स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र में मज़दूर हकों पर हमला

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 08:00

2016 की शुरुआत में केन्द्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने विशिष्ठ रूप से श्रम अधिकारों के कानूनों के सन्दर्भ में नए-नए स्थापित “स्टार्ट-अप” कंपनियों के लिए एक परामर्शिका जारी की। अब तक 10 राज्यों ने इस परामर्शिका के अनुसार कदम उठाने की सहमति जताई है। इन राज्यों में से सबसे पहले महाराष्ट्र ने कदम उठाया है, जो कि अगले तीन साल तक स्टार्ट-अप कंपनियों को श्रम कानूनों के सन्दर्भ में निरीक्षण से मुक्ति दिलवाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

स्टार्ट-अप कंपनियों को कई कानूनों को लागू न करने की अनुमति दी जा रही है। जिनमें शामिल हैं - ठेका मजदूरी (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम-1970, भवन एवं अन्य निर्माण मज़दूर (रोज़गार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम-1996, अंतर-राज्य प्रवासी मज़दूर (रोज़गार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम-1979, ग्रेच्यूटी भुगतान अधिनियम-1972, कर्मचारी भविष्य निधि और प्रर्कीण उपबंध अधिनियम-1952, और कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम-1948।

अपने कार्य के पहले साल में कोई भी स्टार्ट-अप कंपनी इन सभी श्रम कानूनों के तहत किसी भी तरह की जांच से मुक्त रहेगी। दूसरे और तीसरे सालों में स्टार्ट-अप कंपनियों को स्वयं प्रमाणित रिपोर्ट दिखानी होगी। इनकी जांच तभी होगी जब कानूनों के उल्लंघन की विश्वसनीय और निरीक्षित शिकायतें लिखित में दर्ज़ की गयी हों”

बदले हुए मानदंडों के बारे में एक सरकारी आदेश के जल्द ही जारी होने की संभावना है। महाराष्ट्र सरकार ये सुधार कारोबार को सुगम” बनाने की अपनी कोशिश के तहत कर रही है। मज़दूरों के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा के इस तरह से उल्लंघन के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे स्टार्ट-अप कंपनियों को शुरुआती सिर दर्द” से छुटकारा मिलेगा!

यह नए नियम उन स्टार्ट-अप कंपनियों पर लागू होंगे जिनका सालाना कारोबार 25 करोड़ रुपये से कम हो और जिनकी रजिस्ट्री की तारीख पांच साल से पहले की न हो। महाराष्ट्र में आधिकारिक अनुमान के हिसाब से 98,000 स्टार्ट-अप इस “छूट” का लाभ उठा पाएंगे। औसत रूप से अगर हर कंपनी में 10 मज़दूर हैं तो इसका मतलब है कि 9,80,000 मज़दूरों को उनके अधिकारों से वंचित किया जायेगा।

पहले से ही महाराष्ट्र सरकार ने मेक इन महाराष्ट्र” के तहत कई श्रम कानूनों को कमज़ोर कर दिया है। पिछले साल महाराष्ट्र सरकार ने 16 श्रम कानूनों के स्वयं प्रमाणन की अनुमति दी। इसमें शामिल हैं - न्यूनतम वेतन अधिनियम, बाल मज़दूरी अधिनियम और मातृत्व लाभ अधिनियम। सरकार ने तो फैक्ट्री की परिभाषा ही बदल दी है ताकि फैक्ट्री अधिनियम के तहत जांच के दायरे में आने वाली इकाइयों की गिनती ही कम हो जाये।

हाल ही में स्टार्ट-अप कंपनियों को दी गयी छूट, लाखों करोड़ों मज़दूरों के अधिकारों पर बढ़ता हुआ हमला है। इसकी पूरी तरह से निन्दा की जानी चाहिये और विरोध किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र के मज़दूर वर्ग की इन हमलों के खिलाफ़ लड़ाई को सभी मज़दूर वर्ग की पार्टियों, संगठनों तथा जनवादी ताक़तों के समर्थन की ज़रूरत है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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