नई नींव पर गणतंत्र की स्थापना

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 12:00

संपादक, महोदय

24 जनवरी को जारी हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का बयान “नयी नींवों पर गणतंत्र का नव-निर्माण करना होगा” जो कि देश के गणतंत्र की 67वीं सालगिरह पर छपा था, मैं उसके संदर्भ में यह पत्र लिख रहा हूं।

इस बयान के साथ कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने यह दिखाया है कि आज-कल के घबराहट और उलझन वाले समय में भी हिन्दोस्तानी समाज की मुक्ति के लिये अटूट प्रतिबद्धता से सच्चे रास्ते पर चलना मुमकिन है।

इसको सुनिश्चित करने के लिये यह बहुत ज़रूरी है कि लोग और मज़दूर वर्ग पूंजीपतियों के झूठ और विचलित करने वाली बातों में न आयें और अंधराष्ट्रवादी तथा घटिया अवसरवादी बनने से बचें। इसको परखने के लिए ज़रूरी है कि हम यह समझें कि हिन्दोस्तानी राज्य की नींव की हकीक़त क्या है और आगे का रास्ता क्या है। इसके लिए इस फर्ज़ी दावे का पर्दाफाश करना ज़रूरी है कि हिन्दोस्तानी राज्य को हिन्दोस्तान के लोगों ने बनाया था। जबकि सच तो यह है कि जब 1947 में बर्तानवी उपनिवेशवादी हिन्दोस्तान से गये तब शोषक अल्पसंख्यक वर्ग को यही सत्ता विरासत में मिली थी। 1950 का संविधान इस जन-विरोधी सत्ता के हस्तांतरण को जायज़ ठहराता है। इस फरेब को समझाने से इंकार करना हिन्दोस्तानी राजनीति की सबसे बड़ी समस्या रही है, जो कि हमारे देश को आगे बढ़ने से रोक रही है।

जिन्होंने हिन्दोस्तान की आज़ादी के लिये 1947 से पहले अनगिनत लड़ाइयां लड़ीं उन्होंने अपनी ज़िन्दगी देश को इस हालत में देखने के लिये नहीं दी थी। हिन्दोस्तान की आज़ादी आज भी अधूरी है, इसलिये मौजूदा गणतंत्र को जड़ से उखाड़कर एक नयी नींव पर इसकी स्थापना करने की चुनौती को हमें स्वीकार करना होगा।

नये गणतंत्र के संविधान को लोगों के हाथ में संप्रभुता सुनिश्चित करनी होगी। जहां सभी लोगों की खुशहाली और सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी होगी। और सभी के मानव, राष्ट्रीय और जनतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित किये जायेंगे। मुझे इस बयान को स्वीकार करने में गर्व महसूस होता है।

आपका, ए. नारायण,

बैंगलूरू

Tag:    नई नींव    गणतंत्र की स्थापना    Mar 1-15 2017    Letters to Editor    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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