उबर और ओला चालकों की जायज़ हड़ताल

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 14:00

उबर और ओला कंपनियों के लिए काम कर रहे टैक्सी चालक बीते 10 फरवरी से दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हड़ताल पर हैं। उनका नेतृत्व दिल्ली के सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन और राजधानी टूरिस्ट ड्राइवर यूनियन कर रही हैं। दिल्ली में लगभग 1,50,000 टैक्सियां ओला और उबर से जुड़ी हुई हैं।

उबर और ओला पूंजीवादी कंपनियां हैं जो दिल्ली और देश के अन्य शहरों में टैक्सी व्यापार पर अपना एकाधिकार जमाने के लिए आपसी होड़ और सहयोग कर रही हैं। अन्य सभी प्रतिस्पर्धियों को हटाने के लिए, दोनों उबर और ओला सस्ते दामों और तमाम प्रकार की स्कीमों, मुफ्त सफर और सांझा किराया, इत्यादि से ग्राहकों को लुभा रही हैं। अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाने के लिए ये कंपनियां टैक्सी चालकों को आकर्षक प्रलोभन दे रही हैं। बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा अपने नियंत्रण में करने के बाद अब वे चालकों को पूरी तरह से निचोड़ रही हैं।

इन कंपनियों ने शुरुआत में चालकों को 1,25,000 रुपये प्रति माह तक की कमाई का वादा किया था। प्रतिमाह दी जाने वाली कार के कर्जे़ की किश्त तथा अन्य खर्चों को चुकाकर, टैक्सी का चालक अपने घर 40,000 रुपये तक ले जाया करता था। इससे कई टैक्सी चालक इनसे जुड़ने को आकर्षित हुए। लेकिन एक बार जब चालक इन कंपनियों से जुड़ गए, तब कंपनी ने अपने कमीशन को बढ़ा दिया और इंसेंटिव पूरी तरह से खत्म कर दिया। इसके साथ ही सड़क पर टैक्सियों की तादाद बढ़ जाने से चालकों की महीने की कुल आय घटकर 25,000 रुपये तक हो गयी है।Ola worker Dhana in delhi

अधिकतर चालकों ने इन्ही कंपनियों से 4,50,000 रुपये तक का कर्ज़ा लेकर टैक्सी खरीदी है। और वे हर महीने लगभग 16,000 रुपये की किश्त दे रहे हैं। यह किश्त अब उनकी कुल आय 25,000 रुपये से ही निकल रही है और उनके पास अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कुछ भी नहीं बचता है। 12 फरवरी को उबर चालक प्रवीण कुमार ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि वह प्रत्येक माह किश्त की रकम देने में असमर्थ हो गया था और साथ ही उसे अपनी टैक्सी के छिन जाने का डर था।

ओला और उबर चालकों की यह हड़ताल बैंगलूरू और पुणे में भी क्रमषः 23 जनवरी और 2 फरवरी को हुई। अन्य देशों में भी ऐसे संघर्ष हुए हैं।

उबर और ओला कंपनियों ने चालकों को व्यापार के भागीदार” बताकर और उन्हें कर्ज़ पर कार लेने के लिए बाध्य करके उन पर बहुत बड़ा जोखिम डाला है। जबकि प्रति दिन उन्हें बहुत लम्बे समय तक कठिन मेहनत करनी होती है, चालकों को न तो न्यूनतम आय की गारंटी है और न ही वेतनभोगी मज़दूर की तरह कोई अधिकार हैं।

ओला और उबर के मालिकों ने हड़ताली चालकों के खिलाफ़ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने चालकों की यूनियन पर आरोप लगाया है कि वे उनके मुनाफ़ेदार व्यापारी नमूने के रास्ते में बाधा डाल रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह उन चालकों को सुरक्षा प्रदान करे जो हड़ताल में शामिल नहीं होना चाहते हैं। न्यायालय ने यूनियनों को यह भी चेतावनी दी है कि वे भूल जायें कि वे इन कंपनियों से कुछ भी ऐंठ सकती हैं, जैसे कि वे हड़ताल करके सरकार के साथ करती हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय का यह फैसला बेहद मज़दूर-विरोधी और पूंजीपति-परस्त है। यह हाल ही में ब्राजील के न्यायालय द्वारा उबर के मामले में दिए गए फैसले के विपरीत है, जहां यह कहा गया कि उबर को अपने चालकों के साथ अपने कर्मचारी जैसा व्यवहार करना चाहिए और उन्हें सभी अधिकार और सहूलियतें प्राप्त हों जो एक कर्मचारी को मिलनी चाहिएं।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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