पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ संघर्ष पर राजकीय आतंक

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 09:00

जैसा कि मजदूर एकता लहर में पहले भी खबर दी गयी थी कि पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में भांगोर के लोगों ने पावर ग्रिड कॉरपारेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पी.जी.सी.आई.एल.) द्वारा बलपूर्वक उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के खि़लाफ़ एक ज़ोरदार संघर्ष छेड़ दिया है।

प्रभावित क्षेत्र में गांववासियों के अनुसार भूमि के अधिग्रहण के लिए कभी भी उनकी सहमति नहीं ली गयी थी। राज्य सरकार जो कि केन्द्र सरकार की कंपनी के लिये भूमि अधिग्रहण कर रही है, वह भूमि के वर्तमान मालिकों से बहुत ही कम दामों पर ज़मीन ले रही है। पी.जी.सी.आई.एल. इस जगह पर एक 440/220 किलोवॉट का पावर ग्रिड जिसमें एक सब-स्टेशन भी है और 450 मैगावॉट डबल सर्किट बिजली वितरण लाइनें बिछाने की योजना बना रही है। प्रभावित क्षेत्र के लोग इससे अपने स्वास्थ्य पर होने वाले ख़तरे को लेकर बहुत चिंतित हैं और घबराये हुए हैं।

खबर यह है कि:

  • पुलिस और हथियार बंद गुंडों ने गोली चलाकर दो लोगों की हत्या कर दी है। कई लोगों को पीटा गया है तथा कई घायल हो गये हैं।
  • के.एन. रामचन्द्रण सी.पी.आई. (एम.एल.-रेड स्टार) के महासचिव को हिरासत में लेकर उत्पीड़ित किया गया है।
  • प्रदर्शन कर रहे तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। उनके साथ-साथ 35 और कार्यकर्ताओं को हिंसा भड़काने के झूठे आरोप लगाकर पुलिस ने 8 दिन तक हिरासत में रखा।
  • खबरों के अनुसार पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं पर धारा 18 और 19 लगाकर यू.ए.पी.ए. जैसे काले कानून के तहत आरोपी करार दिया है।
Tag:    भूमि अधिग्रहण    राजकीय आतंक    पावर ग्रिड कॉरपारेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड    Mar 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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