दिल्ली में राजनीतिक मंच :

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 15:00

नोटबंदी राष्ट्रीय हित में नहीं है

“क्या नोटबंदी राष्ट्रीय हित में है” विषय पर एक गोलमेज गोष्ठी हुई जिसमें सभी ने ठोस विचार देते हुये बताया कि नोटबंदी मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी है।

यह गोष्ठी 15 फरवरी, 2017 को लोक राज संगठन की दिल्ली परिषद द्वारा आयोजित की गयी। इस गोष्ठी का संचालन श्रीमती सुचरिता जी ने किया।

लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस. राघवन ने सभा की शुरुआत में अपने विचार दिए उसके बाद मंच को चर्चा के लिए खोला गया। चर्चा के दौरान कई वक्ताओं ने अपने विचार दिए जिनमें ऑल इंडिया बैंक इम्पलॉईज़ एसोसिएशन से कॉमरेड डी.डी. रस्तोगी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से कॉमरेड वार्ष्णेय, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से कॉमरेड प्रकाश राव और कॉमरेड धर्मेन्दर कुमार, सी.पी.आई.एम.एल. (न्यू प्रोलेतेरियन) से कॉमरेड शियोमंगल सिद्धांकर, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर (कम्युनिस्ट) से कॉमरेड आर.के. शर्मा, क्रांतिकारी युवा संगठन से कॉमरेड आलोक, पीपल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया से कॉमरेड अर्जुन प्रसाद, सिटिजन फॉर डेमोक्रेसी से एन.डी. पंचोली, इंकलाबी मजदूर केन्द्र से कॉमरेड नागेन्द्र तथा एम.एम. गुप्ता और कॉमरेड बी.एस. शर्मा थे।

Meeting on Note ban in delhiMeeting on Note ban in delhi

वक्ताओं ने बताया कि सरकार ने झूठा दावा किया कि इससे कालाधन निकाला जायेगा और इससे आतंकवाद पर रोक लगायी जायेगी तथा इससे अमीरी और गरीबी के बीच की दूरी कम हो जायेगी। इस झूठ के खिलाफ़ किसी ने भी विरोध किया या इस पर सवाल उठाया तो उस पर देशद्रोही का ठप्पा लगाया गया। इस झूठ का मकसद था कि नोटबंदी के आदेश की सच्चाई पर पर्दा डालना कि यह इज़ारेदार घरानों और वित्त पूंजी के आदेश से किया गया था। इलेक्ट्रॉनिक भुगतान कंपनियों के लिये बेशुमार मुनाफे़ बनाने के मौके देने के लिये सोच-समझकर इस तरह का माहौल बनाया गया कि नगदी की कमी है।

कॉमरेड डी.डी. रस्तोगी ने बताया कि नोटबंदी की वजह से बैंक धन से भर गये हैं। बड़ी मात्रा में जाली नोट बैंकों में आये हैं, जिसके लिये सरकार बैंक कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहरायेगी। उन्होंने कहा कि बड़े पूंजीपतियों द्वारा न चुकाये गये कर्ज़ (एन.पी.ए.) की मात्रा 12 लाख करोड़ रुपये है। सरकार ने न चुकाये गये कर्ज़ के लिये एक विशेष बैंक स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा था। उन्होंने कहा कि सरकार यह प्रचार कर रही है कि ब्याज दरों को कम करने से लोगों को फायदा होगा। जबकि सच्चाई यह है कि लोगों की जमा पूंजी पर मिलने वाली ब्याज दर और भी कम हो जाएगी, जिससे बहुसंख्यक जनता को नुकसान होगा।

कॉमरेड वार्ष्णेय ने कहा कि ऐसी अनगिनत पूंजी है जो नगदी के रूप में नहीं है, जो विदेशी बैंकों में छिपाकर रखी गई है। अभी तो सिर्फ माल्या ही खबरों में है जबकि 100 पूंजीपति देश छोड़कर जा चुके हैं, जिन पर टैक्स का बकाया था। उन्होंने कहा कि यह साबित हो चुका है कि तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों के पीछे अमरीकी साम्राज्यवाद ही है।

कॉमरेड प्रकाश राव ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि नोटबंदी योजनाबद्ध तरीके से लोगों पर हमला थी, जिसे हिन्दोस्तानी और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आदेशनुसार किया गया था। उन्होंने अनेक उदाहरण देते हुए समझाया कि तथाकथित भष्टाचार विरोधी सुधार और सुशासन ये अमरीकी साम्राज्यवाद के मनपंसद अजेंडे हैं।

उन्होंने वर्तमान व्यवस्था और राजनीतिक प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुये बताया कि यह जनता को फैसले लेने से दूर रखती है। बड़े पूंजीपति तय करते हैं कि किस पार्टी या गठबंधन को सत्ता में लेकर आना है जो इनके अजेंडे को लागू करेगी। कम्युनिस्ट और वे सभी जो समाज की भलाई में रुचि रखते हैं, उन सभी का कर्तव्य है कि वे राजनीतिक सत्ता को अपने हाथों में लेने के लिये मज़दूर वर्ग और मेहनतकष जनता को संगठित करें।

कॉमरेड सिद्धांतकर ने कहा कि पूंजीवादी हमलों को हराने के लिये जागृत होकर मज़दूर वर्ग को संगठित करना है, साथ-साथ आधुनिक क्षेत्र के मज़दूरों को भी शामिल करना होगा, जिनकी रुचि अपने वर्ग के साथ है।

कॉमरेड आर.के. षर्मा ने कहा कि यह वह वर्ग है जो सत्ता में है और यह अजेंडा तय करता है। नोटबंदी बड़े पूंजीपतियों की सेवा के लिये की गई है। उन्होंने बताया कि बड़े इज़ारेदार पूंजीपति खुदरा व्यापार को नष्ट करने के लिये रास्ते ढूंढ रहे हैं जो कि उनके लिये रुकावट है, यह नोटबंदी के कारणों में से एक है।

चर्चा का समापन करते हुये लोक राज संगठन की सुचरिता ने आह्वान किया कि पूंजीपतियों का अजेंडा, जो कि समाज पर थोपा जा रहा है, को हराने के लिये हमें लोगों को लामबंद करना होगा।

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पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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