहाई घटा दी। इसके बाद ब्रुकफील्ड ने आरकॉम को 1.6 अरब डॉलर में खरीद लिया। विलयन के चलते भारती इन्फ्राटेल और इंडस टावर्स में भी बड़े पैमाने पर छंटनी होने का अंदेशा है।

आई.टी. उद्योग, जिसे इस दौर का सबसे बड़ा नौकरी पैदा करने वाला क्षेत्र माना जाता रहा था, तेज़ तकनीकी परिवर्तन और सरमायदारों के बीच जबरदस्त होड़ की वजह से बड़े पैमाने पर रोज़गार का विनाश देख रहा है। तेज़ी से मुनाफे़ की गिरती दर को रोकने के लिए आई.टी. कंपनियां निचले स्तर पर प्रोग्रामरों की छंटनी कर रही हैं। इनफोसिस, जो कि हिन्दोस्तान में दूसरी सबसे बड़ी इज़ारेदार आई.टी. कंपनी है, इसने पिछले एक साल में 9000 से अधिक आई.टी. मज़दूरों की छंटनी की है। 2016 में प्रत्येक तिमाही में 2000 मज़दूरों को नौकरी से निकाला है।   

प्रिंट मीडिया एक और क्षेत्र है, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां बर्बाद हो रही हैं। फरवरी की शुरुआत में ए.बी.पी. मीडिया समूह, जो कि टेलीग्राफ और आनंद बाज़ार पत्रिका का मालिक है, इसमें से 700 मज़दूरों को एक ही झटके में नौकरी से निकाल दिया गया। 

इन सबसे स्पष्ट होता है कि पूंजीवाद, जो कि अपने उच्चतम इज़ारेदारी और परजीवी पड़ाव पर है, यह रोज़गार पैदा करने के बजाय रोज़गार बरबाद करने का साधन बन गया है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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